Breaking News: रायपुर सिटी सेंटर मॉल के पास भीषण सड़क हादसा, शराब के नशे में धुत पहुंचे पुलिसकर्मी, आपातकालीन सेवा 112 की लेटलतीफी से जनता में भारी आक्रोश
रायपुर के सिटी सेंटर मॉल के पास हुए एक सड़क हादसे के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दुर्घटना के आधे घंटे बाद पहुंची आपातकालीन पुलिस सेवा 112 और मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के शराब के नशे में होने के आरोपों ने स्थानीय जनता के गुस्से को भड़का दिया है।

रायपुर, 1 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में से एक सिटी सेंटर मॉल के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। इस घटना ने न केवल शहर की यातायात व्यवस्था बल्कि आपातकालीन पुलिस सेवाओं की मुस्तैदी और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के इस व्यस्त मार्ग पर हुए हादसे के बाद घटना स्थल पर भारी हंगामा देखने को मिला। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग और राहगीर पीड़ितों की मदद के लिए दौड़ पड़े।
सड़क दुर्घटना जैसी संवेदनशील स्थिति में जहां हर एक सेकंड किसी की जान बचाने के लिए बेहद कीमती होता है, वहीं पुलिस विभाग की घोर लापरवाही ने लोगों को हैरान कर दिया। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना होने के तुरंत बाद आपातकालीन सेवा डायल 112 को सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस की यह आपातकालीन गाड़ी घटना के लगभग आधे घंटे बाद मौके पर पहुंची। इस लेटलतीफी के कारण घायल काफी देर तक तड़पते रहे। इसके अलावा, जब स्थानीय थाना पुलिस की टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची, तो वहां मौजूद भीड़ उस समय और अधिक आक्रोशित हो गई जब पुलिसकर्मियों के खुद शराब के नशे में धुत होने की बात सामने आई।
हादसे की भयावहता और मौके पर मची चीख-पुकार
यह पूरी घटना रायपुर के पंडरी मोवा मार्ग पर स्थित सिटी सेंटर मॉल के ठीक सामने की है। देर शाम को जब मॉल और आसपास के बाजारों में लोगों की भारी भीड़ मौजूद थी, तभी एक तेज रफ्तार वाहन ने अनियंत्रित होकर दूसरी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए और दुर्घटना की आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार और राहगीर तुरंत मौके की तरफ भागे। हादसे में गाड़ियों में सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और वाहन के भीतर ही फंस गए।
स्थानीय युवाओं और राहगीरों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए घायल व्यक्तियों को क्षतिग्रस्त वाहनों से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोगों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस और पुलिस दोनों को फोन करना शुरू कर दिया। इस तरह के हादसों में शुरुआती समय को गोल्डन ऑवर माना जाता है जिसमें त्वरित इलाज मिलने पर मरीज की जान बचने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
डायल 112 की लेटलतीफी से बढ़ा लोगों का गुस्सा
छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित सहायता के लिए शुरू की गई डायल 112 सेवा इस घटना के दौरान पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। घटना स्थल पर मौजूद नागरिकों ने बताया कि एक्सीडेंट के तुरंत बाद ही डायल 112 को कई कॉल किए गए थे। ऑपरेटरों द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद, पुलिस की गाड़ी को घटना स्थल तक पहुंचने में 30 मिनट से अधिक का समय लग गया।
रायपुर जैसे प्रमुख शहर के मध्य क्षेत्र में, जहां पुलिस गश्त का दावा लगातार किया जाता है, वहां आधे घंटे की यह देरी प्रशासनिक विफलता को साफ दर्शाती है। पुलिस वाहन के समय पर न पहुंचने के कारण स्थानीय लोगों को खुद ही निजी वाहनों और ऑटो की व्यवस्था करके घायलों को नजदीकी अस्पताल भेजना पड़ा। जनता का कहना है कि अगर समय रहते आपातकालीन वाहन पहुंच जाता, तो घायलों को अधिक सुरक्षित तरीके से तुरंत चिकित्सा मिल सकती थी।
शराब के नशे में धुत होकर जांच करने पहुंचे जिम्मेदार
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे शर्मनाक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब स्थानीय पुलिस थाने की टीम मौके पर पहुंची। घटना स्थल पर कानून व्यवस्था संभालने और दुर्घटना की जांच करने आए पुलिसकर्मियों के व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग दंग रह गए। पुलिसकर्मियों के चलने के तरीके और उनकी भाषा से साफ लग रहा था कि वे अत्यधिक शराब के नशे में थे।
जब भीड़ ने पुलिसकर्मियों से देरी से आने का कारण पूछा और लापरवाही का विरोध किया, तो नशे में धुत पुलिसकर्मी उल्टा जनता पर ही धौंस जमाने लगे। उनके मुंह से शराब की तेज दुर्गंध आ रही थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने अपने मोबाइल फोन से पुलिसकर्मियों का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो बनता देख कुछ पुलिसकर्मी अपनी गाड़ियां छोड़कर पीछे हटने लगे, जिससे जनता का शक पूरी तरह यकीन में बदल गया कि सुरक्षा के जिम्मेदार खुद कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
घटनास्थल पर भारी हंगामा और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
पुलिसकर्मियों के नशे में होने की पुष्टि होते ही मॉल के सामने मौजूद सैकड़ों लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। जनता ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का आरोप था कि रायपुर पुलिस रात के समय आम नागरिकों की सुरक्षा करने के बजाय खुद नशे में डूबी रहती है। हंगामे की स्थिति को देखते हुए यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया और सिटी सेंटर मॉल के सामने दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
हादसे और नशेड़ी पुलिसकर्मियों के इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वहां मौजूद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लाइव कर दिया। कुछ ही मिनटों में यह वीडियो रायपुर के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुपों, ट्विटर और फेसबुक पर तेजी से वायरल होने लगा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही शहर के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर रवाना किया गया।
पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की सफाई और कार्रवाई का आश्वासन
मामला बढ़ने और सोशल मीडिया पर फजीहत होने के बाद रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस घटना पर संज्ञान लिया है। पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन करना और आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही बरतना बेहद गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। मौके पर मौजूद जिन पुलिसकर्मियों पर शराब पीने के आरोप लगे हैं, उन्हें मेडिकल जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यदि मेडिकल रिपोर्ट में अल्कोहल की पुष्टि होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। साथ ही डायल 112 की देरी के कारणों की भी तकनीकी समीक्षा की जा रही है।
रायपुर में बढ़ते सड़क हादसे और पुलिसिंग पर उठते गंभीर सवाल
यह घटना रायपुर में कोई पहली बार नहीं है जब पुलिस की कार्यप्रणाली पर इस तरह के गंभीर सवाल उठे हों। पिछले कुछ महीनों में रायपुर के विभिन्न चौक-चौराहों, जैसे तेलीबांधा, पंडरी, कालीबाड़ी और वीआईपी रोड पर देर रात होने वाले हादसों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। यातायात विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहर में नशे में गाड़ी चलाने के मामलों में भारी उछाल आया है, जिसे रोकने के लिए समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाने का दावा किया जाता है।
लेकिन जब खुद कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारी और कर्मचारी ही इस तरह के कृत्यों में संलिप्त पाए जाएंगे, तो आम जनता के बीच सुरक्षा की भावना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। नागरिकों का कहना है कि पुलिस केवल आम जनता का चालान काटने और उन पर जुर्माना लगाने में तत्परता दिखाती है, लेकिन जब खुद की जिम्मेदारी निभाने की बात आती है, तो प्रशासनिक अमला पूरी तरह पंगु नजर आता है।
स्थानीय नागरिकों की मांग और आगामी कदम
इस दर्दनाक हादसे और पुलिसिया लापरवाही के बाद रायपुर के सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने गृह विभाग और छत्तीसगढ़ शासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल निलंबन जैसी छोटी कार्रवाई से इस व्यवस्था में सुधार नहीं होने वाला है। ड्यूटी के दौरान शराब पीकर जनता से बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य कर्मचारी ऐसी हिम्मत न कर सके।
इसके साथ ही डायल 112 की रिस्पॉन्स टाइमिंग को सुधारने के लिए भी कड़े कदम उठाने की मांग की जा रही है। वीआईपी और व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में आपातकालीन वाहनों की तैनाती इस तरह से की जानी चाहिए कि वे सूचना मिलने के 5 से 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच सकें। बहरहाल, सिटी सेंटर मॉल के पास हुआ यह हादसा और इसके बाद की तस्वीरें छत्तीसगढ़ पुलिस के चेहरे पर एक बड़ा दाग छोड़ गई हैं, जिसे साफ करने के लिए अब कड़े और पारदर्शी फैसलों की जरूरत है।



