रायपुर के भाटागांव में स्कूली छात्रों के बीच खूनी झड़प: सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी
रायपुर के भाटागांव में स्कूली छात्रों के दो गुटों के बीच सड़क पर हुई हिंसक झड़प का वीडियो वायरल। पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लेकर जांच शुरू की।

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद भाटागांव स्थित एक निजी स्कूल के पास हुआ। बताया जा रहा है कि छुट्टी के बाद दो गुटों के छात्र आमने-सामने आ गए। शुरुआत में किसी छोटी सी बात पर बहसबाजी हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। रास्ते से गुजर रहे किसी राहगीर ने इस पूरी वारदात को अपने मोबाइल में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इसके बाद से ही यह वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि स्कूली वर्दी पहने दर्जनों छात्र सड़क पर एक-दूसरे पर झपट रहे हैं। कुछ लड़के एक छात्र को घेरकर बेदर्दी से पीट रहे हैं, जबकि आसपास खड़े अन्य छात्र बीच-बचाव करने के बजाय तमाशबीन बने हुए हैं। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर वक्त रहते कुछ राहगीर दखल नहीं देते, तो किसी छात्र की जान पर बन आती। सड़क पर काफी देर तक चले इस हंगामे के कारण भाटागांव मेन रोड पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और वाहनों की कतार लग गई थी।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि विवाद की वजह पुरानी रंजिश बताई जा रही है। स्कूल परिसर के भीतर किसी बात को लेकर छात्रों के बीच तनातनी शुरू हुई थी, जो स्कूल खत्म होने के बाद सड़क पर मारपीट के रूप में बाहर आई। कुछ छात्रों ने अपने बाहरी दोस्तों को भी मौके पर बुला लिया था, जिससे मामला और ज्यादा हिंसक हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इलाके में अक्सर छुट्टी के समय लड़कों की टोली जमा होती है, लेकिन पुलिस गश्त न होने के कारण ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय टिकरापारा थाना पुलिस हरकत में आई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। वायरल क्लिप के आधार पर मारपीट में शामिल छात्रों की पहचान की जा रही है। पुलिस टीम स्कूल प्रबंधन से भी संपर्क साध रही है ताकि घटना में शामिल नाबालिग लड़कों के बारे में सटीक जानकारी जुटाई जा सके।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पहचान के बाद संबंधित छात्रों और उनके परिजनों को थाने तलब किया जाएगा। अगर इस घटना में बाहरी असामाजिक तत्व शामिल पाए गए, तो उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिगों से जुड़े मामले में बाल कल्याण समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस खौफनाक घटना ने राजधानी के सरकारी और निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब बच्चे स्कूल परिसर से बाहर निकलते हैं, तो उनकी सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होता। अक्सर छुट्टी के समय भाटागांव, तेलीबांधा और पचपेड़ी नाका जैसे प्रमुख चौराहों पर पुलिस पेट्रोलिंग नदारद रहती है। यही वजह है कि आए दिन असामाजिक तत्व और गुटबाजी करने वाले छात्र बेखौफ होकर इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं।
स्थानीय निवासियों और अभिभावक संघ ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि स्कूल खुलने और बंद होने के वक्त प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पीसीआर वैन या बाइक पेट्रोलिंग टीम की तैनाती अनिवार्य की जाए। साथ ही, स्कूल प्रबंधन को भी सख्त हिदायत दी जानी चाहिए कि वे अपने परिसर के आसपास जमावड़ा लगाने वाले संदिग्ध लड़कों की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को दें।
फिलहाल, पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ने में लगी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को चिन्हित कर लिया जाएगा और कड़ी काउंसलिंग के साथ-साथ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर शहर के माहौल और युवा पीढ़ी में तेजी से बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चिंता जाहिर कर दी है।


