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पीएम आवास पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने, 80 मिनट में भिड़े 18 और 46 लाख के आंकड़े

छत्तीसगढ़ में पीएम आवास योजना के आंकड़ों पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा की 80 मिनट बहस हुई। दोनों ने आवास स्वीकृति, निर्माण और खर्च पर दावे रखे।





रायपुर, 17 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक बहस मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने की चर्चा में बदल गई। उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत-ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करीब 80 मिनट तक एक ही मंच पर रहे। सवाल था कि राज्य में गरीब परिवारों के लिए कितने मकान स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए और अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में योजना की प्रगति को किस आधार पर मापा जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़े रखे और एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए। चर्चा के दौरान स्वीकृति, निर्माण, लंबित आवास, स्थायी प्रतीक्षा सूची, आवास प्लस और केंद्र-राज्य की जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद सामने आए।

बहस की शुरुआत उस राजनीतिक चुनौती से जुड़ी थी, जिसे विजय शर्मा और भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। प्रेस क्लब में दोनों नेताओं ने अपने पक्ष के आंकड़ों के साथ योजना के क्रियान्वयन पर बात रखी। विजय शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों को स्वीकृति देती है और राज्य सरकार निर्माण तथा क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है। उन्होंने 18 लाख मकानों के आंकड़े को राज्य सरकार के संकल्प और विभिन्न श्रेणियों में शामिल आवासों के संदर्भ में समझाया। उनके अनुसार, इसमें 2016 से 2023 तक लंबित 2.46 लाख मकान, स्थायी प्रतीक्षा सूची के 6.99 लाख लाभार्थी, आवास प्लस श्रेणी के 8.19 लाख परिवार और मुख्यमंत्री आवास योजना के 47,090 मकान शामिल हैं। इस गणना को उन्होंने केवल एक वित्तीय वर्ष की स्वीकृति के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई।

विजय शर्मा ने साय सरकार के कार्यकाल में आवास निर्माण का आंकड़ा भी रखा। उन्होंने दावा किया कि सरकार के करीब ढाई वर्ष के कार्यकाल में 11 लाख 75 हजार मकानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। बहस के दौरान उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ में देश में सबसे ज्यादा पीएम आवास बनाए गए। उन्होंने आवास निर्माण पर लगभग 16 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही और हाल में 3.65 लाख नए मकानों की स्वीकृति मिलने का उल्लेख किया। शर्मा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आवास निर्माण की गति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के लिए स्वीकृत मकानों में बड़ी संख्या समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि 2021-22 में केंद्र से मिले 7.81 लाख मकानों के लक्ष्य को राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।

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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन आंकड़ों को अलग आधार पर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि पीएम आवास योजना के लिए आवास की जरूरत 2011 की जनगणना के आधार पर तय हुई थी और आवास प्लस श्रेणी को भी गणना में शामिल किया जाना चाहिए। बघेल ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब 6.97 लाख मकानों की स्वीकृति का दावा किया। उनके अनुसार, 2018 में 3,48,960 मकान स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 1,39,000 पूरे किए गए। उन्होंने 2020-21 में 1,97,811 मकानों के लक्ष्य और करीब 1,22,000 मकानों के निर्माण का आंकड़ा भी रखा। बघेल ने कहा कि कोरोना काल में धनराशि जारी होने में बाधा आई और योजना के पोर्टल को लेकर भी समस्या रही। उन्होंने राज्यांश की व्यवस्था के लिए ऋण लेने और केंद्र से राशि जारी करने का अनुरोध करने की बात कही।

भूपेश बघेल ने सरकार के 18 लाख मकानों के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में साय सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख मकानों की बात सामने आई थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से राज्य में 10 लाख और मकानों की घोषणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूछा कि इन आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या कितनी बनती है और उसमें स्वीकृति तथा निर्माण का वास्तविक विभाजन क्या है। बघेल ने यह भी कहा कि अलग-अलग सरकारी पत्रों, विज्ञापनों और संसद में दिए गए जवाबों में आंकड़ों का अंतर दिखाई देता है। उनके तर्क का केंद्र यह था कि पुराने स्वीकृत मकानों और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत मकानों को एक ही संख्या में जोड़कर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

विजय शर्मा ने इस आपत्ति के जवाब में कहा कि 18 लाख का आंकड़ा अलग-अलग श्रेणियों और लंबित आवासों को मिलाकर राज्य सरकार के सामने रखे गए संकल्प से जुड़ा है। उन्होंने 7.81 लाख मकानों की स्थायी प्रतीक्षा सूची का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें से बड़ी संख्या के मकान अब भी लंबित थे। शर्मा ने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाया कि उसने गरीबों के आवास के मामले में पर्याप्त काम नहीं किया। बहस के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि 2016 से 2023 के बीच स्वीकृत मकानों में बड़ी संख्या अधूरी रही। उन्होंने पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव के वर्ष 2022 के इस्तीफे का संदर्भ देते हुए राज्यांश और केंद्र से धनराशि जारी होने के विवाद को भी चर्चा में रखा।

बघेल ने पोर्टल बंद होने और धनराशि के मुद्दे पर अपना पक्ष दोहराया। उनका कहना था कि कोरोना काल और उसके बाद योजना के संचालन में आई अड़चनों का असर मकानों की स्वीकृति तथा निर्माण पर पड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने केंद्र से राशि जारी करने का अनुरोध किया था और राज्य की ओर से भी संसाधन जुटाने का प्रयास किया गया। बघेल ने यह तर्क रखा कि किसी वित्तीय वर्ष में स्वीकृत लक्ष्य और पूरे हुए मकानों की संख्या को अलग-अलग देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुराने स्वीकृत मकानों को वर्तमान सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

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बहस में 2016-17 के आवास निर्माण का संदर्भ भी आया। भूपेश बघेल ने कहा कि रमन सिंह सरकार के समय 2.32 लाख मकान स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 2.29 लाख पूरे किए गए। विजय शर्मा ने दूसरी ओर यह दावा रखा कि साय सरकार के कार्यकाल में 11.75 लाख मकान पूरे हुए हैं और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच वर्ष में करीब तीन लाख मकान पूरे किए गए। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों के आंकड़ों की तुलना करते समय यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन-सा आंकड़ा स्वीकृति का है, कौन-सा निर्माण का और कौन-सा लंबित आवासों का।

चर्चा के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखे सवाल-जवाब भी हुए। विजय शर्मा ने भूपेश बघेल से कहा कि आंकड़ों को सही संदर्भ में रखा जाना चाहिए। बघेल ने जवाब में सरकार के दावों की जांच और स्पष्ट विवरण की मांग की। बहस में दोनों पक्षों ने अपने-अपने कार्यकाल के दौरान योजना की स्थिति को आधार बनाकर तर्क दिए। इस दौरान आवास निर्माण की गति, केंद्र से स्वीकृति, राज्यांश, पोर्टल की स्थिति और लंबित मकानों की संख्या जैसे मुद्दे बार-बार सामने आए।

प्रेस क्लब की चर्चा के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय शर्मा को 10 में से 10 अंक और भूपेश बघेल को शून्य अंक दिए। यह मुख्यमंत्री की राजनीतिक टिप्पणी थी, न कि किसी स्वतंत्र मूल्यांकन संस्था का आकलन। कांग्रेस और भाजपा के बीच सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ पोस्टर और टिप्पणियां जारी हुईं। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर विजय शर्मा की बहस शैली पर तंज कसा, जबकि भाजपा ने बघेल के आवास संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की।

पीएम आवास योजना के आंकड़ों को लेकर यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। योजना के तहत किसी मकान का स्वीकृत होना, उसकी पहली किस्त जारी होना, निर्माण शुरू होना और मकान का पूरा हो जाना अलग-अलग चरण हैं। इसी तरह स्थायी प्रतीक्षा सूची, आवास प्लस और मुख्यमंत्री आवास योजना के आंकड़े भी अलग श्रेणियों से जुड़े हैं। इसलिए 18 लाख, 28 लाख, 36 लाख या 46 लाख जैसे आंकड़ों को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि उनमें कौन-कौन से मकान शामिल हैं और किस अवधि की गणना की गई है। दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़े रखे, लेकिन बहस के दौरान सभी श्रेणियों का एक समान और संयुक्त विवरण सामने नहीं आया।

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विजय शर्मा ने कहा कि साय सरकार ने गरीब परिवारों के आवास निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि खर्च की है। उन्होंने 3.65 लाख नए मकानों की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए आगे निर्माण की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही। भूपेश बघेल ने दूसरी ओर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के आंकड़ों में अंतर को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आवास की जरूरत, स्वीकृति और निर्माण की स्थिति को अलग-अलग प्रस्तुत करने की मांग की। दोनों नेताओं की बहस में यह बात सामने आई कि योजना के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दावे अलग-अलग आधारों पर टिके हैं।

छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना का मुद्दा लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद का हिस्सा रहा है। कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत मकानों और निर्माण की स्थिति पर भाजपा सवाल उठाती रही है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि केंद्र से राशि और स्वीकृति में आई बाधाओं के कारण योजना प्रभावित हुई। मंगलवार की बहस में भी यही मतभेद सामने आए। विजय शर्मा ने साय सरकार के कार्यकाल में पूरे हुए मकानों और खर्च का आंकड़ा रखा, जबकि भूपेश बघेल ने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान स्वीकृत मकानों और केंद्र से जुड़ी अड़चनों का उल्लेख किया।

अब इस बहस के बाद योजना के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दावे और अधिक सार्वजनिक चर्चा में हैं। वास्तविक स्थिति समझने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में स्वीकृत, लंबित, निर्माणाधीन और पूर्ण मकानों का अलग-अलग विवरण देखना होगा। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में आंकड़े रखे हैं, लेकिन उनके बीच अंतर का कारण अलग-अलग श्रेणियों और समयावधियों की गणना बताया गया है। पीएम आवास योजना के तहत लाभार्थियों को मकान मिलने की प्रक्रिया में स्वीकृति से लेकर निर्माण पूरा होने तक कई चरण होते हैं। इसलिए राजनीतिक बहस के साथ-साथ इन आंकड़ों का स्पष्ट और श्रेणीवार विवरण ही योजना की वास्तविक प्रगति को समझने का आधार बनेगा।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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