23 सितंबर 2026 पंचांग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त: जानें आज का चौघड़िया, अभिजीत समय और धार्मिक नियम
आज 23 सितंबर 2026, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। सनातन परंपरा में किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले सही मुहूर्त और पंचांग के घटकों का विचार करना अनिवार्य माना गया है। आज के दिन श्रवण नक्षत्र और धृति योग का सुंदर संयोग बन रहा है, जो कई कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी है। इस दैनिक पंचांग रिपोर्ट में जानिए आज रायपुर शहर के लिए राहुकाल का सटीक समय, अभिजीत मुहूर्त, शुभ-अशुभ चौघड़िया और वैदिक पंचांग की पूर्ण गणना।

पंचांग का अर्थ है पांच अंग, जिनमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण शामिल हैं। ये पांचों अंग मिलकर समय की शुद्धता का निर्धारण करते हैं। मुहूर्त ज्ञान के माध्यम से हम दिन के उस विशेष कालखंड को चुनते हैं, जब शुभ ग्रहों का प्रभाव नकारात्मक शक्तियों से अधिक प्रबल होता है। दैनिक जीवन में यात्रा, निवेश, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ या धार्मिक अनुष्ठान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पंचांग और मुहूर्त का सूक्ष्म अध्ययन अति आवश्यक माना गया है।
राहुकाल क्या होता है और यह क्यों बनता है
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल को दिन के सबसे अशुभ कालखंडों में गिना जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब मोहिनी रूप में भगवान विष्णु देवों को अमृत पान करा रहे थे, तब स्वरभानु नामक दैत्य ने छल से अमृत की कुछ बूंदें ग्रहण कर ली थीं। सूर्य और चंद्रमा ने इस छल को पहचानकर भगवान विष्णु को सूचित किया, जिसके बाद श्री हरि ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाया।
इसी पौराणिक घटना के कारण राहु को सूर्य और चंद्रमा का प्रबल शत्रु माना जाता है। खगोलीय दृष्टिकोण से राहु और केतु कोई भौतिक पिंड नहीं हैं, बल्कि ये सूर्य और चंद्रमा के परिक्रमा पथ के कटान बिंदु यानी छाया ग्रह हैं। दिन की 24 घंटे की अवधि में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के आठवें भाग पर राहु का विशेष प्रभाव माना जाता है। इसी कालखंड को राहुकाल कहा जाता है। इस समय राहु की नकारात्मक ऊर्जा वायुमंडल में अधिक प्रभावी होती है, जिससे मानसिक भ्रम और गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है।
23 सितंबर 2026 रायपुर में राहुकाल का समय
रायपुर शहर के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार आज का राहुकाल दोपहर के समय रहेगा। राहुकाल की अवधि लगभग डेढ़ घंटे की होती है, जिसमें किसी भी नए शुभ कार्य का शुभारंभ वर्जित माना जाता है।
| घटना | समय (रायपुर) |
|---|---|
| राहुकाल प्रारंभ | दोपहर 12:12 बजे |
| राहुकाल समाप्त | दोपहर 01:42 बजे |
| कुल अवधि | 1 घंटा 30 मिनट |
राहुकाल में क्या-क्या कार्य भूलकर भी न करें
राहुकाल की अवधि में कुछ विशिष्ट कार्यों को टालने का निर्देश शास्त्रों में दिया गया है ताकि किसी भी अनिष्ट या विफलता से बचा जा सके:
- किसी भी नए व्यापार, प्रतिष्ठान या दुकान का उद्घाटन या शुरुआत न करें।
- भूमि पूजन, गृह प्रवेश, नीव पूजन या निर्माण कार्य प्रारंभ न करें।
- वाहन, मकान, भूमि, आभूषण या नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद-बिक्री से बचें।
- विवाह, सगाई, नामकरण या अन्य कोई भी मांगलिक संस्कार आयोजित न करें।
- लंबी दूरी की यात्रा, विशेषकर पूर्व या उत्तर दिशा की यात्रा शुरू न करें।
- महत्वपूर्ण व्यावसायिक अनुबंधों, समझौतों या अदालती दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें।
- शेयर बाजार में बड़ा आर्थिक निवेश करने या किसी को बड़ा कर्ज देने से बचें।
राहुकाल में क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं
राहुकाल यद्यपि नए भौतिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, परंतु यह समय आंतरिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अत्यंत उपयुक्त होता है:
- भगवान शिव, माता दुर्गा या अपने इष्टदेव की उपासना और पूजा-अर्चना करना।
- राहु ग्रह के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए राहु मंत्र ॐ रां राहवे नमः का मानसिक जाप।
- राहुकाल के दौरान संकटमोचन हनुमान चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना।
- भैरव बाबा की पूजा करना और काले कुत्ते को रोटी या दूध देना।
- जरूरतमंदों और निर्धनों को तिल, उड़द, काले कपड़े या भोजन का दान देना।
- अपने पूर्व से चल रहे नियमित दैनिक कार्यों को जारी रखना (इनमें कोई रुकावट नहीं आती)।
- ध्यान, योग और आत्म-विश्लेषण जैसे आध्यात्मिक अभ्यास करना।
क्या राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ पड़ सकते हैं?
ज्योतिष शास्त्र में यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है कि क्या राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय एक साथ आ सकता है। अभिजीत मुहूर्त दिन का अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है, जो दोपहर के मध्य में सूर्य के चरमोत्कर्ष पर रहने के दौरान बनता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को भगवान विष्णु का चक्र संरक्षण प्राप्त होता है और यह सैकड़ों दोषों को नष्ट करने में सक्षम है।
कुछ वारों में, विशेषकर बुधवार के दिन, स्थानीय सूर्योदय के अनुसार राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय आसपास या एक-दूसरे को स्पर्श करता हुआ प्रतीत होता है। शास्त्रीय नियम के अनुसार यदि अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय आपस में टकराता है, तो राहुकाल के प्रभाव को अधिक सतर्कता से देखा जाता है। बुधवार को अभिजीत मुहूर्त को निष्फल या कमजोर माना जाता है, इसलिए विद्वान यह सलाह देते हैं कि यदि राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त में समय का टकराव हो, तो राहुकाल के समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए अथवा चौघड़िया का शुभ समय देखकर ही कार्य करना चाहिए।
23 सितंबर 2026 का विस्तृत पंचांग विवरण
आज 23 सितंबर 2026 का विस्तृत पंचांग विवरण रायपुर शहर के अक्षांश और देशांतर की गणना के अनुसार नीचे तालिका में दिया गया है:
| पंचांग घटक | विवरण |
|---|---|
| वार | बुधवार |
| तिथि | शुक्ल पक्ष द्वादशी (रात 09:15 बजे तक, तत्पश्चात त्रयोदशी) |
| नक्षत्र | श्रवण नक्षत्र (शाम 05:40 बजे तक, तत्पश्चात धनिष्ठा) |
| योग | धृति योग (शाम 04:22 बजे तक, तत्पश्चात शूल योग) |
| करण | बव करण (सुबह 09:50 बजे तक), बालव करण (रात 09:15 बजे तक) |
| सूर्य राशि | कन्या |
| चंद्र राशि | मकर |
| सूर्योदय | सुबह 05:57 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 06:12 बजे |
| चंद्रोदय | दोपहर 03:25 बजे |
| चंद्रास्त | तड़के 03:40 बजे (24 सितंबर) |
| विक्रम संवत | 2083 (कीलका) |
| शक संवत | 1948 (क्रोधन) |
| अयन | दक्षिणायन |
| ऋतु | शरद ऋतु |
23 सितंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
आज के दिन विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोगी शुभ मुहूर्तों और चौघड़िया की समय सारणी तालिका में प्रस्तुत है:
| शुभ मुहूर्त | समय सीमा |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:32 से सुबह 05:14 बजे तक |
| प्रातः संध्या | सुबह 04:53 से सुबह 05:57 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | दोपहर 11:41 से दोपहर 12:29 बजे तक (बुधवार विशेष) |
| अमृत काल | सुबह 07:15 से सुबह 08:50 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:05 से दोपहर 02:53 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06:12 से शाम 06:36 बजे तक |
| सायं संध्या | शाम 06:12 से रात 07:23 बजे तक |
| लाभ चौघड़िया (प्रातः) | सुबह 05:57 से सुबह 07:28 बजे तक |
| अमृत चौघड़िया (प्रातः) | सुबह 07:28 से सुबह 08:59 बजे तक |
| शुभ चौघड़िया (दोपहर) | सुबह 10:30 से दोपहर 12:01 बजे तक |
| चर चौघड़िया (सायं) | शाम 03:03 से शाम 04:34 बजे तक |
| लाभ चौघड़िया (सायं) | शाम 04:34 से शाम 06:05 बजे तक |
23 सितंबर 2026 के अशुभ मुहूर्त
आज के अशुभ मुहूर्तों का विवरण नीचे दिया गया है, जिनमें नए कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:
| अशुभ मुहूर्त | समय सीमा |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 12:12 से दोपहर 01:42 बजे तक |
| यमगण्ड | सुबह 07:28 से सुबह 08:59 बजे तक |
| गुलिक काल | सुबह 10:30 से दोपहर 12:01 बजे तक |
| दुर्मुहूर्त | दोपहर 11:41 से दोपहर 12:29 बजे तक |
| भद्रा | आज भद्रा का साया नहीं है |
| वर्ज्यम | रात 08:10 से रात 09:42 बजे तक |
आज का धार्मिक और पौराणिक महत्व
23 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पावन और फलदायी है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि भगवान विष्णु के वामन अवतार और श्री हरि की उपासना के लिए समर्पित मानी जाती है। आज श्रवण नक्षत्र का संयोग होने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायी होता है, क्योंकि श्रवण नक्षत्र के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं।
आज बुधवार का दिन होने के कारण प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना का भी विशेष योग है। आज के दिन मंदिर में जाकर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और शमी पत्र अर्पित करने से बुद्धि में वृद्धि होती है और व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो या वाणी संबंधी समस्या हो, तो आज के दिन हरी मूंग की दाल या हरे वस्त्र का दान करना चाहिए। आज सायंकाल तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
Disclaimer: यह समाचार पंचांगीय गणनाओं, पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं और खगोलीय समय सारणी पर आधारित है। www.the4thpillar.live किसी भी दावे या इसके शत-प्रतिशत सटीक होने की पूर्ण पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, शुभ कार्य या मुहूर्त चयन के लिए अपनी कुंडली और स्थानीय परंपराओं के अनुसार योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।


