छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: अग्निवीरों को राज्य की सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण, खाद-बीज वितरण पर कसेगा शिकंजा
छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक में साय सरकार ने लिए बड़े फैसले। अग्निवीरों को राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों में 10% आरक्षण की मंजूरी। खाद-बीज की कालाबाजारी रोकने निगरानी समिति का गठन। जानिए कैबिनेट के सभी बड़े फैसलों की पूरी रिपोर्ट।

राज्य सरकार ने अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य पुलिस, वन रक्षक और बस्तर फाइटर्स जैसी भर्तियों में 10 प्रतिशत का सीधा आरक्षण देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही खरीफ सीजन में किसानों को खाद और बीज की किल्लत न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय निगरानी समितियों के गठन का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट की बैठक खत्म होने के बाद उपमुख्यमंत्री और शासन के वरिष्ठ मंत्रियों ने फैसलों की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा की। सरकार का दावा है कि ये फैसले राज्य के दूरस्थ अंचलों के विकास और युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होंगे।
अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला: पुलिस और वन विभाग में 10 फीसदी कोटा तय
केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले छत्तीसगढ़ के अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस बल, बस्तर फाइटर्स, सशस्त्र बल और वन रक्षकों की भर्ती में अग्निवीरों को 10 प्रतिशत का विशेष आरक्षण दिया जाएगा।
केवल आरक्षण ही नहीं, बल्कि इन भर्तियों में अग्निवीरों को निर्धारित आयु सीमा में छूट और शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test) में भी विशेष छूट का लाभ मिलेगा। सरकार के इस कदम से राज्य के हजारों उन युवाओं को बड़ा संबल मिलेगा जो देश सेवा के बाद वापस अपने राज्य में सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले युवाओं के लिए बस्तर फाइटर्स और राज्य पुलिस में यह आरक्षण एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे सुरक्षा बलों को पहले से प्रशिक्षित और अनुशासित जनबल आसानी से मिल सकेगा।
किसानों को बड़ी राहत: खाद-बीज की कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी समितियां
मानसून के आगमन के साथ ही राज्य भर में कृषि गतिविधियां जोर पकड़ चुकी हैं। ऐसे समय में अक्सर सोसायटियों और निजी दुकानों में खाद-बीज की किल्लत या कालाबाजारी की शिकायतें आती हैं। इसे सख्ती से रोकने के लिए कैबिनेट ने एक मजबूत त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र विकसित करने का फैसला किया है।
अब राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष निगरानी समितियां काम करेंगी। इन समितियों का मुख्य काम सोसायटियों में जैविक व रासायनिक खाद के स्टॉक, गुणवत्ता और वितरण की नियमित जांच करना होगा।
अगर कहीं भी डीएपी या यूरिया की जमाखोरी या कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिश की गई, तो संबंधित अधिकारियों और विक्रेताओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं।
अधोसंरचना और विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
कैबिनेट बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरियां दी गईं। लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से राज्य के ग्रामीण और सुदूर इलाकों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कों व पुल-पुलियों के निर्माण प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई।
विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ विकासखंडों में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के लिए नए पदों के सृजन और बजट आवंटन को मंजूरी दी गई। सरकार का जोर इस बात पर है कि बस्तर के अंदरूनी इलाकों में जारी सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास की रफ्तार को भी दोगुना किया जाए।
प्रशासनिक कसावट और जनहित के अन्य फैसले
कैबिनेट में राज्य के प्रशासनिक ढांचे को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी मंथन हुआ। जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए जिला स्तर पर जनदर्शन और समाधान शिविरों के आयोजन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, विभिन्न सरकारी विभागों में लंबित पदोन्नति के मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने और रिक्त पदों को भरने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है। राज्य सरकार के इन फैसलों से न केवल कर्मचारियों बल्कि आम जनता में भी प्रशासनिक सक्रियता का सकारात्मक संदेश गया है।
विपक्ष का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रिया
कैबिनेट के फैसलों पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों का धरातल पर क्रियान्वयन होना बेहद जरूरी है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि घोषणाएं कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किसानों को वास्तव में बिना कतार में लगे खाद मिलनी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इन फैसलों का स्वागत करते हुए इसे ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करने की दिशा में एक और मजबूत कदम बताया है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार समाज के हर वर्ग युवा, किसान और वनांचल के निवासियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है।



