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रायपुर पुलिस का सख्त कदम: 61 नाबालिगों को गाड़ियां दौड़ाते पकड़ा, पेरेंट्स की बुलाई क्लास, लग सकता है 25,000 का जुर्माना

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत परिजनों को दी गई कानूनी चेतावनी, दोहराने पर होगी कठोर कार्रवाई।







रायपुर । राजधानी रायपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस कमिश्नरेट रायपुर ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत शहर के विभिन्न प्रमुख स्कूलों के बाहर मोटरसाइकिल और अन्य दोपहिया वाहन दौड़ा रहे करीब 61 नाबालिग चालकों को रोका गया

​घटना के तुरंत बाद पुलिस ने सभी नाबालिगों के अभिभावकों को शाम 5:00 बजे यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी में तलब किया, जहाँ उनकी विस्तृत काउंसलिंग की गई।

​काउंसलिंग सत्र के दौरान डीसीपी (यातायात) डॉ. अर्चना झा ने अत्यंत संवेदनशीलता और कड़ाई के समन्वय के साथ अभिभावकों को संबोधित किया। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित वास्तविक वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिखाया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही बच्चों की जान के लिए घातक साबित हो सकती है।

डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य किसी भी बच्चे या अभिभावक को परेशान करना या चालान काटना नहीं है। हमारा एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा सुरक्षित स्कूल पहुंचे और सुरक्षित घर लौटे। सड़क सुरक्षा की पहली शुरुआत घर से और परिवार की जिम्मेदारी से होती है।

काउंसलिंग में परिजनों को मोटर वाहन अधिनियम की सख्त धाराओं की जानकारी दी गई। यातायात अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नाबालिग को वाहन चलाने देने पर अभिभावक या वाहन मालिक पर 25,000 तक का जुर्माना और 3 वर्ष तक के कारावास का कड़ा कानूनी प्रावधान है। नियम तोड़ने वाले नाबालिग के 18 वर्ष का होने के बाद भी एक निश्चित अवधि तक उसका ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनाया जाएगा।

पुलिस प्रशासन ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पहली बार की इस चूक पर नरम रुख अपनाया। जनहित में कानूनी प्रावधानों के तहत समझाइश देकर और परिजनों से शपथ पत्र/अंडरटेकिंग लेकर बच्चों को सुपुर्द किया गया।

​यातायात पुलिस ने सभी अभिभावकों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी सुविधा के लिए बच्चों की जान जोखिम में न डालें। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस, अधिकृत ऑटो/वैन या स्वयं जाकर छोड़ने की व्यवस्था का उपयोग करें। पुलिस का यह विशेष जाँच अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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