दुर्ग में घिनौना खेल: आइसक्रीम पार्लर की आड़ में चल रहा था देह व्यापार, पुलिस ने जलाराम लॉज में छापा मारकर किया भंडाफोड़
शहर के बीचों-बीच स्थित लॉज में अनैतिक देह व्यापार का सनसनीखेज खुलासा, सिटी कोतवाली और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने रंगे हाथों दबोचा, तीन आरोपी गिरफ्तार कर भेजे गए जेल।

दुर्ग पुलिस की सिटी कोतवाली थाना टीम और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए रविवार को इस ठिकाने पर औचक छापामार कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस ने मौके से तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे इंदिरा मार्केट और आस-पास के व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
आइसक्रीम पार्लर के पीछे छिपा था देह व्यापार का काला साम्राज्य पारिवारिक ग्राहकों की आड़ में चल रहा था अनैतिक धंधा
स्थानीय पुलिस प्रशासन और जांच टीम से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार दुर्ग के इंदिरा मार्केट स्थित जलाराम लॉज के सामने के हिस्से में एक सामान्य आइसक्रीम पार्लर संचालित किया जा रहा था। इस पार्लर में रोजाना बड़ी संख्या में आम लोग, युवा और परिवार के सदस्य आइसक्रीम खाने पहुंचते थे। किसी को भी इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि इस दुकान की ओट में और लॉज के कमरों के भीतर अनैतिक देह व्यापार का एक संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा है।
लॉज का संचालक और उसके सहयोगी इस आइसक्रीम पार्लर का उपयोग एक सुरक्षा कवच के रूप में कर रहे थे ताकि किसी को भी भीतर चल रही अनैतिक गतिविधियों पर शक न हो। बाहर से आने वाले संदिग्ध ग्राहकों को इसी रास्ते से लॉज के कमरों तक पहुंचाया जाता था। इस तरह कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक बेहद शातिर और योजनाबद्ध तरीका अपनाया गया था, जिसका पुलिस ने पूरी तरह से खात्मा कर दिया है।
मुखबिर की सटीक और पुख्ता सूचना पर बुना गया पुलिस का जाल सीनियर पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर संयुक्त टीम का हुआ गठन
अनैतिक व्यापार के इस संगठित गढ़ को ढहाने में पुलिस के मुखबिर तंत्र की बहुत बड़ी और अहम भूमिका रही है। दुर्ग पुलिस को 28 जून की देर शाम एक अत्यंत विश्वसनीय मुखबिर के माध्यम से यह पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ था कि इंदिरा मार्केट के जलाराम लॉज में पिछले काफी समय से बाहरी और स्थानीय महिलाओं को बुलाकर देह व्यापार का रैकेट चलाया जा रहा है। सूचना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तुरंत इसकी जानकारी दी गई।
इसके बाद दुर्ग पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देश पर सिटी कोतवाली थाना दुर्ग के प्रभारी और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) की एक विशेष संयुक्त टीम का तत्काल गठन किया गया। पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पूरी योजना बनाई। पुलिस के जवानों को सादे कपड़ों में लॉज के आस-पास तैनात किया गया ताकि लॉज के भीतर मौजूद किसी भी संदिग्ध को पुलिस की भनक न लग सके और वे भागने में सफल न हो पाएं।
पॉइंटर भेजकर की गई तस्दीक और फिर मारा गया छापा आपत्तिजनक स्थिति में मिले कई लोग, संचालक भी दबोचा गया
पूरी व्यूह रचना तैयार करने के बाद संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जलाराम लॉज में एक फर्जी ग्राहक (पॉइंटर) बनाकर भेजा। जैसे ही लॉज प्रबंधन और वहां मौजूद दलालों ने उस पॉइंटर से पैसे लेकर उसे कमरा आवंटित किया और मुखबिर की सूचना की शत-प्रतिशत पुष्टि हो गई, वैसे ही सादे कपड़ों में बाहर मुस्तैद खड़ी पुलिस टीम ने एक साथ लॉज के भीतर दबिश दे दी।
अचानक हुई इस ताबड़तोड़ छापामार कार्रवाई से लॉज के भीतर भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने जब लॉज के विभिन्न कमरों की तलाशी ली, तो वहां दो पुरुष और तीन महिलाएं बेहद आपत्तिजनक और संदेहास्पद स्थिति में पाई गईं। पुलिस की अचानक मौजूदगी देखकर कमरे में मौजूद लोग सकपका गए और अपनी पहचान छुपाने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कमरों से कई तरह की आपत्तिजनक सामग्रियां भी बरामद की हैं। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर ही लॉज का मुख्य संचालक भी उपस्थित था, जिसे पुलिस ने तत्काल अपनी हिरासत में ले लिया।
आरोपियों के खिलाफ पीटा एक्ट के तहत दर्ज हुआ संगीन मामला गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश कर भेजा गया रिमांड पर
जलाराम लॉज से हिरासत में लिए गए सभी संदिग्धों को पुलिस की टीम कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस वाहन से लेकर सिटी कोतवाली थाना पहुंची। वहां महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में संदिग्ध महिलाओं और पुरुषों से गहन पूछताछ की गई। पुलिस जांच और आरोपियों के बयानों के आधार पर यह पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि वहां लंबे समय से पैसों का लालच देकर और अनैतिक तरीके से देह व्यापार का संचालन किया जा रहा था।
इसके बाद दुर्ग पुलिस ने कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए इस घिनौने कृत्य में शामिल तीन मुख्य आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (PITA Act) की विभिन्न कड़ी और गैर-जमानती धाराओं के तहत अपराध पंजीकृत किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट के तार अन्य राज्यों या जिलों से जुड़े हैं या नहीं, इस बिंदु पर भी गिरफ्तार आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपियों को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित लॉज और होटलों की सुरक्षा पर उठे सवाल स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने की सख्त रूटीन चेकिंग की मांग
इंदिरा मार्केट जैसे व्यस्ततम और प्रतिष्ठित व्यापारिक क्षेत्र में इस तरह के अनैतिक कारोबार का भंडाफोड़ होने के बाद स्थानीय दुकानदारों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों में गहरा आक्रोश और चिंता व्याप्त है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर के बीचों-बीच स्थित इस तरह के होटलों और लॉज में बिना किसी पुख्ता पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) के कमरे किराए पर दे दिए जाते हैं, जिसके कारण इस प्रकार की असामाजिक और अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
क्षेत्र के नागरिकों ने दुर्ग जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से यह पुरजोर मांग की है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मुख्य बाजारों के आस-पास संचालित होने वाले सभी छोटे-बड़े लॉज, होटलों और धर्मशालाओं की समय-समय पर औचक जांच (रूटीन चेकिंग) अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही इन प्रतिष्ठानों के संचालक ग्राहकों का पूरा ब्योरा और उनके पहचान पत्र अनिवार्य रूप से रजिस्टर और डिजिटल डेटाबेस में दर्ज करें, ताकि भविष्य में इस तरह के घिनौने कृत्यों पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके और शहर के शांत माहौल को खराब होने से बचाया जा सके।



