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रायपुर पुलिस सफेमा एक्ट कार्रवाई से हिल उठा ड्रग्स सिंडिकेट, गांजा तस्कर हेमराज राव की करोड़ों की संपत्ति जब्त

रायपुर पुलिस सफेमा एक्ट कार्रवाई के तहत कुख्यात गांजा तस्कर हेमराज राव और उसके परिवार की 2.32 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति को पूरी तरह कुर्क व फ्रीज कर दिया है। जानिए उरला अछोली क्षेत्र के इस बड़े एक्शन की पूरी इनसाइड स्टोरी।







रायपुर, 26 जून 2026 : नशे के अवैध कारोबार और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ छत्तीसगढ़ की राजधानी में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा वित्तीय प्रहार किया गया है। रायपुर पुलिस सफेमा एक्ट कार्रवाई को अत्यंत आक्रामक ढंग से आगे बढ़ाते हुए एक और कुख्यात गांजा तस्कर के पूरे साम्राज्य को मटियामेट कर दिया है।

पुलिस प्रशासन द्वारा नशीले पदार्थों के गंदे धंधे से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी सफलता मानी जा रही है। इस ताजा कार्रवाई ने शहर के भीतर और बाहरी इलाकों में सक्रिय ड्रग्स सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है।

प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रायपुर के उरला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अछोली इलाके के बड़े गांजा तस्कर हेमराज राव और उसके पूरे परिवार के खिलाफ कानून का शिकंजा पूरी तरह कस गया है।

पुलिस ने तस्कर द्वारा मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी के माध्यम से खड़ी की गई करोड़ों रुपये की अघोषित और काली संपत्ति को फ्रीज और अटैच करने की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस कार्रवाई की पुष्टि खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने की है और साफ कर दिया है कि नशीले पदार्थों के धंधेबाजों को आर्थिक रूप से पूरी तरह अपाहिज बना दिया जाएगा।

उरला के अछोली में पुलिस का बड़ा छापा और वित्तीय तफ्तीश

इस पूरी बड़ी कार्रवाई की पृष्ठभूमि और इनसाइड स्टोरी को समझने के लिए हमें उरला थाना क्षेत्र के अछोली बिरई तालाब के पास जाना होगा। पुलिस विभाग के विश्वसनीय सूत्रों और नार्थ डीएसपी मयंक गुर्जर द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, पुलिस की एक विशेष एंटी-क्राइम टीम को अछोली बिरई तालाब के पास भारी मात्रा में मादक पदार्थों की अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन किए जाने की पुख्ता और गोपनीय सूचना मिली थी। मुखबिर से मिली इसी सटीक सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से बिरई तालाब के पास घेराबंदी कर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया था।

इस रेड के दौरान पुलिस ने मौके से हेमराज राव (उम्र 50 वर्ष, निवासी अछोली, उरला) को रंगे हाथों धर दबोचा। पुलिस टीम ने जब मौके पर उसकी और उसके पास मौजूद सामान की सघन तलाशी ली, तो उसके कब्जे से कुल 1.390 किलोग्राम अवैध गांजा व्यावसायिक पैकेजिंग के साथ बरामद किया गया। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से नशीले पदार्थ को जप्त करते हुए आरोपी हेमराज राव को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

महज गांजे की जब्ती नहीं बल्कि वित्तीय जड़ों पर था पुलिस का ध्यान

आरोपी हेमराज राव की गिरफ्तारी के बाद मामले की कमान नार्थ डीएसपी मयंक गुर्जर और उरला पुलिस की विशेष टीम ने अपने हाथों में ली। डीएसपी मयंक गुर्जर के अनुसार, पुलिस ने केवल डेढ़ किलो गांजे की जब्ती और आरोपी की गिरफ्तारी तक ही इस मामले को सीमित नहीं रखा। पुलिस को अपनी खुफिया तफ्तीश में लगातार यह इनपुट मिल रहे थे कि हेमराज राव केवल एक छोटा पेडलर या खुदरा विक्रेता नहीं है, बल्कि वह पिछले कई वर्षों से नारकोटिक पदार्थों की तस्करी के एक बहुत बड़े और संगठित नेटवर्क में लगातार संलिप्त रहा है।

पुलिस की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन टीम (वित्तीय जांच इकाई) ने जब हेमराज राव, उसकी पत्नी, बच्चों और अन्य करीबी रिश्तेदारों के नाम पर मौजूद संपत्तियों, जमीन के दस्तावेजों, अचल संपत्तियों और विभिन्न बैंकों में संचालित खातों की एंड-टू-एंड (शुरुआत से अंत तक) गहन तफ्तीश शुरू की, तो जांच अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच में साफ तौर पर सामने आया कि हेमराज राव का कोई भी वैध या कानूनी रूप से प्रमाणित आय का जरिया नहीं था। उसने पिछले कुछ वर्षों में जितने भी आलीशान मकान, कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड और गाड़ियां खरीदी थीं, उन सभी का पैसा सीधे तौर पर गांजे की तस्करी के काले धंधे से कमाया गया था।

सफेमा एक्ट के तहत 2.32 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पूरी तरह सीज

वित्तीय जांच और पुख्ता सबूतों को संकलित करने के बाद रायपुर पुलिस ने बिना किसी देरी के इस पूरे मामले का एक विस्तृत और बेहद मजबूत तकनीकी प्रतिवेदन तैयार किया। इस लगभग सैकड़ों पन्नों के वित्तीय रिपोर्ट को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (फोरफिचर ऑफ प्रॉपर्टी) एक्ट यानी सफेमा (SAFEMA) कोर्ट मुंबई को भेजा गया।

सफेमा कोर्ट ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए अकाट्य बैंक ट्रांजैक्शन और जमीन के रिकॉर्ड्स का गंभीरता से अध्ययन करने के बाद इस जब्ती को अपनी अंतिम और पूर्ण मंजूरी प्रदान कर दी।

रायपुर पुलिस सफेमा एक्ट कार्रवाई के इस विशेष आदेश के लागू होते ही गांजा तस्कर हेमराज राव और उसके परिवार की कुल 2 करोड़ 32 लाख 11 हजार रुपये की चल-अचल संपत्ति को पूरी तरह से अटैच और फ्रीज कर दिया गया है। इस जब्ती की जद में तस्कर हेमराज द्वारा अछोली और रायपुर के अन्य इलाकों में बनाए गए आलीशान मकान, कई एकड़ की कीमती जमीनें, आलीशान वाहन और परिवहन कार्य में प्रयुक्त होने वाली गाड़ियां शामिल हैं।

इसके साथ ही, पुलिस ने अलग-अलग राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में हेमराज और उसके परिजनों के नाम पर संचालित होने वाले उन सभी बैंक खातों को भी आधिकारिक तौर पर फ्रीज करा दिया है, जिनमें नशीले पदार्थों की कमाई के लाखों रुपये जमा थे। अब आरोपी या उसका परिवार इन संपत्तियों को न तो बेच सकता है और न ही बैंकों से एक भी रुपये निकाल सकता है।

गांजा किंगपिन रवि साहू के 7.66 करोड़ के साम्राज्य पर भी लगा था ताला

रायपुर पुलिस प्रशासन द्वारा सफेमा कानून के तहत की जा रही यह कोई पहली या इकलौती कार्रवाई नहीं है। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में नशे के सौदागरों की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए यह अभियान पिछले कुछ महीनों से अत्यंत आक्रामक रूप से चलाया जा रहा है। हेमराज राव से ठीक पहले, रायपुर पुलिस ने शहर के सबसे बड़े और कुख्यात गांजा किंगपिन रवि साहू के खिलाफ भी इसी कानून के तहत इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय स्ट्राइक की थी।

गांधीनगर कालीबाड़ी इलाके के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर और ड्रग्स माफिया रवि साहू के खिलाफ अकेले रायपुर और छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में मारपीट, डकैती और भारी मात्रा में गांजा तस्करी के कुल 55 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे।

विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने रवि साहू को 17 किलो 882 ग्राम गांजा तस्करी के एक पुराने मामले में पहले ही 10 साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाकर जेल भेज दिया था। लेकिन वह जेल के भीतर से भी अपने सिंडिकेट को चलाने की फिराक में था।

रवि साहू के इस नेटवर्क को जमींदोज करने के लिए पुलिस ने उसकी वित्तीय कुंडली खंगाल डाली थी। जांच में पता चला था कि रवि साहू ने अपनी बूढ़ी मां, पत्नी और बेटे के नाम पर रायपुर से लेकर नवा रायपुर को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों पर करोड़ों की कीमती जमीनें, आलीशान बंगले, सजे-धजे कमर्शियल भवन और कई बड़े कमर्शियल वाहन खरीद रखे थे। लोगों को दिखाने के लिए उसने मुख्य सड़क पर एक बड़ा ढाबा भी खोल रखा था, ताकि काली कमाई को सफेद किया जा सके।

पुलिस ने रवि साहू की इन तमाम बेनामी संपत्तियों का करीब 800 पन्नों का एक बेहद मजबूत और विस्तृत डोजियर तैयार करके सफेमा कोर्ट मुंबई भेजा था। सक्षम प्राधिकारी मुंबई ने पुलिस के तर्कों और सबूतों को सही पाते हुए रवि साहू की कुल 7.66 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को पूरी तरह सीज करने के आदेश की पुष्टि कर दी थी। रायपुर पुलिस के इतिहास में एनडीपीएस और सफेमा के तहत की गई वह अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक वित्तीय चोट मानी जाती है।

अगला नंबर मुकेश बनिया का, एक करोड़ की प्रॉपर्टी फ्रीज करने की तैयारी

रायपुर पुलिस के आला अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि हेमराज राव और रवि साहू की करोड़ों की संपत्तियां कुर्क होने के बाद भी यह अभियान रुकने वाला नहीं है। पुलिस की वित्तीय जांच शाखा इस समय शहर के एक और कुख्यात गांजा और अवैध शराब तस्कर मुकेश बनिया के पूरे साम्राज्य का एंड-टू-एंड ऑडिट कर रही है।

मुकेश बनिया भी रायपुर का एक जाना-माना हिस्ट्रीशीटर बदमाश है, जिसे पुलिस ने कुछ समय पहले भारी मात्रा में अवैध नशीली दवाइयां, सिरप और गांजा बेचते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

मुकेश बनिया के खिलाफ भी शहर के अलग-अलग थानों में नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध शराब की बिक्री और गैंगवार से जुड़े 30 से अधिक गंभीर संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस की जांच टीम ने अब तक मुकेश बनिया और उसके दूर के रिश्तेदारों के नाम पर निवेश की गई लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बेनामी संपत्तियों और गुप्त बैंक खातों की पहचान पूरी तरह से कर ली है।

नार्थ डीएसपी मयंक गुर्जर के मार्गदर्शन में उरला और क्राइम ब्रांच की टीम मुकेश बनिया की इस लगभग एक करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को भी सफेमा एक्ट के तहत बहुत जल्द फ्रीज और अटैच करने के लिए अंतिम आवेदन मुंबई कोर्ट भेजने जा रही है।

आखिर क्या है सफेमा एक्ट और यह कैसे नशा तस्करों के लिए बनता है काल

नशीले पदार्थों के खिलाफ पुलिस की इस रणनीति को समझने के लिए सफेमा (SAFEMA) कानून की ताकत को समझना बेहद जरूरी है। इसका पूरा नाम स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (फोरफिचर ऑफ प्रॉपर्टी) एक्ट है। इसके साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 68 के तहत पुलिस को यह विशेष वैधानिक अधिकार प्राप्त है कि यदि कोई व्यक्ति मादक पदार्थों की अवैध तस्करी में बार-बार संलिप्त पाया जाता है या उसके पास से व्यावसायिक मात्रा में ड्रग्स बरामद होती है, तो पुलिस उसकी अवैध कमाई से अर्जित संपत्ति को राजसात (जब्त) करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ‘बर्डन ऑफ प्रूफ’ यानी बेगुनाही साबित करने की पूरी जिम्मेदारी खुद आरोपी और उसके परिवार पर होती है। अगर सरकार या पुलिस को वित्तीय जांच में यह ठोस संदेह हो जाता है कि किसी व्यक्ति ने पिछले छह वर्षों के भीतर बिना किसी वैध आय स्रोत के करोड़ों की चल-अचल संपत्ति खड़ी कर ली है, तो सफेमा कोर्ट उस संपत्ति को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर देता है।

इसके बाद आरोपी को खुद कोर्ट के सामने यह प्रमाणित करना पड़ता है कि उसने वह जमीन या मकान पूरी तरह से ईमानदारी और वैध कमाई के पैसे से खरीदा था। यदि आरोपी वैध स्रोत बताने में पूरी तरह विफल रहता है, तो वह पूरी संपत्ति हमेशा के लिए सरकारी खजाने में अटैच हो जाती है।

रायपुर पुलिस के अधिकारियों का मानना है कि तस्करों को केवल जेल भेजने से नशाखोरी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। जेल जाने के बाद भी इन अपराधियों के गुर्गे बाहर मौजूद करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के दम पर नशीले पदार्थों के सिंडिकेट को लगातार जीवित रखते हैं और कोर्ट में बड़े वकीलों को मोटी फीस देकर जमानत पा लेते हैं। लेकिन जब रायपुर पुलिस सफेमा एक्ट कार्रवाई के जरिए उनकी पूरी अवैध कमाई, मकान, गाड़ियां और बैंक खाते ही सील कर देती है, तो उनका पूरा आर्थिक तंत्र ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है।

नशीले पदार्थों के खिलाफ रायपुर पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति

रायपुर पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री और गृह विभाग के कड़े निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के लिए एक व्यापक ‘क्रैकडाउन’ (बड़ी धरपकड़) शुरू किया गया है।

पिछले एक से दो वर्षों के भीतर रायपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों के तहत कुल 445 से अधिक छोटे-बड़े नशा तस्करों और अंतरराज्यीय पेडलर्स को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा है। इस दौरान पुलिस ने ओडिशा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से तस्करी कर लाए जा रहे लगभग 5.08 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के गांजे, नशीली टैबलेट, कफ सिरप और सिंथेटिक ड्रग्स को भी सीधे तौर पर जब्त कर नष्ट किया है।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास या मोहल्ले में कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से गांजा, सिरप, नशीली दवाइयां या शराब बेचने का धंधा करता है, या अचानक बिना किसी काम-धंधे के उसकी संपत्ति और रहन-सहन में करोड़ों का संदिग्ध बदलाव आता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस के विशेष हेल्पलाइन नंबर पर दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा और त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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