महतारी वंदन के पैसे बिजली बिल से वसूल रही बीजेपी सरकार,विकास उपाध्याय ने स्मार्ट मीटर के खिलाफ छेड़ा बड़ा अभियान
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भाजपा सरकार पर महतारी वंदन के नाम पर बिजली बिल से वसूली करने का आरोप लगाया है।

रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर तमाम जिलों तक बिजली उपभोक्ताओं का गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिखने लगा है। घरों में लगाए जा रहे नए स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका डालने वाला कदम करार दिया है। प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस पार्टी का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी सिलसिले में कांग्रेस नेताओं और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर एक नया और तीखा तंज कसा है। इस व्यवस्था को अब जनता के बीच ‘महतारी वंदन वसूली योजना’ का नाम दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में पार्टी लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। कांग्रेस का साफ कहना है कि एक तरफ सरकार महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत एक हजार रुपये थमाने का दावा करती है, तो दूसरी तरफ बिजली बिल के जरिए उसकी कई गुना वसूली की जा रही है। आम आदमी पार्टी के दावों और सरकारी विज्ञापनों से इतर जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। गरीबों और मध्यम वर्ग के घरों में आने वाले बिजली बिल ने उनके महीने का पूरा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए स्थानीय स्तर पर ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं।
किचन के खर्च से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तक का हिसाब किताब इस नई महंगाई ने गड़बड़ा दिया है। जिन परिवारों की महीने की कुल आय दस से पंद्रह हजार रुपये के बीच है, उनके घर का बजट इन दिनों पूरी तरह धराशायी हो चुका है। पहले जो बिजली बिल सामान्य रूप से एक हजार या बारह सौ रुपये आता था, वह अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद पांच से सात गुना तक बढ़कर पहुंच रहा है। परिवार के मुखिया को समझ नहीं आ रहा है कि वे घर का राशन खरीदें या फिर बढ़ा हुआ बिजली बिल चुकाएं। इस आर्थिक तंगी के चलते लोगों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह चुप बैठने वाली नहीं है। आम जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह से लुटने नहीं दिया जाएगा। पार्टी की ओर से गांवों और शहरी वार्डों में जाकर लोगों से सीधे संपर्क किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का काम किया जा रहा है ताकि वे इस शोषण के खिलाफ खुलकर आवाज उठा सकें।
विकास उपाध्याय ने इस पूरे मामले पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर इंसान का एक सीमित मासिक बजट होता है। मेहनत-मजदूरी या छोटी-मोटी नौकरी करके दस-पंद्रह हजार कमाने वाला व्यक्ति इसी पैसे से अपने परिवार का पेट पालता है। मकान का किराया देता है, बच्चों की कॉपियां और किताबें खरीदता है और घर की जरूरी चीजें जुटाता है। ऐसी नाज़ुक आर्थिक स्थिति में जब बिजली का बिल अचानक पांच से सात गुना बढ़ जाता है, तो पूरा परिवार सदमे में आ जाता है।
बढ़ते बिलों का भुगतान करने के लिए लोगों को बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज उठाना पड़ रहा है। कर्ज के इस कुचक्र में फंसकर आम आदमी की जिंदगी नर्क बन गई है। एक तरफ सरकार लोकलुभावन योजनाओं का ढिंढोरा पीटती है, तो दूसरी तरफ बिजली के दाम बढ़ाकर उन योजनाओं से मिलने वाले लाभ को कई गुना वापस खींच लेती है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि महतारी वंदन योजना के नाम पर महिलाओं को जो मामूली राहत दी जा रही है, उससे कहीं अधिक राशि बिजली बिल के स्मार्ट मीटर के जरिए सरकार की झोली में वापस जा रही है।
इसी वजह से कांग्रेस ने इस मीटर का नाम बदलकर ‘महतारी वंदन वसूली मीटर’ रख दिया है। जनता की सहमति से घरों में लगे इन स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर बाहर निकालने के लिए कांग्रेस ने एक अनूठा कदम उठाया है। पार्टी की ओर से बकायदा फॉर्म छपवाए जा रहे हैं और लोगों से हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। इन फॉर्मों के जरिए उपभोक्ता अपनी सहमति दे रहे हैं कि वे अपने घरों से इन स्मार्ट मीटरों को हटवाना चाहते हैं। यह मुहिम अब एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिसमें हर वर्ग के लोग अपनी मर्जी से जुड़ रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है। स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को सीधे चुनिंदा पूंजीपतियों की झोली में डाला जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में भारी कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। आम जनता महंगाई की दोहरी मार झेलने को विवश है, जबकि सत्ता में बैठे लोग अपनी तिजोरी भरने में व्यस्त हैं। जब तक इन मीटरों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है।
छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जो लंबे समय से देश भर में सरप्लस बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहाँ बिजली का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है और दूसरे राज्यों को भी बिजली आपूर्ति की जाती है। विडंबना यह है कि जिस राज्य में खुद बिजली का उत्पादन सरप्लस होता है, वहीं के नागरिकों को सबसे महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। जनता के साथ हो रहे इस सरासर अन्याय पर सरकार पूरी तरह से मौन साधे हुए है। पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि ‘बिजली बिल हाफ योजना’ के जरिए जनता को भारी राहत मिली थी।
पाँच वर्षों के उस कार्यकाल के दौरान प्रदेश के लाखों परिवारों ने बिजली बिल में राहत पाकर अपने गाढ़े पसीने की कमाई बचाई थी। उस बचत के पैसों का इस्तेमाल लोग अपने बच्चों के भविष्य और घर की अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में करते थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही उन जनहितकारी योजनाओं पर कैंची चला दी। चार सौ यूनिट तक मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया गया और अब उपभोक्ताओं पर महंगाई का अनगिनत बोझ लाद दिया गया है। जनता अब समझ चुकी है कि किस तरह से उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।
विकास उपाध्याय ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि बिजली बिल से वसूले जा रहे इस अतिरिक्त और अवैध पैसे का इस्तेमाल जनता के विकास में नहीं हो रहा है। इन पैसों का उपयोग देश के अन्य राज्यों में विधायक और सांसद खरीदने में किया जा रहा है। विपक्षी दलों को तोड़ने और राजनीतिक जोड़-तोड़ की गंदी राजनीति में जनता के खून-पसीने की कमाई को बहाया जा रहा है। इसके अलावा सत्ताधारी पार्टी अपने भव्य और आलीशान कार्यालय बनवाने तथा उनके साज-सज्जा पर पानी की तरह पैसा बहा रही है। एक तरफ देश भर में महंगाई आसमान छू रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली के दाम बढ़ाकर सरकार ने गरीबों की कमर तोड़ दी है।
इस विरोध प्रदर्शन और जन-जागरण अभियान के दौरान रायपुर में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रमोद चौबे, प्रकाश जगत, अशोक ठाकुर, मनोज पटनायक, दिनेश मिश्रा, रवि विभार, दिलीप नाग, रिजवान मोहम्मद, आजाद वर्मा, विद्या बाग, मीत गोपाल, नवीन मोगराज, चंदन बारीक, रेहान, पिंकी नायक, पीयूष इंगले, ईशान, दिव्यांश शर्मा, देवेंद्र साहू, संतोषी नाग, शंकर सोना, दीपक कठोड़ और दीप मोगराज समेत कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ चल रही इस लड़ाई को गांव-गांव तक ले जाने का संकल्प लिया है।



