ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक मामले में ED की एंट्री, 850 रईसजादों और पब संचालकों के करोड़ों के काले साम्राज्य पर कसा शिकंजा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हाई-प्रोफाइल नार्कोटिक्स नेटवर्क पर केंद्रीय एजेंसी का बड़ा प्रहार हुआ है। चर्चित ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक मामले में गंज थाना पुलिस से मिले अहम दस्तावेजों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय साम्राज्य की जांच संभाल ली है। 850 से अधिक रईसजादों, वीआईपी पब-क्लबों और फाइव स्टार होटलों से जुड़े इस सिंडिकेट के वित्तीय लेनदेन, कोडवर्ड व्हाट्सएप चैट्स और काले धन के निवेश को खंगालने के लिए ईडी ने अपनी रणनीतिक कार्रवाई तेज कर दी है।

रायपुर पुलिस की गंज थाना पुलिस ने इस संवेदनशील मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विधिक दस्तावेज, आरोपियों के बयान, चार्जशीट और बैंक खातों से संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड औपचारिक रूप से प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला ने दस्तावेजों को ईडी के सुपुर्द किए जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पुलिस कमिश्नर के इस बयान के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब इस अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क के पीछे छिपे वित्तीय आकाओं की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय की एक विशेष टीम अब ड्रग्स के इस अवैध कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन, विदेशों व अन्य राज्यों से जुड़ी मनी ट्रेल (Deeper Financial Trailing) और इस पूरे नेटवर्क को राजनीतिक व प्रशासनिक संरक्षण देने वाले रसूखदार लोगों की गुप्त भूमिका की गहराई से जांच करेगी। स्थानीय पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के बाद ईडी का इस मामले में प्रवेश करना यह साफ संकेत देता है कि यह मामला केवल नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बड़े पैमाने पर संगठित वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े हुए हैं।
क्यों हुई प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री और क्या है जांच का मुख्य दायरा
प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी की यह जांच केवल ड्रग्स की सामान्य सप्लाई चेन या स्थानीय पेडलर्स को पकड़ने तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। ईडी का मुख्य उद्देश्य उन सभी सफेदपोश चेहरों और प्रभावशाली लोगों की पहचान करना है, जिन्होंने इस सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार से अर्जित की गई करोड़ों रुपये की बेनामी और काली कमाई को विभिन्न कानूनी व गैर-कानूनी माध्यमों से छिपाने, अचल संपत्तियों में निवेश करने या उसे पूरी तरह से वैध (White Money) दिखाने का प्रयास किया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी नव्या मलिक और उसकी मुख्य सहयोगी विधि अग्रवाल समेत इस रैकेट में शामिल सभी गिरफ्तार और संदिग्ध आरोपियों के विभिन्न निजी व व्यावसायिक बैंक खातों को खंगालेगी। इसके साथ ही, पिछले तीन वर्षों के भीतर उनकी अघोषित संपत्तियों, महंगे वाहनों की खरीद-बिक्री, शेल कंपनियों के जरिए किए गए वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध म्यूचुअल फंड या शेयर निवेश की भी फॉरेंसिक ऑडिटिंग कराई जाएगी। यदि शुरुआती जांच में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो ईडी इस मामले में एक स्वतंत्र ईसीआईआर (ECIR – प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज कर सभी संदिग्धों की संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
हाई-प्रोफाइल इवेंट्स और टेक्नो पार्टियों की आड़ में चलता था ड्रग्स का धंधा
रायपुर गंज थाना पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल की गई आधिकारिक चार्जशीट और केस डायरी के अनुसार, नव्या मलिक और उसका पूरा गिरोह शहर में बड़े-बड़े म्यूजिकल इवेंट्स, फैशन शो और लेट-नाइट टेक्नो पार्टियों (Techno Parties) की आड़ में इस अवैध ड्रग्स की धड़ाधड़ सप्लाई करवाता था। इन विशेष रूप से आयोजित होने वाली पार्टियों में शहर के बेहद रईसजादे, बड़े उद्योगपतियों के बिगड़ैल बच्चे, प्रतिष्ठित बिल्डर्स और वीआईपी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले युवा ही शामिल होते थे।
नव्या मलिक बेहद शातिर तरीके से ऐसे ही संपन्न और आर्थिक रूप से मजबूत युवाओं को चिन्हित कर उन्हें अपना प्राथमिक टारगेट और परमानेंट कस्टमर बनाती थी। पुलिस जांच में यह तथ्य भी प्रमाणित हुआ है कि इस तरह की नशीली और प्रतिबंधित पार्टियां रायपुर और उसके आसपास के बाहरी इलाकों में स्थित प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटलों, बड़े नामी कैफे, आलीशान रिजॉर्ट्स, पब्स और नामी क्लबों में बेहद गोपनीय तरीके से आयोजित की जाती थीं, जहां बाहरी आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता था।
व्हाट्सएप के जरिए संचालित होता था नेटवर्क, 850 से अधिक रईसजादे थे सीधे संपर्क में
पुलिस की गहन पूछताछ और तकनीकी सेल (Cyber Cell) द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोन्स के डेटा एक्सट्रैक्शन से यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ड्रग्स क्वीन नव्या मलिक के व्यक्तिगत और व्यावसायिक संपर्क में छत्तीसगढ़ व पड़ोसी राज्यों के करीब 850 से अधिक रईसजादे सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। इस पूरे ड्रग्स रैकेट में गिरफ्तार किए गए अन्य छोटे पैडलर्स और बिचौलियों ने भी पूछताछ में इन वीआईपी ग्राहकों के नामों की सूची पुलिस को सौंपी है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि छत्तीसगढ़ में पैर पसार चुके इस खतरनाक ड्रग्स रैकेट के पीछे शहर के कई नामी होटल, पब-क्लब संचालकों और उनके मुख्य प्रबंधकों (Managers) की एक बहुत बड़ी संगठित भूमिका रही है। इन रसूखदार संचालकों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए कई बाहरी युवतियों को हाई-पेड ड्रग्स पैडलर्स के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि किसी को इन पर आसानी से शक न हो सके।
नव्या मलिक अपने इस पूरे काले कारोबार को पूरी तरह से डिजिटल और सुरक्षित रखने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड व्हाट्सएप (WhatsApp) मैसेंजर का इस्तेमाल करती थी। नशीले पदार्थों की इस पूरी खरीद-बिक्री के दौरान रईसजादे और नव्या मलिक कभी भी सीधे तौर पर ड्रग्स, एमडीएमए या कोकीन जैसे शब्दों का उपयोग नहीं करते थे, बल्कि इसके स्थान पर विभिन्न प्रकार के डिजिटल कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता था। ऑर्डर मिलने के बाद इन निर्धारित कोडवर्ड्स के हिसाब से ही पैडलर युवतियों के माध्यम से होटलों या पब के कमरों में ड्रग्स की गुप्त डिलीवरी सुरक्षित रूप से पहुंचा दी जाती थी।
युवतियों को बनाया जाता था मोहरा, पहले दोस्ती फिर नशे का आदी बनाने का खेल
इस पूरे सिंडिकेट के काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद डरावना और सुनियोजित था। क्लबों और पब्स में आने वाले अमीर घर के युवाओं से पहले इन प्रशिक्षित पैडलर युवतियों की सामान्य दोस्ती करवाई जाती थी। इसके बाद ये युवतियां उन युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित कर धीरे-धीरे ड्रग्स का सेवन करने के लिए उकसाती थीं। एक बार जब कोई युवा कौतूहल में इसका आदी हो जाता, तो उसे इस सिंडिकेट का पक्का उपभोक्ता (Consumer) बना लिया जाता था।
नव्या मलिक और उसकी मुख्य सहयोगी विधि अग्रवाल ने इसी खतरनाक और मनोवैज्ञानिक फार्मूले के दम पर बहुत ही कम समय में छत्तीसगढ़ के भीतर अपने ड्रग्स के कारोबार को एक विशाल नेटवर्क में तब्दील कर दिया। अब चूंकि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है, इसलिए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में न केवल इन युवतियों को वित्तीय मदद देने वाले पर्दे के पीछे के असली चेहरों बेनकाब होंगे, बल्कि उन पब और फाइव स्टार होटलों पर भी कानूनी हथौड़ा चलना तय है जिन्होंने अपनी व्यावसायिक आड़ में इस घिनौने अपराध को पनाह दी।



