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शराबी दूल्हे को मंडप से लौटाकर मुस्कान प्रधान बनीं समाज के लिए बड़ी मिसाल, जांजगीर-चांपा पुलिस ने दिया सम्मान

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव में एक साहसिक घटना सामने आई है, जहां 22 वर्षीय दुल्हन मुस्कान प्रधान ने विवाह मंडप में फेरे लेने से ठीक पहले अत्यधिक शराब के नशे में धुत दूल्हे संत राम से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। दुल्हन के इस ऐतिहासिक और साहसी निर्णय के बाद न केवल पूरे क्षेत्र में उनकी सराहना हो रही है, बल्कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने उन्हें नशामुक्ति अभियान का यूथ आइकन और काउंसलर नियुक्त कर सम्मानित किया है।







रायपुर, 26 जून 2026: छत्तीसगढ़ समाचार के अंतर्गत एक ऐसी प्रेरणादायक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जिसने भारतीय समाज में विवाह और महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक साहसी युवती ने रूढ़िवादी सामाजिक दबावों की परवाह न करते हुए विवाह के ऐन वक्त पर एक अत्यंत कठोर लेकिन ऐतिहासिक निर्णय लिया।

शादी के सज चुके मंडप में जब दूल्हा शराब के अत्यधिक नशे में लड़खड़ाते हुए पहुंचा, तो दुल्हन ने समाज की झूठी प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर विवाह की रस्मों को बीच में ही रोक दिया और फेरे लेने से पूरी तरह मना कर दिया।यह घटना जांजगीर-चांपा जिले के अंतर्गत आने वाले चाम्पा थाना क्षेत्र के कोसमंदा गांव की है।

यहां रहने वाली 22 वर्षीय युवती मुस्कान प्रधान का विवाह खोखरा गांव के रहने वाले 24 वर्षीय युवक संत राम के साथ तय हुआ था। तय कार्यक्रम के अनुसार 23 जून 2026 की शाम को बारात बड़े ही धूमधाम के साथ कोसमंदा गांव पहुंची थी। वधू पक्ष के लोग बारात के स्वागत-सत्कार और द्वार पूजा की तैयारियों में व्यस्त थे, लेकिन जैसे ही दूल्हा गाड़ी से नीचे उतरा, वहां मौजूद लोग उसकी स्थिति देखकर हैरान रह गए।

द्वार पूजा के समय खुली दूल्हे की पोल, दुल्हन ने उठाया ऐतिहासिक कदम

प्रत्यक्षदर्शियों और पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दूल्हा संत राम इस कदर शराब के नशे में धुत था कि वह बिना किसी सहारे के ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म द्वार पूजा के दौरान जब दूल्हे की लड़खड़ाहट और असहज स्थिति वधू पक्ष के सामने आई, तो बात तुरंत दुल्हन मुस्कान प्रधान तक पहुंच गई। मुस्कान ने जब स्वयं खिड़की से दूल्हे की इस दयनीय और गैर-जिम्मेदाराना स्थिति को देखा, तो उन्होंने एक पल की भी देरी किए बिना अपना घूंघट हटाया और विवाह के पारंपरिक बंधनों को ठुकराने का ऐलान कर दिया।मुस्कान प्रधान का साफ कहना था कि जो व्यक्ति अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र दिन पर खुद को नहीं संभाल सकता, वह भविष्य में किसी दूसरे की जिम्मेदारी कैसे उठाएगा। छत्तीसगढ़ समाचार के माध्यम से यह बात सामने आई है कि दुल्हन के इस फैसले के बाद विवाह स्थल पर अचानक सन्नाटा पसर गया। दोनों पक्षों के वरिष्ठ सदस्यों ने युवती को समझाने और सामाजिक लोक-लाज का वास्ता देकर शादी के लिए राजी करने का प्रयास किया, लेकिन मुस्कान अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग रहीं।

सगाई के दौरान भी नशे में आया था दूल्हा, चेतावनी को किया नजरअंदाज

पुलिस जांच और चाम्पा थाना प्रभारी अशोक वैष्णव से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पहली बार नहीं था जब संत राम ने इस प्रकार की हरकत की थी। इससे पहले खोखरा गांव में आयोजित सगाई के कार्यक्रम के दौरान भी दूल्हा अत्यधिक शराब पीकर पहुंचा था। उस समय भी मुस्कान ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था और संत राम को भविष्य में शराब की लत छोड़ने की सख्त हिदायत दी थी।उस समय दूल्हे और उसके परिवार ने आश्वासन दिया था और बकायदा वादा किया था कि वह विवाह के दिन या उसके बाद कभी भी शराब का सेवन नहीं करेगा। हालांकि, शादी के दिन इस वादे को पूरी तरह तोड़ते हुए दूल्हा फिर से अत्यधिक नशे की हालत में मंडप तक पहुंच गया। मुस्कान ने बताया कि इस धोखे और बार-बार सामने आ रही सामाजिक बुराई को देखकर उन्होंने समझ लिया था कि इस रिश्ते का भविष्य अंधकारमय है, इसलिए उन्होंने तुरंत शादी तोड़ने का फैसला किया।

मंडप में मचा भारी बवाल, दो पक्षों में हुई जमकर हाथापाई

जैसे ही दुल्हन मुस्कान प्रधान ने बारात को बिना दुल्हन के वापस लौटने और शादी न करने की अपनी अंतिम घोषणा की, वैसे ही वर पक्ष के लोग उग्र हो गए। वर पक्ष की ओर से शादी को जबरन आगे बढ़ाने और दुल्हन के फैसले का विरोध करने के कारण दोनों परिवारों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई और बारात में आए कुछ हुड़दंगी युवकों तथा वधू पक्ष के लोगों के बीच जमकर हाथापाई हो गई।इस सामूहिक विवाद और मारपीट की घटना में दोनों पक्षों के कुछ लोगों को मामूली चोटें भी आईं। विवाह स्थल पर मचे इस भारी बवाल और अफरातफरी के वातावरण की सूचना तुरंत स्थानीय चाम्पा पुलिस थाने को दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अशोक वैष्णव के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत मौके पर पहुंची और उन्होंने बीच-बचाव कर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में लिया। घायल व्यक्तियों को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी शासकीय अस्पताल भेजा गया।

पंचायत और पुलिस के हस्तक्षेप से 3 लाख रुपये के मुआवजे पर बनी सहमति

स्थिति शांत होने के बाद दोनों पक्षों के सामाजिक बुजुर्गों, प्रबुद्ध नागरिकों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में एक लंबी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दुल्हन के फैसले को सर्वसम्मति से सही ठहराया गया और वर पक्ष की गलती को स्वीकार किया गया। चूंकि वधू पक्ष ने शादी की तैयारियों, टेंट, कैटरिंग और अन्य व्यवस्थाओं में भारी धन खर्च किया था, इसलिए इस नुकसान की भरपाई की मांग की गई।गहन विचार-विमर्श और आपसी समझौते के बाद वर पक्ष इस बात के लिए राजी हुआ कि वे वधू पक्ष को शादी की तैयारियों में हुए आर्थिक नुकसान के मुआवजे के रूप में लगभग 3 लाख रुपये की राशि का भुगतान करेंगे।

इसके बाद कानून-व्यवस्था को बनाए रखते हुए बारात को बिना दुल्हन के ही वापस खोखरा गांव लौटना पड़ा। पूरे छत्तीसगढ़ समाचार जगत में इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है और लोग मुस्कान के इस कदम को महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं।

बचपन के कड़वे अनुभवों ने दी मुस्कान को इतनी बड़ी सीख

मुस्कान प्रधान के इस अभूतपूर्व साहस के पीछे उनके बचपन के कुछ अत्यंत कड़वे और दर्दनाक अनुभव छिपे हुए हैं। मुस्कान की माता सविता प्रधान ने मीडिया को अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनके पति यानी मुस्कान के स्वर्गीय पिता भी अत्यधिक शराब पीने के आदी थे। शराब की इसी गंभीर लत के कारण विवाह के महज 15 वर्षों के भीतर ही उनका असमय निधन हो गया था, जिससे पूरा परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में डूब गया था।पिता के निधन के बाद चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण मुस्कान ने बचपन से ही अपनी विधवा मां के संघर्षों को बहुत करीब से देखा था।

आर्थिक तंगहाली के कारण मुस्कान अपनी पढ़ाई को कक्षा 10वीं के बाद आगे नहीं बढ़ा सकीं और परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र में ही सिलाई, कढ़ाई और दर्जी का काम शुरू कर दिया। मुस्कान ने बताया कि उन्होंने शराब के कारण एक हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद होते देखा है, इसलिए वे किसी भी कीमत पर एक शराबी व्यक्ति के साथ अपना जीवन दांव पर नहीं लगाना चाहती थीं।

जांजगीर-चांपा पुलिस के पुलिस अधीक्षक ने मुस्कान को किया सम्मानित

मुस्कान प्रधान के इस अनुकरणीय और निर्भीक फैसले की जानकारी जब प्रशासनिक गलियारों तक पहुंची, तो शासन और प्रशासन ने भी उनकी इस बहादुरी को सलाम किया। जांजगीर-चांपा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने गुरुवार को मुस्कान प्रधान और उनकी माता को विशेष रूप से अपने कार्यालय आमंत्रित किया।

एसपी कार्यालय में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों की महिला प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में मुस्कान को शाल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय ने इस अवसर पर कहा कि मुस्कान प्रधान का यह कदम केवल एक निजी फैसला नहीं है, बल्कि यह समाज की उन तमाम कुरीतियों और घरेलू हिंसा के खिलाफ एक कड़ा और मजबूत संदेश है जो शराबखोरी के कारण जन्म लेती हैं।
हमारे समाज में आज भी लड़कियां सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण ऐसे शराबी युवकों से शादी करने को मजबूर हो जाती हैं, लेकिन मुस्कान ने यह साबित कर दिया है कि युवाओं के पास गलत के खिलाफ ना कहने का पूरा अधिकार है।

नशामुक्ति अभियान की बनीं यूथ आइकन, मिलेगी 5,000 रुपये मासिक मानदेय

मुस्कान के इस ऐतिहासिक निर्णय को देखते हुए जांजगीर-चांपा पुलिस ने उन्हें अपने जिले में चलाए जा रहे विशेष नशामुक्ति अभियान का आधिकारिक यूथ आइकन घोषित किया है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन द्वारा मुस्कान प्रधान को विभाग में एक विशेष ‘परामर्शदाता’ (काउंसलर) के पद पर नियुक्त किया गया है, जिसके तहत उन्हें हर महीने 5,000 रुपये का मानदेय (Honorarium) भी प्रदान किया जाएगा।

वे अब क्षेत्र की अन्य महिलाओं और युवाओं को नशामुक्ति और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य करेंगी।इसके साथ ही, जांजगीर-चांपा के जिला कलेक्टर जनमेजय महोबे ने भी मुस्कान के इस जज्बे की सराहना करते हुए जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। जिला प्रशासन ने घोषणा की है कि मुस्कान जो आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई छोड़ चुकी थीं, उनकी आगे की पूरी स्कूली और कॉलेज स्तर की शिक्षा का खर्च सरकार उठाएगी।
इसके अतिरिक्त, उन्हें कौशल विकास योजना के तहत उन्नत व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।यह छत्तीसगढ़ समाचार समाज के हर उस वर्ग के लिए एक बड़ी सीख है जो विवाह जैसे पवित्र बंधन में बंधने से पहले जीवनसाथी की गंभीर आदतों और व्यसनों को नजरअंदाज कर देते हैं। मुस्कान प्रधान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य किसी भी सामाजिक दिखावे या लोक-लाज से कहीं अधिक मूल्यवान हैं। 

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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