बिलासपुर नगर निगम में करोड़ों का भूखंड घोटाला: पूर्व महापौर और अधिकारियों पर भारी घूसखोरी का आरोप, संपदा अधिकारी निलंबित, पुलिस जांच शुरू
न्यायधानी बिलासपुर से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा प्रशासनिक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहां नगर निगम की बेशकीमती सरकारी जमीनों के आवंटन में भारी बंदरबांट और धोखाधड़ी के संगीन आरोप लगे हैं। बिलासपुर नगर निगम के पूर्व महापौर रामशरण यादव सहित तत्कालीन आला अधिकारियों पर निजी हितग्राहियों से कथित तौर पर चार करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेकर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाने का आरोप लगाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर ने तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं सिविल लाइन थाने में इस महाघोटाले की लिखित शिकायत दर्ज होने के बाद पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

रायपुर, 01 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के प्रशासनिक और सियासी हलकों से इस वक्त भ्रष्टाचार की एक बेहद गंभीर और बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। बिलासपुर नगर निगम की बेशकीमती और प्राइम लोकेशन पर स्थित जमीनों के आवंटन को लेकर एक बार फिर बड़ा और गहरा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के पूर्व महापौर रामशरण यादव और निगम के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर निजी व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये की कथित घूस लेने और कौड़ियों के दाम पर सरकारी जमीनें सौंपने का सनसनीखेज आरोप लगा है।
इस गंभीर अनियमितता के उजागर होते ही बिलासपुर शहर में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है। इस पूरे कथित घोटाले की बकायदा लिखित शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई है। मामला मीडिया और उच्च अधिकारियों तक पहुंचते ही नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में निगम आयुक्त ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन की इस त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट है कि मामला बेहद पेचीदा और गंभीर है।
टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर अपनों को रेवड़ी बांटने का गंभीर आरोप
सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बिलासपुर नगर निगम की इस कथित प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक के केंद्र में शहर का सबसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र व्यापार विहार है। आरोप है कि व्यापार विहार जैसे अत्यधिक महंगे और प्राइम कमर्शियल हब में स्थित तीन अलग-अलग भूखंडों, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग सात हजार वर्ग फीट बताया जा रहा है, के आवंटन में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन बेशकीमती भूखंडों को नीलाम करने के लिए जो सरकारी टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी, उसे जानबूझकर प्रभावित और मैनिपुलेट किया गया। सरकारी टेंडर के नियमों को इस कदर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया ताकि इसका सीधा और अनुचित लाभ केवल कुछ चुनिंदा निजी हितग्राहियों और रसूखदार व्यापारियों को ही मिल सके।
चार करोड़ रुपये के भारी-भरकम लेन-देन और घूसखोरी का दावा
इस पूरे भूमि घोटाले की शिकायत में जो सबसे चौंकाने वाला और सनसनीखेज पहलू सामने आया है, वह है इसमें हुआ भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन। शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर आरोप मढ़ा है कि गणेश ट्रेडर्स के संचालक निखिल अग्रवाल समेत कुल चार बड़े और रसूखदार निजी हितग्राहियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले में बैकडोर से भारी लेन-देन किया गया।
आरोपों के मुताबिक, इस पूरी टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने और बाजार मूल्य से बेहद कम दरों पर जमीनों की रजिस्ट्री कराने के एवज में लगभग चार करोड़ रुपये की मोटी घूस तत्कालीन सत्तासीनों और निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के बीच बांटी गई। यदि इस आरोप में थोड़ी भी सच्चाई पाई जाती है, तो यह बिलासपुर नगर निगम के इतिहास के सबसे बड़े भूमि घोटालों में से एक साबित हो सकता है।
निगम कमिश्नर का कड़ा रुख: तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन निलंबित
जैसे ही यह पूरा मामला थाने की चौखट तक पहुंचा और बिलासपुर की मीडिया में इसकी खबरें सुर्खियां बनने लगीं, नगर निगम के वर्तमान कमिश्नर ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। प्रारंभिक जांच और शिकायत में दर्ज तथ्यों के प्रथम दृष्टया सही पाए जाने की संभावना के चलते कमिश्नर ने एक बड़ा दंडात्मक कदम उठाया।
निगम आयुक्त ने तत्परता दिखाते हुए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड यानी निलंबित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। राजेश देवांगन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फाइलों को गलत तरीके से आगे बढ़ाया और टेंडर की शर्तों को छुपाकर कुछ खास चहेते ठेकेदारों को आर्थिक लाभ दिलाया। इस निलंबन की कार्रवाई के बाद से निगम के कई अन्य बाबू और अधिकारी भी सहमे हुए हैं।
पूर्व महापौर रामशरण यादव पर सीधे लगे आरोप से सियासी सरगर्मी तेज
इस पूरे भूमि विवाद में बिलासपुर के पूर्व महापौर रामशरण यादव का नाम सीधे तौर पर घसीटे जाने से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर पर लगे इन संगीन आरोपों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो चुका है।
एक तरफ जहां विपक्षी दल इस मामले को लेकर पूर्व महापौर और तत्कालीन कांग्रेस समर्थित निगम बोर्ड पर चौतरफा हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व महापौर के समर्थकों का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है और उनकी छवि को धूमिल करने के लिए सुनियोजित तरीके से यह झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है। बहरहाल, पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही सच सामने आ पाएगा।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने शुरू की दस्तावेजों की स्क्रूटनी और जांच
सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को अपनी प्राथमिकता सूची में डाल दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि मामला करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन और घूसखोरी से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखा जा रहा है।
पुलिस की एक विशेष टीम नगर निगम बिलासपुर से व्यापार विहार के उन तीनों भूखंडों के आवंटन से जुड़ी मूल फाइलें, निविदा आमंत्रण सूचना (NIT) के दस्तावेज, प्राप्त हुए आवेदनों की कॉपियां और आवंटन की दरों से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त करने की तैयारी में है। पुलिस इन सभी कागजातों की बारीकी से तकनीकी और कानूनी जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर और किसके इशारे पर किया गया था।
व्यापार विहार की जमीनों पर पहले भी उठते रहे हैं गंभीर सवाल
बिलासपुर का व्यापार विहार इलाका अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में जाना जाता है, यही वजह है कि यहां की जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। यह कोई पहली बार नहीं है जब व्यापार विहार या बिलासपुर नगर निगम की जमीनों के आवंटन पर उंगलियां उठी हों। इससे पहले भी कई बार कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी भूखंडों को कौड़ियों के दाम पर चहेते बिल्डरों और रसूखदारों को बांटने के आरोप लगते रहे हैं।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि इस मामले की जांच निष्पक्ष और उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए, तो कई बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी संभावना है। फिलहाल, संपदा अधिकारी के निलंबन और पुलिस की शुरुआती हलचल ने यह साफ कर दिया है कि इस बार दोषियों का बचना बेहद मुश्किल होने वाला है।



