Big BreakingChhattisgarhColumnFeaturedPoliticsRaipurकॉलम
Trending

वो हादसा भी कितना अजीबो-गरीब था; वो आग से जला जो नदी के करीब था…

शंकर पांडे (वरिष्ठ पत्रकार) एम.ए., बी.एससी., एलएल.बी., बी.जे. (पत्रकारिता) हैं। अविभाजित म.प्र. से छत्तीसगढ़ में पिछले 46 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैँ, पत्रकारिता के साथ ही अपने "छत्तीसगढ़" पर 6 पुस्तकें भी लिख चुके हैं, प्रिंट सहित इलेक्ट्रानिक मिडिया में कार्य किया है। इनकी रूचि राजनीति, इतिहास, क्राइम, संस्कृति लेखन में है।



‘आइना-ए-छत्तीसगढ़ ‘

“Aaina-E-Chhattisgarh”
शंकर पांडेय, रायपुर, 16/10/2026

 

वो हादसा भी कितना अजीबो गरीब था, वो आग से जला जो नदी के करीब था…

 

कॉलम । रायपुर, 16/10/2026, शंकर पांडे ।

 

युवाओं/छात्रों के विरोध प्रदर्शन की तस्वीर

डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा था “दुनिया में जब तक अन्याय रहेगा , तब तक सत्याग्रह की आवश्यकता रहेगी”। इन दिनों कुछ छात्र-युवा और विपक्षीदल देश के लोकतंत्र को बचाने के नाम पर जिस तरह सक्रिय हैं…! ऐसे में लगता है कि लोगों ने लोहिया की कम से कम यह बात तो मान ली है कि लोकतंत्र केवल 5 साल में एक बार वोट डालने का नाम नहीं है, इसलिए ज़िंदा कौमें 5 साल इंतज़ार नहीं करतीं, वे सरकारी नीतियों पर लगातार नज़र रखने, ज़रूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरने को अपना अधिकार व कर्तव्य समझती हैं। 2026 में युवाओं से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का दायरा सिर्फ़ रोज़गार-परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। परीक्षा- नौकरी के सवालों से शुरू युवा आंदोलनों के बाद अब मतदाता सूची , चुनाव आयोग को लेकर भी कुछ युवा समूहों और विपक्षी दलों के प्रदर्शन हो रहे हैं। आज सवाल यह है युवा किन मुद्दों पर सड़क पर आ रहा है और क्यों….? क्या रोज़गार की चिंता अब धीरे-धीरे संस्थाओं पर भरोसे की चिंता में बदल रही है…? क्या परीक्षा में निष्पक्षता का सवाल, चुनाव में निष्पक्षता का सवाल, दोनों के पीछे व्यवस्था से न्याय मिलने के भरोसे का सवाल है? विश्लेषक अलग-अलग मुद्दों आंदोलनों को जोड़कर एक बड़ी कहानी बना रहे हैं। पर ज़मीनी तस्वीर इतनी सीधी नहीं है सवाल सरकार के लिए भी है, क्या विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक लामबंदी, सिर्फ विपक्षी राजनीतिक चश्मे से देखना पर्याप्त है? सरकार को यह भी पूछना होगा कि युवा किसी व्यवस्था, विश्वसनीयता और उस पर अपने भरोसे को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो व्यवस्था में ऐसा क्या बदला जाए जिससे नियम ही नहीं, बल्कि भरोसा बहाल हो…? भाजपा इतने सालों से जनसमर्थन हासिल रहा है, आगे युवा मतदाता के रूप में आने वाले हैं, क्या उन्हें जोड़ना भाजपा के लिए चुनौती साबित हो रही है! हालांकि कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी युवाओं को अपनी तरफ लाने प्रयत्नशील हैँ।

यह भी पढ़ें  Weather Alert: 21 अगस्त 2025,बारिश बनी वरदान और संकट दोनों; खेतों में पानी, बाजार में महंगाई

राजमाता और सीएम बने राजा नरेशचंद्र, श्यामाचरण ….

राजमाता विजयाराजे सिंधिया की तस्वीर

अविभाजित मप्र में जनसंघ, बाद में भारतीय जनता पार्टी को स्थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वजह से ही छ्ग के सारंगढ़ के राजा नरेशचंद्र के सीएम बनने पं श्यामाचरण शुक्ल को सीएम बनने का मौका मिला… बहुत कम लोगों को पता है, विजया राजे सिंधिया मध्यप्रदेश के सागर क्षेत्र के राणा परिवार की बेटी थी उनके पिता महेंद्रसिंह ठाकुर जालोन जिला के डिप्टी कलेक्टर थे, अपने पति महाराजा जीवाजी राव सिंधिया की मृत्यु के बाद राजनीति में सक्रिय हुई।राजमाता 1957 से 1991तक 8 बार गुना ग्वालियर से सांसद रहीं। 12 अक्टूबर 1919 को जन्मी राजमाता का निधन 25 जनवरी 2001 को हुआ।उनकी बेटी वसुंधरा राजे, राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैँ तो दूसरी बेटी यशोधरा राजे मप्र सरकार में मंत्री भी रहीं तथा उनका पोता ज्योतिरादित्य सिंधिया आज भाजपा की मोदी सरकार में मंत्री हैँ। द्वारिका प्रसाद मिश्रा मप्र के सी एम बने और 1964 में मंत्रिमंडल का गठन किया था। मंत्रिमंडल के गठन को लेकर असंतोष था।विजयाराजे सिंधिया, डी.पी. मिश्र से असंतुष्ट थी तो गोविंद नारायण सिंह की महात्वाकांक्षा जोर मार रही थी। कहते हैं वे चाहती थीँ पं श्यामाचरण शुक्ल दलबदल कर सीएम बन जाये पर वे सहमत नहीं हुए, तब सिंधिया ने गोविंद नारायण सिंह को यही आफर दिया था। छग के कांग्रेसी विधायक बृजलाल वर्मा, गणेशराम अनंत भी मंत्रिमंडल में नहीं लिये जाने से नाराज चल रहे थे।बताया जाता है छ्ग के विधायकों को तोडऩे में शारदाचरण तिवारी की बड़ी भूमिका रही। कुल मिलाकर कांग्रेस के 35 विधायक तोड़ लिये गये। कुछ विधायकों को तो पुरानीदिल्ली के मैडन्स होटल में ठहराया गया, 1967 में मप्र विधानसभा में दल-बदल की यह कोई पहली घटना नहीं थी। पर यह कहा जा सकता है, न केवल विधानसभा किंतु राजनैतिक दलों के नैतिक चरित्र की गिरावट यहीं से शुरू हुई।

यह भी पढ़ें  Top 50 CG/MP: 10 September, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की 50 सबसे बड़ी खबरें फटाफट
पंडित श्यामाचरण शुक्ल की तस्वीर

बहरहाल मप्र में संविद शासन के पदारूढ़ होने के बाद गोविंद नारायण सिंह के बाद, छ्ग सारंगढ़ के राजा नरेशचंद्र सिंह सीएम बने वे सरल प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। किंतु संगठन क्षमता का अभाव था। इसके पीछे भीं राजघराने का वातावरण भी हो सकता है।श्रीमती सिंधिया का वर्चस्व, जन संघी नेताओं की दखल अंदाजी के बीच 10-12 दिन ही राजा नरेशचंद्र सीएम रहे, संविद शासन में असंतोष बढऩे लगा, कांग्रेस विधायक दल के नेता श्यामा चरण शुक्ल थे उन्होंने बहुत से कांग्रेसी विधायकों को वापस लाने का पूरा प्रयास किया। इसी बीच जबलपुर उच्च न्यायालय की खंड पीठ ने द्वारिका मिश्र के कसडोल चुनाव को अवैध करार दे दिया , मिश्र को 6 वर्ष तक चुनाव लडऩे से अपात्र घोषित किया, गोविंद नारायण सिंह के नेतृत्व वाली संविद सरकार का पतन, राजा नरेशचंद्र के सीएम बनने के साथ ही दल बदल किये कांग्रेसी विधायकों की वापसी के बाद श्यामाचरण शुक्ल के सीएम बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया। कुल मिलाकर राजमाता को इस रूप में भी छत्तीसगढ़ याद करता है कि छत्तीसगढ़ से पं.रविशंकर शुक्ल के बाद अविभाजित मप्र में राजा नरेशचंद्र, पं.श्यामाचरण शुक्ल आदि को सीएम बनने का मौका मिलने के पीछे राजमाता की ही भूमिका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रही। छत्तीसगढ़ दौरे पर राजमाता आती रही हैं। कोंटा बस्तर उपचुनाव में वे सरदार आंग्रे के साथ प्रचार करने पहुंची थी हालाकि उपचुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी। ज्ञात रहे कि राजमाता के पुत्र माधवराव सिंधिया उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया शुरू से कांग्रेस में रहे हैं, पर कॉंग्रेस छोड़ ज्योतिरादित्य भाजपा की मोदी सरकार में मंत्री हैँ।

 

बस्तर : खत्म होगा 71 साल का इंतजार….

राव घाट रेलवे स्टेशन

रायपुर से बस्तर के राव घाट तक जल्द दौड़ेगी ट्रेन… प्रदेश के बस्तर संभाग में अब तक रेलगाड़ी केवल कांकेर जिले के ताड़ोकी तक ही दौड़ रही थी, अब जल्द ही इससे 17 किलो मीटर आगे रावघाट तक ट्रेन का संचालन शुरू होने जा रहा है।रावघाट से जगदलपुर के बीच रेल लाइन निर्माण के लिए भी प्रक्रिया तेजी से शुरू हो चुकी है। रेललाइन भिलाई स्टील प्लांट के लिए लौह अयस्क की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। विदित हो रायपुर से जगदलपुर की कुल दूरी लगभग 300 किमी है। बहुप्रतीक्षित रेल सेवा के शुरू होने से कृषि उपज, वनोपज और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा इस रूट पर 12 अक्टूबर से नई ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जानी थी, रेलमंत्री का दौरा रद होने पर अब समय लग सकता है, 1955 से ही रायपुर – जगदलपुर को रेललाइन से जोड़ने की मांग लगातार की जा रही थी। 1993 में अविभाजित मध्यप्रदेश के समय ही योजना आयोग ने भीं इसकी मंजूरी दी थी , जिसके बाद यह योजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में चली गई थी। छग के गठन के बाद इस दिशा में गंभीरता दिखाई दी। 24 दिसंबर 2007 को एनएम डीसी, सेल, छत्तीसगढ़ सरकार और रेलवे के बीच त्रिपक्षीय संयुक्त समझौता हुआ, जिसके तहत दल्लीराजहरा – रावघाट – जगदलपुर तक 235 किलोमीटर लंबी रेललाइन बनाने प्रस्ताव रखा गया था। इसके पहले चरण में दल्ली राजहरा से रावघाट और दूसरे चरण में रावघाट से जगदलपुर (140 किमी) तक काम तय किया गया था। 03अक्टूबर 2023 को पी एम नरेंद्र मोदी ने जगदलपुर की सभा में ताड़ोकी से रेल सेवा का शुभारंभ किया था और अब यह ट्रेन रावघाट तक विस्तार पा रही है।

यह भी पढ़ें  राजनीतिक संतुलन में ताज़ा ऊर्जा, साय मंत्रिमंडल में तीन नए मंत्री शामिल

और अब बस…..

* बलौदाबाजार ज़िले के घने जंगलों के बीच सिंहनगढ़ में एक रहस्यमयी, ऐतिहासिक किला है। यहां बरनवापारा वन्य जीव अभयारण्य से लगभग 4 किमी की चढ़ाई कर पहुंचा जा सकता है,इसी कारण यहां बहुत कम लोग ही पहुंच पाते हैं।

* बस्तर के कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान स्थित धूड़मारास में बारिश के बाद बांस राफ्टिंग और कयाकिंग फिर शुरू हो गई है।

‘आइना-ए-छत्तीसगढ़ ‘
{21 सालों से लगातार}

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button