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01 जुलाई 2026: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और आज का पंचांग
राहुकाल को अशुभ माना जाता है क्योंकि यह राहु ग्रह के प्रभाव में होता है। आज कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और आषाढ़ मास का आरंभ हो चुका है। धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष रूप से व्रत और पूजा के लिए उपयुक्त है।

रायपुर, 01 जुलाई 2026। राहुकाल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का समय होता है जिसे राहु ग्रह नियंत्रित करता है। इस दौरान नए कार्य, यात्रा, निवेश या शुभ कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए क्योंकि राहु बाधा, भ्रम और विलंब का कारक माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति इस समय में नया व्यापार शुरू करता है तो उसे रुकावटें और अप्रत्याशित समस्याएं आ सकती हैं।
आज का राहुकाल और अन्य अशुभ समय
- राहुकाल: 12:42 PM – 2:24 PM
- यमगण्ड: 7:36 AM – 9:18 AM
- गुलिक काल: 11:00 AM – 12:42 PM
- दुर्मुहूर्त: 8:12 AM – 9:08 AM, 11:23 PM – 12:03 AM
- वर्ज्य: 8:35 PM – 10:20 PM
क्या न करें राहुकाल में:
- नए व्यापार या निवेश की शुरुआत
- विवाह, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान
- यात्रा या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर
क्या कर सकते हैं राहुकाल में:
- नियमित कार्य, अध्ययन, ध्यान
- पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखना
आज के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: 4:19 AM – 5:07 AM
- प्रातः संध्या: 5:26 AM – 6:26 AM
- अमृत काल: 5:55 AM – 7:36 AM
- अभिजीत मुहूर्त: 12:15 PM – 1:09 PM
- विजय मुहूर्त: 2:43 PM – 3:39 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 7:21 PM – 7:41 PM
- सायाह्न संध्या: 7:22 PM – 8:23 PM
- निशिता मुहूर्त: 12:03 AM – 12:44 AM (2 जुलाई)
विशेष स्थिति: यदि राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ पड़ जाएं तो परंपरागत मान्यता है कि अभिजीत मुहूर्त की शक्ति राहुकाल के दोष को कम कर देती है। ऐसे में शुभ कार्य अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं।
आज का पंचांग
- तिथि: कृष्ण पक्ष प्रतिपदा (सुबह 7:38 बजे तक), इसके बाद द्वितीया
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ (6:51 AM तक), फिर उत्तराषाढ़
- योग: इन्द्र (4:03 PM तक), फिर वैधृति
- करण: कौलव (7:38 AM तक), फिर तैतिल
- वार: बुधवार
- सूर्योदय: 5:55 AM
- सूर्यास्त: 7:29 PM
- चंद्रमा: धनु राशि में, दोपहर 1:31 PM के बाद मकर राशि में प्रवेश
आज का धार्मिक महत्व
आज कृष्ण पक्ष प्रतिपदा है, जो आषाढ़ मास की शुरुआत को दर्शाती है। प्रतिपदा तिथि को धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है और यह दिन व्रत, पूजा तथा ध्यान के लिए उपयुक्त है। आषाढ़ मास में देवशयनी एकादशी और चातुर्मास का आरंभ होता है, इसलिए यह समय विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण है।
डिस्क्लेमर
यह जानकारी पंचांग और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। समय और परंपराओं में क्षेत्रीय भिन्नता संभव है। प्रस्तुत रिपोर्ट www.the4thpillar.live की ओर से प्रकाशित है।



