भारी बारिश भी नहीं डिगा सकी आस्था, 17 सालों से जारी ‘महाभंडारे’ में हज़ारों ने ग्रहण किया प्रसाद
2009 से जारी सेवा यात्रा, प्रतिकूल मौसम में भी दोपहर से देर रात तक श्रद्धालुओं की सेवा में डटे रहे सेवक

रायपुर। राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन परिसर स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर में आस्था, सेवा और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है। वर्ष 2009 से प्रारंभ हुआ शनिवार भी महाभंडारा अपनी 17 वर्षों की अनवरत यात्रा को पूरा करते हुए आज भी उसी अपार श्रद्धा के साथ जारी है। इस शनिवार भी राजधानी में लगातार तीन-चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश श्रद्धालुओं के उत्साह और आयोजकों के अटूट संकल्प को डिगा नहीं सकी।

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति के संस्थापक कुबेर राठी द्वारा आयोजित इस महाभंडारे में हर शनिवार दोपहर से लेकर देर रात तक लगभग 5,000 से 6,000 श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।

शनिवार को बारिश के मौसम के बावजूद आयोजन समिति ने दोपहर 12 बजे श्री हनुमान मंदिर सेवा समिति के कार्यालय से महाभंडारे का शुभारंभ किया। इसके बाद शाम ढलते ही भंडारा मुख्य मंदिर परिसर में शुरू हुआ जो देर रात तक निर्बाध रूप से चलता रहा। मूसलाधार बारिश के बावजूद स्टेशन परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संस्थापक कुबेर राठी ने सर्व प्रथम भगवान बजरंगबली जी की विधिवत पूजा-अर्चना की और नगरवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगल कामना की। इस अवसर पर उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह 17 सालों का अखंड संकल्प हमारी किसी क्षमता का परिणाम नहीं, बल्कि स्वयं भगवान बजरंगबली जी की असीम कृपा का असर है। शास्त्रों में भी अन्न दान को महादान माना गया है। भूख मिटाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है और जब तक प्रभु की कृपा रहेगी, यह सेवा कार्य इसी तरह अनवरत चलता रहेगा।

इस अवसर पर श्रद्धा व्यक्त करते हुए संस्थापक कुबेर राठी ने कहा कि रेलवे स्टेशन परिसर स्थित यह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर एक अत्यंत सिद्ध और चमत्कारिक पीठ है। यहाँ आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और माँगी गई हर दुआ कबूल होती है। प्रतिकूल मौसम में भी हजारों लोगों का यहाँ जुटना और प्रसाद ग्रहण करना स्वयं भगवान बजरंगबली जी की असीम कृपा और महिमा का ही प्रत्यक्ष प्रमाण है।

इस महाभंडारे में रेलवे यात्रियों, स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जो सर्व धर्म समभाव और सामाजिक समरसता का अनुपम प्रतीक बना।



