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बीजापुर के जंगलों में मुर्गा लड़ाई पर सट्टा: 20 लाख कैश और 47 गाड़ियों के साथ 156 जुआरी गिरफ्तार

बीजापुर के रैगुड़ा जंगल में मुर्गा लड़ाई की आड़ में चल रहे अंतरराज्यीय जुए पर पुलिस का बड़ा छापा, 20 लाख रुपये नकद और 47 वाहनों समेत तीन राज्यों के 156 जुआरी रंगे हाथों पकड़े गए।



रायपुर, 6 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में पुलिस ने सीमावर्ती जंगलों के भीतर चल रहे अंतरराज्यीय जुआ गिरोह के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 156 जुआरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। भद्राकाली थाना क्षेत्र स्थित ग्राम रैगुड़ा के घने जंगलों में पारंपरिक मुर्गा लड़ाई की आड़ में लाखों रुपयों का सट्टा खिलाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से 20 लाख 1 हजार 200 रुपये की भारी-भरकम नकदी, 47 लग्जरी चारपहिया वाहन और 12 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। यह अभूतपूर्व घेराबंदी थी। बीजापुर के जंगलों में शांति लौटने के बाद दूसरे राज्यों के जुआ सिंडिकेट द्वारा स्थानीय हाट-बाजारों को सट्टेबाजी का सुरक्षित अड्डा बनाने की लगातार मिल रही गोपनीय सूचनाओं पर यह सुनियोजित प्रहार किया गया है।

पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के सीधे जमीनी नेतृत्व में इस गुप्त ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया गया। पुलिस बल ने जंगल को घेरा। ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही पुलिस के विशेष दलों ने रैगुड़ा के बीहड़ों से महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमाओं की ओर जाने वाले तमाम कच्चे रास्तों, पगडंडियों और वन मार्गों पर गोपनीय नाकेबंदी कर भागने के सारे रास्ते सील कर दिए थे। अचानक हुई घेराबंदी से जुआरियों में भगदड़ मच गई। पेड़ों की छांव में तीखे छुरों से लैस मुर्गों की भिड़ंत पर लाखों की नकदी का दांव लगा रहे अंतरराज्यीय खाईवाल और रसूखदार सटोरिए घने जंगलों के बीच खुद को चारों तरफ से सशस्त्र जवानों से घिरा पाकर असहाय हो गए।

तलाशी के दौरान बरामद सामानों की फेहरिस्त ने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। मौके से बरामद 47 वाहनों में अधिकांश गाड़ियां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के नंबरों पर पंजीकृत पाई गईं, जिनसे स्पष्ट होता है कि अंतरराज्यीय सट्टा नेटवर्क ने बस्तर के शांत होते अंचलों को संगठित मुनाफे का केंद्र बना लिया था। जुआरी महीनों से सक्रिय थे। सट्टेबाज सुरक्षा बलों की सीधी नजरों से बचने के लिए दुर्गम बीहड़ों का चयन करते थे, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर होता है और पारंपरिक आदिवासी मुर्गा बाजारों की आड़ में बाहरी लोगों की आवाजाही को सामान्य मेला मानकर छिपाया जा सके। संगठित गिरोह ने जंगल के अंदर बाकायदा सुरक्षा और पहरेदारी के लिए भी अपने गुर्गे तैनात कर रखे थे।

बीजापुर जिले के सीमावर्ती इलाके जैसे तारलागुड़ा, भद्राकाली और भोपालपटनम का यह समूचा वनक्षेत्र एक समय माओवादी हिंसा का खूनी केंद्र हुआ करता था, जहां आम नागरिकों तो क्या, प्रशासनिक अमले का प्रवेश भी जान जोखिम में डालने जैसा था। सुरक्षा बलों के लगातार चले नक्सल विरोधी अभियानों और नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना के चलते लाल आतंक का खौफ तेजी से सिमटा है। भय का माहौल खत्म हुआ। सड़कों के बनने और नदियों पर पुल तैयार होने से सीमावर्ती राज्यों के बीच आवागमन सुगम हुआ, लेकिन हिंसा थमते ही कानून-व्यवस्था के सामने संगठित आर्थिक अपराधों की यह बिल्कुल नई चुनौती उभरकर सामने आ गई है। स्थानीय आदिवासियों के निर्दोष सांस्कृतिक उत्सवों का दुरुपयोग कर बाहरी अपराधी तत्व यहां काली कमाई के अड्डे संचालित करने की साजिश रच रहे हैं।

पकड़े गए सभी 156 आरोपियों के खिलाफ थाना भद्राकाली में छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की गैर-जमानती एवं सख्त धाराओं के तहत विस्तृत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। कानून बेहद सख्त है। पुलिस ने जब्त की गई 20 लाख रुपये से अधिक की राशि को राज्य कोष के अधीन साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया है, जबकि 47 वाहनों के पंजीयन दस्तावेजों और उनके स्वामियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के लिए पड़ोसी राज्यों के संबंधित जिलों के परिवहन व पुलिस विभागों से पत्राचार शुरू किया गया है। स्थानीय मददगारों की पहचान की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि सीमा पार के कई बड़े सट्टेबाज पिछले कुछ हफ्तों से हर बाजार के दिन लाखों रुपये का फंड रोटेट कर रहे थे।

जिला पुलिस बल ने सीमावर्ती इलाकों के सभी थाना प्रभारियों और वन चौकियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि साप्ताहिक हाट-बाजारों में मुर्गा लड़ाई की आड़ लेकर गैर-कानूनी जुआ संचालित करने वालों पर सीधी नजर रखी जाए। जंगलों में गश्त बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती नदी तटों, वन मार्गों और अंतरराज्यीय चेकपोस्टों पर सीसीटीवी कैमरों तथा औचक जांच नाकों के जरिए संदिग्ध वाहनों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। गिरफ्तार किए गए सभी 156 आरोपियों को प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत आज दोपहर बाद न्यायिक रिमांड पर बीजापुर व्यवहार न्यायालय में पेश किया जाएगा।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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