भिलाई के छावनी इंडस्ट्रियल एरिया में फर्नीचर व फोम गोदाम में भीषण आग, लाखों का सामान जलकर खाक
भिलाई के छावनी औद्योगिक क्षेत्र स्थित जगदंबा फोम के गोदाम में शुक्रवार को भीषण आग लग गई। दमकल की कई गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया, लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया।

रायपुर, 6 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। भिलाई के छावनी औद्योगिक क्षेत्र स्थित जगदंबा फोम के विशाल फर्नीचर गोदाम में शुक्रवार दोपहर अचानक भीषण आग लगने से समूचे औद्योगिक परिसर में भगदड़ मच गई। आग की लपटें गगनचुंबी थीं। गोदाम की छत फाड़कर निकलते काले धुएं के विशाल गुबार ने आसपास के कई किलोमीटर इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दोपहर के समय ही दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। लपटें तेजी से फैलीं। देखते ही देखते गोदाम के भीतर रखे लाखों रुपये मूल्य के तैयार सोफे, स्लीपवेल और अन्य ब्रांडेड गद्दे, कच्चा फोम रोल, रासायनिक रेक्सिन, लकड़ी के फ्रेम तथा पॉलिएस्टर कपड़े जलकर पूरी तरह खाक हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग का नियंत्रण कक्ष हरकत में आया। दुर्ग और भिलाई अग्निशमन केंद्रों से पानी के आधा दर्जन से अधिक भारी दमकल वाहन तत्काल सायरन बजाते हुए घटनास्थल की ओर रवाना किए गए।
औद्योगिक क्षेत्र की संकरी गलियों और गोदाम के बाहर अव्यवस्थित खड़े व्यावसायिक वाहनों के कारण अग्निशामक दलों को मौके तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। रास्ता बेहद संकरा था। आग की तीव्रता इतनी भयानक थी कि गोदाम के लोहे के शेड चंद मिनटों में मुड़कर पिघलने लगे, जिसके चलते फायर फाइटर्स को बाहर से ही लगातार वाटर कैनन और हाई प्रेशर पाइपों के सहारे रासायनिक फोम व पानी की बौछारें छोड़नी पड़ीं। चारों ओर दमघोंटू गंध भर गई। फोम और थर्मोकोल जैसी अत्यधिक ज्वलनशील सामग्रियों के जलने से निकली विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड और सायनाइड गैसों ने बचाव कार्य में जुटे जवानों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया, जिसके बाद उन्हें विशेष ऑक्सीजन ब्रीदिंग किट पहनकर आगे बढ़ना पड़ा। सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया। छावनी थाना पुलिस बल ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए गोदाम के चारों तरफ दो सौ मीटर के दायरे को सील कर दिया, ताकि किसी भी अप्रिय जनहानि को टाला जा सके।
दीपावली पर्व से ठीक पहले घटित इस अग्निकांड ने फर्नीचर कारोबारियों की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ दी है। त्योहारी मांग चरम पर थी। धनतेरस और दीपावली के मौके पर दुर्ग-भिलाई सहित पूरे छत्तीसगढ़ के खुदरा शोरूमों में भारी बिक्री के उद्देश्य से गोदाम संचालक ने करोड़ों रुपये मूल्य के सोफा सेट, लग्जरी कुर्सियां, मैट्रेस और फोम कुशन का भारी स्टॉक जमा कर रखा था। सब कुछ स्वाहा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोदाम में काम कर रहे करीब एक दर्जन श्रमिक भोजन अवकाश की तैयारी में थे, तभी पिछली दीवार के पास रखे फोम के बंडलों से तेज चिंगारियां और चटखने की आवाजें सुनाई दीं। मजदूर जान बचाकर बाहर भागे। आग पकड़ने की दर इतनी तेज थी कि आंतरिक सुरक्षा उपकरणों को उठाने या बिजली का मेन स्विच काटने तक का मौका कर्मचारियों को नहीं मिला। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक लगभग साठ से अस्सी लाख रुपये का तैयार माल और कच्चा माल जलकर राख में तब्दील हो चुका है।
छावनी का यह पूरा इलाका घनी औद्योगिक इकाइयों और खतरनाक गोदामों से अटा पड़ा है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी लंबे समय से नासूर बनी हुई है। नियम ताक पर हैं। अधिकांश गोदामों में आपातकालीन निकास द्वार, स्वचालित स्प्रिंकलर प्रणाली, हीट डिटेक्टर और पानी के पर्याप्त बैकअप टैंक मौजूद नहीं हैं, जिसके कारण ऐसी दुर्घटनाएं बार-बार विकराल रूप धारण कर लेती हैं। अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र की पड़ताल शुरू हो चुकी है। अग्निशमन अधिकारियों ने मौके पर प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान पाया कि गोदाम परिसर के भीतर आपात स्थिति से निपटने के लिए लगाए गए ड्राई केमिकल पाउडर वाले अग्निशामक सिलेंडर एक्सपायर हो चुके थे। लापरवाही साफ दिखी। ज्वलनशील रासायनिक फोम और पॉलीयुरेथेन जैसी वस्तुओं के भंडारण के लिए निर्धारित विशेष एनओसी और गाइडलाइंस का पालन किए बिना यहां क्षमता से दोगुना माल भरा गया था, जो सीधे तौर पर नियमों का खुला उल्लंघन है।
घटनास्थल पर प्राथमिक तकनीकी जांच के बाद आशंका जताई जा रही है कि गोदाम के मुख्य विद्युत वितरण बोर्ड में ओवरलोडिंग के चलते हुआ शॉर्ट सर्किट इस भीषण तबाही का मूल कारण हो सकता है। बिजली का लोड ज्यादा था। त्योहार के दौरान गोदाम के भीतर लगातार चल रहे बड़े कटिंग टूल्स, हेवी सिलाई मशीनों और ब्लोअर के कारण आंतरिक वायरिंग पर अत्यधिक दबाव बना हुआ था। पुलिस ने जांच तेज कर दी है। छावनी नगर संभाग के सहायक पुलिस अधीक्षक और छावनी थाना प्रभारी ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को मौके पर तलब किया है, जो मलबा ठंडा होने के बाद वायरिंग के जले अवशेषों और स्विचगियर पैनल की गहन जांच करेगी। सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित किए जा रहे हैं। गोदाम के प्रवेश द्वार और आसपास की रोलिंग मिलों के बाहर लगे सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे आग भड़कने के सही समय और शुरुआती बिंदु की तकनीकी पुष्टि की जा सके।
औद्योगिक क्षेत्र में भड़की इस आग ने भिलाई नगर निगम और जिला उद्योग केंद्र के आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी की किल्लत महसूस हुई। दमकल गाड़ियों को दोबारा पानी भरने के लिए कई किलोमीटर दूर सुपेला और खुर्सीपार के जल संयंत्रों तक दौड़ लगानी पड़ी, जिससे बचाव अभियान के बीच में कई बार बहुमूल्य समय व्यर्थ हुआ। भिलाई स्टील प्लांट के दमकल दस्ते को भी अलर्ट पर रखा गया था। आग की भीषणता को देखते हुए संयंत्र प्रबंधन ने अपने विशेष फोम टेंडर्स को तैयार रहने का निर्देश जारी किया था, ताकि रिहायशी बस्तियों की ओर लपटों का प्रसार रोका जा सके। व्यापारियों में भारी रोष है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के स्थानीय प्रतिनिधियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रभावित कारोबारी को ढांढस बंधाया और जिला प्रशासन से औद्योगिक क्षेत्रों में स्थायी दमकल उप-केंद्र स्थापित करने की मांग दोहराई।
प्रशासनिक अमला वर्तमान में कूलिंग ऑपरेशन के साथ-साथ नुकसान के आधिकारिक आकलन की अंतिम प्रक्रिया में जुटा हुआ है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। दमकल कर्मियों की चार टीमें मलबे के नीचे सुलग रही चिंगारियों को बुझाने के लिए लगातार फोम का छिड़काव कर रही हैं, ताकि हवा के तेज झोंकों से दोबारा आग न भड़क सके। जिला कलेक्टर के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय संयुक्त तकनीकी जांच समिति आज देर शाम तक अपनी प्राथमिक रिपोर्ट सौंपेगी।



