दीवाली पर रायपुर की हवा में घुलेगा बारूदी धुआं, एक्यूआई स्तर बिगड़ने की आशंका के बीच एडवाइजरी जारी
दीवाली पर्व पर रायपुर में आतिशबाजी और धूल से वायु गुणवत्ता बिगड़ने की आशंका है। वर्तमान में 54 से 78 के बीच बना एक्यूआई स्तर आने वाले दिनों में गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है, जिससे बचाव के उपाय जरूरी हैं।

रायपुर, 6 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। राजधानी रायपुर में दीपावली की तैयारियों के चरम पर पहुंचते ही हवा के मिजाज में तेज गिरावट आने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है। फिलहाल राहत की स्थिति है। शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अभी 54 से 78 के बीच दर्ज हो रहा है, जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के तहत संतोषजनक श्रेणी में गिना जाता है। मौसम बदल रहा है। पिछले दो वर्षों के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि त्योहार की रात जलने वाले अनियंत्रित बारूद के कारण सांसों पर भारी संकट खड़ा हो सकता है। वर्ष 2024 में दीपावली के दौरान शहर का एक्यूआई 279 के चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया था, जबकि वर्ष 2025 में सख्त हिदायतों के बाद यह आंकड़ा 149 पर सिमटा था। मौजूदा खुशनुमा माहौल जल्द जहरीले धुएं में बदल सकता है।
बाजारों में बेतहाशा भीड़ उमड़ रही है। गोलबाजार, मालवीय रोड, सदर बाजार और पंडरी जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में सुबह से आधी रात तक हजारों वाहनों की कतारें रेंगने से चारों तरफ जाम की स्थिति बनी हुई है। हवा भारी हो गई है। धीमी गति से चलने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साइलेंसर से लगातार निकल रहा बिना जला हाइड्रोकार्बन और जहरीला कार्बन मोनोऑक्साइड स्थानीय आबोहवा में घुलकर सांस लेना दूभर कर रहा है। सफाई अभियान भी जारी है। दुकानों और आवासीय कॉलोनियों में रंगाई-पुताई तथा साफ-सफाई के दौरान उड़ने वाले महीन धूलकण हवा के निचले स्तर में जमा होकर दृश्यता घटा रहे हैं। तापमान लगातार गिर रहा है। गुलाबी ठंड के कारण वायुमंडल में बन रही थर्मल इन्वर्जन की परत सड़क से उठने वाले भारी धुएं को ऊपर नहीं जाने दे रही, जिससे पूरा इलाका गैस चैंबर जैसा बनने का खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरणविद् शम्स परवेज ने त्योहार की सफाई और आतिशबाजी के दौरान नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है। सूखी झाड़ू न चलाएं। कमरों और बरामदों में धूल उड़ाने वाली पारंपरिक झाड़ू के बजाय गीले कपड़े या पोंछे का इस्तेमाल करने से हवा में तैरने वाले हानिकारक कण सीधे फेफड़ों में जाने से बच जाते हैं। कालीन बाहर न झाड़ें। पर्दे, सोफे और गद्दों की गर्द खुले आंगन या गलियों में झाड़ने से आसपास का वातावरण तुरंत प्रदूषित होता है और पड़ोसियों के लिए भी मुसीबत खड़ी करता है। कचरे में आग न लगाएं। घरों से निकली पुरानी वस्तुओं, सूखे पत्तों या प्लास्टिक थैलियों को खुले में जलाना कानूनी अपराध होने के साथ-साथ अत्यंत घातक रसायनों को हवा में घोल देता है।
पटाखों के रासायनिक धुएं से बचना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। रासायनिक तत्व फेफड़े गलाते हैं। पारंपरिक आतिशबाजी में मिलाए जाने वाले पोटेशियम नाइट्रेट, गंधक, बेरियम और सीसा जैसे भारी तत्व वायुमंडल में जलने के बाद कई दिनों तक निलंबित कणों के रूप में टिके रहते हैं। धमाके कान फोड़ते हैं। यदि उत्सव में आतिशबाजी शामिल करना अनिवार्य हो, तो नागरिकों को केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों का ही सीमित संख्या में उपयोग करना चाहिए। ये कम विषैले होते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं द्वारा प्रमाणित ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में तीस प्रतिशत तक कम पार्टिकुलेट मैटर पैदा करते हैं और इनमें खतरनाक गंधक की मात्रा नाममात्र होती है।
हवा में घुलता बारूदी जहर सीधे मानव शरीर के श्वसन तंत्र और रक्त संचार पर हमला करता है। मास्क पहनना जरूरी है। प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क से बचने के लिए बाहर निकलते समय सामान्य कपड़े के स्थान पर एन-95 मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि यह बारीक से बारीक धूलकणों को रोक लेता है। आंखें बिल्कुल न मलें। सड़कों पर धुएं के कारण आंखों में जलन या लाली महसूस होने पर उन्हें मसलने के बजाय तत्काल साफ और ठंडे पानी के छींटे मारकर धोना चाहिए। तबीयत बिगड़े तो डॉक्टर के पास जाएं। सांस लेने में किसी भी प्रकार की रुकावट, सीने में जकड़न या असामान्य बेचैनी होने पर तत्काल निकटतम अस्पताल की इमरजेंसी में संपर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते ऑक्सीजन थेरेपी दी जा सके।
बचाव के घरेलू तौर-तरीके अपनाकर भी विषैले धुएं के सीधे प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खिड़कियां बंद रखें। दीपावली की रात जैसे ही आतिशबाजी का सिलसिला तेज हो, मकानों के सभी मुख्य द्वार और बालकनी की खिड़कियां कसकर बंद कर देनी चाहिए, ताकि जहरीली गैसें कमरों में प्रवेश न कर सकें। दवाएं साथ रखें। दमा और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों को अपनी नियमित दवाइयां, नेबुलाइजर और इनहेलर हमेशा बिस्तर के पास चालू हालत में तैयार रखने की सलाह दी गई है। संवेदनशील लोग बाहर न जाएं। वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को रात के समय छतों या खुले मैदानों में आतिशबाजी देखने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, क्योंकि उनका श्वसन तंत्र सबसे पहले प्रभावित होता है।
नगर निगम और पर्यावरण विभाग की संयुक्त टीमें शहर के अलग-अलग हिस्सों में वायु गुणवत्ता की सघन निगरानी में जुटी हैं। मॉनिटरिंग स्टेशन सक्रिय हैं। कलेक्टोरेट, एम्स परिसर और औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित डिजिटल प्रदूषण मापक यंत्रों से हर घंटे का एक्यूआई डेटा एकत्र कर विश्लेषण किया जा रहा है। दोषियों पर जुर्माना लगेगा। खुले में कचरा जलाने वालों और प्रतिबंधित तेज आवाज वाले पटाखों का भंडारण करने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई के लिए विशेष उड़नदस्ते मैदान में उतार दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण कक्ष की अगली समीक्षा रिपोर्ट आज शाम छह बजे जारी की जाएगी।



