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बस्तर पुलिस महकमे में करोड़ों का वेतन घोटाला: आरक्षक के खाते में हर महीने सरकारी खजाने से पहुंचे 30 लाख रुपये, कैग के खुलासे के बाद हड़कंप

एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में चल रहे भ्रष्टाचार का कैग ऑडिट टीम ने किया पर्दाफाश, तीन मुख्य मास्टरमाइंड गिरफ्तार और 60 से अधिक पुलिसकर्मियों पर लटकी जांच की तलवार।







रायपुर, 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में एक ऐसा हैरान करने वाला और खौफनाक वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे और शासन की व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। बस्तर एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में पदस्थ एक अदने से आरक्षक गिरीश राय के बैंक खाते में पिछले केवल चार महीनों के भीतर जिला कोषालय यानी ट्रेजरी से नियमों को ताक पर रखकर कुल 1.20 करोड़ रुपये जमा कराए गए। एक सिपाही, जिसका सामान्य मासिक वेतन कुछ हजारों में होना चाहिए, उसके वेतन खाते में अचानक प्रति माह 30-30 लाख रुपये सरकारी खजाने से ट्रांसफर होने लगे।

अंधाधुंध चल रहे इस भ्रष्टाचार के खेल पर तब जाकर ब्रेक लगा, जब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग (CAG) की आधुनिक ऑडिट टीम ने इस वित्तीय हेराफेरी को रंगे हाथों पकड़ा। कैग की टीम के इस बड़े हस्तक्षेप के बाद जिला पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य मास्टरमाइंड आरक्षक गिरीश राय समेत तीन शासकीय कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती विभागीय जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस महाघोटाले में केवल यह तीन लोग शामिल नहीं हैं, बल्कि एसपी कार्यालय की अलग-अलग शाखाओं के 15 अन्य कर्मियों की भूमिका पूरी तरह से संदिग्ध पाई गई है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही इसमें संलिप्त पुलिसकर्मियों की कुल संख्या 60 के पार पहुंचने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।

जानिए क्या है बस्तर पुलिस का यह पूरा सैलरी स्कैम और कैसे हुआ इसका भंडाफोड़

बस्तर जिले के एसपी कार्यालय में वेतन और भत्तों के आहरण में हुई इस भारी अनियमितता की आधिकारिक कड़ियां वर्ष 2023 से जुड़ी हुई हैं। मुख्य आरोपी आरक्षक गिरीश राय वर्ष 2012 से अनुकंपा नियुक्ति के आधार पर बस्तर पुलिस विभाग में पदस्थ था और लंबे समय से एसपी कार्यालय की मुख्य वेतन शाखा में सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा था। विश्वसनीय विभागीय सूत्रों के अनुसार, गिरीश राय को डिजिटल पे-रोल सिस्टम और ट्रेजरी सॉफ्टवेयर की तकनीकी कमियों की गहरी समझ हो चुकी थी, जिसका उसने बेहद शातिर तरीके से नाजुक फायदा उठाया।

अक्टूबर 2023 से लेकर मई 2026 के बीच इस घोटाले का खेल लगातार पर्दे के पीछे चलता रहा। पुलिस विभाग में लगातार होने वाले तबादलों, नई पोस्टिंग और नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण भत्तों में होने वाले उतार-चढ़ाव को ढाल बनाकर आरोपी इस वित्तीय गड़बड़ी को अंजाम देते रहे। चूंकि बस्तर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहते हैं, इसलिए कुल सैलरी बजट का करोड़ों में होना सामान्य बात थी। इसी का फायदा उठाकर मुख्य आरोपी वेतन आहरण के समय ट्रेजरी को भेजी जाने वाली सॉफ्ट कॉपी में चालाकी से कोडिंग को एडिट कर देता था। वह कुल बजट की बड़ी राशि को सरकारी खातों से सीधे अपने और अपने कुछ खास सहयोगियों के खातों में डायवर्ट कर रहा था।

एआई गाइडेड ऑडिट टीम की पैनी नजरों ने पकड़ा 3.54 करोड़ का यह बड़ा सरकारी गबन

इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब कैग (CAG) की विशेष ऑडिट टीम ने बस्तर पुलिस के वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एडवांस ऑडिटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया। पुलिस विभाग के खर्चों और वास्तविक कर्मियों की संख्या के बीच जब भारी मिसमैच यानी विसंगति दिखाई दी, तो ऑडिट टीम के कान खड़े हो गए। जब व्यक्तिगत खातों के लेनदेन की गहन स्क्रूटनी की गई, तो पता चला कि पिछले कुछ महीनों में आरक्षक गिरीश राय के खाते में अप्रत्याशित रूप से 1.20 करोड़ रुपये भेजे गए।

शुरुआती और प्राथमिक जांच में अब तक कुल 3 करोड़ 54 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी और सीधे गबन के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं। जैसे ही कैग ने इस वित्तीय हेरफेर की अंतिम रिपोर्ट पुलिस महानिरीक्षक (IG) बस्तर रेंज और पुलिस अधीक्षक को सौंपी, महकमे में खलबली मच गई। इसके बाद डीएसपी हेडक्वार्टर को मामले की प्रारंभिक जांच सौंपते हुए तत्काल आमानाका व स्थानीय स्तर पर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुख्य आरोपी गिरीश राय को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने डिजिटल पे-रोल में की गई इस पूरी हेराफेरी को कबूल कर लिया।

मुख्य आरोपी के साथ राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू भी भेजे गए जेल

बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा की गई त्वरित कानूनी कार्रवाई के तहत इस मामले में अब तक तीन प्रमुख विभागीय कर्मचारियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

गिरफ्तार आरोपी का नामविभाग/शाखा में पद स्थापनाघोटाले में प्राथमिक भूमिका
गिरीश राय (आरक्षक)वेतन शाखा, एसपी कार्यालय बस्तरघोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड, डिजिटल पे-रोल को एडिट करना
राजकुमार कतलमविभिन्न प्रशासनिक शाखा, बस्तर पुलिसअवैध रूप से बढ़ी हुई सैलरी के फंड को अपने खाते में लेना
हेमंत मैथ्यूविभिन्न स्थापना शाखा, बस्तर पुलिसवित्तीय हेराफेरी और साजिश में मुख्य सहयोगी की भूमिका

स्थानीय अदालत ने तीनों आरोपियों की गंभीर संलिप्तता को देखते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस इन तीनों के व्यक्तिगत बैंक खातों, संपत्तियों और निवेश के दस्तावेजों को फ्रीज करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है ताकि गबन की गई सरकारी राशि की रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।

60 से अधिक पुलिसकर्मियों पर लटकी विभागीय जांच की तलवार, बढ़ेगा कार्रवाई का दायरा

इस करोड़ों के सैलरी घोटाले ने बस्तर पुलिस की आंतरिक निगरानी प्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। बस्तर एसपी के अनुसार, यह जांच केवल इन तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। प्राथमिक जांच के घेरे में आए एसपी ऑफिस के 15 अन्य बाबुओं और कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम तथा उनके पिछले तीन सालों के बैंक स्टेटमेंट्स को खंगाला जा रहा है।

अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस पूरे सिंडिकेट में कुछ ऐसे भी पुलिसकर्मी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने अपने खातों में चुपचाप बढ़ी हुई सैलरी की रकम ली और उसके बदले मास्टरमाइंड गिरीश राय को उसका मोटा कमीशन नगद में लौटाया। पुलिस विभाग उन सभी अधिकारी-कर्मचारियों की सूची तैयार कर रहा है जिनके वेतन में पिछले तीन वर्षों के दौरान अचानक कोई बड़ा और अस्वाभाविक उछाल देखा गया था।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, संदेह के दायरे में आने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या 60 से अधिक होने की उम्मीद है। शासन स्तर पर इस बात की भी समीक्षा की जा रही है कि हर महीने ट्रेजरी से होने वाले आहरण के समय उच्च अधिकारियों की डिजिटल सिग्नेचर और वेरिफिकेशन प्रक्रिया में इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे और किस स्तर पर होती रही।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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