क्रूरता की पराकाष्ठा: छत्तीसगढ़ सीमा पर दो बाघों की दर्दनाक हत्या, खाल और मूंछों की तस्करी करते महाराष्ट्र पुलिस के दो जवान रंगे हाथ गिरफ्तार
ऑपरेशन सेफ पैसेज के तहत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और एंटी-पोचिंग दल की संयुक्त टीम ने कांकेर सीमा पर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का किया भंडाफोड़।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग यूनिट, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने एक बड़े खुफिया ऑपरेशन के तहत दोनों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। संयुक्त टीम ने इनके पास से दो पूर्ण वयस्क बाघों की खाल, 13 बेशकीमती मूंछें, एक मोटरसाइकिल और दो चालू मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
इसके साथ ही, आरोपियों की निशानदेही पर की गई अगली कार्रवाई में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से भारी मात्रा में प्रतिबंधित पैंगोलिन के शल्क भी जब्त किए गए हैं। यह बरामदगी वन्यजीव तस्करी के एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट की ओर इशारा कर रही है।
गोपनीय इनपुट और संयुक्त टीम की त्वरित घेराबंदी
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और छत्तीसगढ़ वन विभाग की खुफिया विंग को एक बेहद पुख्ता और गोपनीय सूचना मिली थी। इस इनपुट में बताया गया था कि महाराष्ट्र की सीमा से सटे इलाकों से राष्ट्रीय पशु बाघ के अंगों की एक बड़ी खेप को तस्करी के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ की सीमा के भीतर लाया जा रहा है।
सूचना की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने मामले में तत्काल कड़े कदम उठाने के निर्देश जारी किए। वन मंत्री के मार्गदर्शन और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन के कुशल फील्ड निर्देशन में आनन-फानन में एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया।
इस हाई-लेवल एंटी-पोचिंग टीम में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की केंद्रीय व पश्चिमी क्षेत्रीय इकाइयां, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड के प्रभारी संदीप सिंह (सहायक वन संरक्षक), उपवनमंडलाधिकारी रायपुर और पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के कई अनुभवी और चुस्त वनाधिकारियों को शामिल कर सीमावर्ती इलाकों में जाल बिछाया गया।
खाकी वर्दी की आड़ में चल रहा था तस्करी का काला खेल
संयुक्त टीम ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के अंतर्गत आने वाले बांदे थाना क्षेत्र में अपनी रणनीतिक नाकेबंदी मजबूत कर दी थी। इसी दौरान आधी रात के सन्नाटे में एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सीमा पार कर छत्तीसगढ़ के क्षेत्र में प्रवेश करती दिखाई दी।
टीम के सदस्यों ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और बाइक सवार दो पुरुषों को रोककर उनकी सघन तलाशी ली। तलाशी के दौरान वनाधिकारी तब दंग रह गए जब आरोपियों के पास रखे थैलों से दो विशालकाय और पूरी तरह से सुरक्षित बाघों की खाल और उनकी 13 मूंछें बरामद हुईं।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम के रूप में की गई है। जब वन्यजीव अधिकारियों ने कड़ाई से पूछताछ की, तो पता चला कि दोनों ही आरोपी पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी क्षेत्र में महाराष्ट्र पुलिस दल में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। वे अपनी पुलिसिया पहचान का फायदा उठाकर अंतर-राज्यीय सीमाओं पर चेकिंग से बचते थे और इस अवैध धंधे को लंबे समय से अंजाम दे रहे थे।
गढ़चिरौली में रेड और पैंगोलिन शल्क की बड़ी बरामदगी
गिरफ्तारी के तुरंत बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों पुलिसकर्मियों को रिमांड पर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी बिजेश्वर गेडाम ने एक और बड़ा राज उगला। उसने स्वीकार किया कि बाघ के अंगों के अलावा उसके अहेरी स्थित निजी आवास पर वन्यजीवों के अन्य अंगों को भी छुपा कर रखा गया है।
इस खुलासे के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र वन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से अहेरी में आरोपी के घर पर देर रात छापेमारी की। इस दूसरी बड़ी रेड में टीम को घर के भीतर से भारी मात्रा में दुर्लभ और विलुप्तप्राय पैंगोलिन (चींटीखोर) के शल्क बरामद हुए। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ये दोनों पुलिसकर्मी इस अंतर-राज्यीय पोचिंग नेटवर्क में मुख्य बिचौलियों की भूमिका निभा रहे थे, जो स्थानीय शिकारियों से अंग खरीदकर अंतरराष्ट्रीय डीलरों तक पहुंचाने का काम करते थे।
अबूझमाड़ के जंगलों में शिकार की आशंका
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक वरुण जैन ने इस बड़ी सफलता के बाद मीडिया को बताया कि शुरुआती तकनीकी और फोरेंसिक जांच के जो संकेत मिले हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। जब्त की गई दोनों खालों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि दोनों बाघों का शिकार हाल के महीनों में ही किया गया है।
प्राथमिक कड़ियों को जोड़ने पर यह आशंका जताई जा रही है कि इन बाघों को बस्तर संभाग के बेहद घने और संवेदनशील इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अबूझमाड़ के जंगलों वाले लैंडस्केप में निशाना बनाया गया होगा। अबूझमाड़ और इंद्रावती का यह पूरा कॉरिडोर मध्य भारत में बाघों के संवर्धन और उनके सुरक्षित विचरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस क्षेत्र में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय शिकारी गिरोह वन्यजीवों को जहर देकर या फिर बिजली के अवैध तारों का जाल बिछाकर मौत के घाट उतार देते हैं और फिर उनके अंगों को ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। वन विभाग अब इन दोनों पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स और वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच कर रहा है ताकि इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके।
क्या है ऑपरेशन सेफ पैसेज और इसका महत्व?
यह पूरी कार्रवाई वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे बेहद महत्वाकांक्षी और गोपनीय अभियान ऑपरेशन सेफ पैसेज के तहत की गई है। यह विशेष अभियान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली से लेकर छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व, अबूझमाड़ की पहाड़ियों, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और ओडिशा के सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य तक फैले लगभग 400 किलोमीटर लंबे विशाल और सघन वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए समर्पित है।
यह वन्यजीव गलियारा न केवल बाघों के मुक्त आवागमन के लिए बल्कि हाथियों, गौर, और छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु जंगली भैंसों की आनुवंशिक निरंतरता और उनके अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संजीवनी की तरह है। हाल ही में इस कॉरिडोर में सकारात्मक सुधार देखे गए थे, जहां करीब आठ साल बाद उदंती के जंगलों में एक नई बाघिन ने अपना स्थाई ठिकाना बनाया था। ऐसे समय में दो बाघों के शिकार की यह खबर पूरे पर्यावरण जगत और वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली है।
पूर्व में भी एंटी-पोचिंग यूनिट ने किए हैं बड़े धमाके
यह पहली बार नहीं है जब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की इस एंटी-पोचिंग स्पेशल विंग ने अंतर-राज्यीय स्तर पर शिकारियों की कमर तोड़ी हो। डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के मुताबिक, साल 2023 में भी इसी तरह के अत्यधिक गोपनीय और सघन ऑपरेशन्स चलाकर टीम ने उड़ीसा और महाराष्ट्र के कई कुख्यात शिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा था और दो अन्य बाघों की खालें बरामद की थीं।
इसके अलावा, इसी साल अप्रैल 2026 में इसी मुस्तैद यूनिट ने अबूझमाड़ के जंगलों में लुप्तप्राय प्रजाति की नौ भारतीय विशाल गिलहरियों का अवैध रूप से शिकार करने वाले एक बड़े गिरोह को दबोचा था। वन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस बार खाकी वर्दी के शामिल होने के कारण किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को कोर्ट से कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कानूनी पैरवी की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत न कर सके।



