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छत्तीसगढ़ का सबसे खौफनाक सीरियल किलर: बलौदाबाजार के खर्वे गांव में 4 महीने में 8 लोगों को जहर देकर उतारा मौत के घाट, अंतिम संस्कार में भी होता था शामिल

इंसानों को मारने से पहले आवारा कुत्ते पर किया था जहर का ट्रायल, प्रतिशोध और सनक में शराब में मिलाकर पिलाता था जानलेवा सुहागा, पुलिस ने साइको किलर रामसहाय जायसवाल को किया गिरफ्तार।







रायपुर, 30 जून 2026 : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की कानून व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झझोंर कर रख दिया है। जिले के एक बेहद शांत माने जाने वाले गांव पुराना खर्वे में बीते चार महीनों के भीतर जो कुछ भी घटित हुआ, उसकी कल्पना मात्र से ही लोगों की रूह कांप जा रही है।

गांव की शांत गलियों में पिछले चार महीनों के दौरान एक-एक कर आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआत में ग्रामीण इन मौतों को सामान्य या बीमारी से होने वाली मौतें मान रहे थे, लेकिन जब मौतों का सिलसिला थमा नहीं और यह एक गहरे रहस्य में बदल गया, तब स्थानीय पुलिस ने मामले की सघन जांच शुरू की। पुलिस की इस परत-दर-परत जांच में जो खौफनाक सच्चाई निकलकर सामने आई, उसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया।

पुलिस ने गांव के ही एक 46 वर्षीय अधेड़ रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार किया है, जो असल में एक बेहद शातिर और साइको सीरियल किलर निकला। आरोपी ने अपने भीतर सुलग रही प्रतिशोध और सनक की आग में जलकर अपने ही परिचित ग्रामीणों को एक-एक कर बेहद खौफनाक तरीके से मौत की नींद सुला दिया था।

मासूम जानवरों पर किया था मौत के रासायनिक फार्मूले का परीक्षण कुत्ते पर प्रयोग सफल होने के बाद इंसानों को बनाया निशाना

बलौदाबाजार जिला पुलिस मुख्यालय और कसडोल थाना प्रभारी से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार आरोपी रामसहाय जायसवाल की दरिंदगी और क्रूर मानसिकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह सीधे इंसानों पर हमला करने से कतरा रहा था। अपने खौफनाक इरादों को अमलीजामा पहनाने और जहर की मारक क्षमता को जांचने के लिए उसने सबसे पहले गांव के ही एक लावारिस आवारा कुत्ते को अपना शिकार बनाया। उसने अत्यधिक घातक और जहरीले सुहागा पाउडर का मिश्रण तैयार किया और उसे भोजन में मिलाकर उस बेजुबान कुत्ते को खिला दिया।

जहर खाने के कुछ ही समय बाद जब उस कुत्ते की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, तो आरोपी को अपने रासायनिक प्रयोग की सफलता पर पूरा भरोसा हो गया। इसके बाद उसने तय किया कि वह इस अचूक जहर के जरिए उन सभी लोगों को रास्ते से हटा देगा, जिनसे उसकी छोटी-मोटी रंजिश थी या जिन पर उसे गुस्सा आता था। कुत्ते की मौत के ठीक बाद 6 फरवरी को उसने इस खौफनाक सिलसिले की पहली इंसानी हत्या को अंजाम दिया और फिर एक के बाद एक मौत का तांडव शुरू कर दिया।

शराब में मिलाकर पिलाता था जानलेवा सुहागा पाउडर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने के कारण की सामूहिक हत्याएं

पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी रामसहाय जायसवाल ने जो खुलासे किए हैं, वे किसी हॉरर फिल्म की पटकथा जैसे प्रतीत होते हैं। आरोपी ने बताया कि उसे मानसिक रूप से एक बीमारी थी कि उसे बहुत छोटी-छोटी और आम व्यावहारिक बातों पर भी अत्यधिक तीव्र गुस्सा आ जाता था। किसी ग्रामीण द्वारा मजाक उड़ाने, बात न मानने या राह चलते टोक देने जैसी मामूली बातों को भी वह अपने स्वाभिमान पर चोट मान लेता था और मन ही मन उनसे बदला लेने की योजना बनाने लगता था।

प्रतिशोध की इसी सनक में उसने गांव के ही एक अन्य व्यक्ति से चोरी-छिपे भारी मात्रा में सुहागा जहर की व्यवस्था की। इसके बाद उसकी कार्यप्रणाली बेहद शातिर होती थी। वह लक्षित किए गए ग्रामीण को अपने साथ बैठकर शराब पीने का न्योता देता था या फिर दोस्ती का नाटक कर उन्हें मुफ्त में शराब उपलब्ध कराता था। जैसे ही सामने वाला व्यक्ति बातों में उलझता, रामसहाय चुपके से उस अत्यधिक मारक सुहागा पाउडर को शराब के गिलास में मिला देता था। शराब के नशे में डूबे ग्रामीणों को जहर के स्वाद का पता नहीं चलता था और वे उसे पूरी तरह गटक जाते थे।

लाशें उठाने में करता था मदद और अंतिम संस्कार में बहाता था आंसू दोहरा चरित्र अपनाकर महीनों तक पुलिस और समाज को दिया धोखा

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे खौफनाक और विचलित करने वाला पहलू यह था कि रामसहाय जायसवाल केवल हत्या करके भाग नहीं जाता था, बल्कि वह एक अत्यंत संवेदनशील पड़ोसी का मुखौटा ओढ़ लेता था। जहर देने के कुछ घंटों बाद जब पीड़ितों के शरीर में आंतरिक अंगों के फेल होने के कारण तड़प शुरू होती और उनकी तबीयत बिगड़ने लगती, तो रामसहाय सबसे पहले उनके घर पहुंचता था। वह खुद पीड़ितों को अपनी गाड़ी या स्थानीय साधनों से अस्पताल ले जाने में उनके परिजनों की बढ़-चढ़कर मदद करता था ताकि किसी को भी उस पर रत्ती भर भी शक न हो।

इतना ही नहीं, जब डॉक्टर पीड़ितों को मृत घोषित कर देते थे, तो रामसहाय मृतकों के घर पर मातम मनाने वाले लोगों में सबसे आगे खड़ा रहता था। वह शव को मर्चुरी से लाने, अर्थी को कंधा देने और श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की तमाम लकड़ियां व सामग्री जुटाने में सक्रिय भूमिका निभाता था। अंतिम संस्कार के समय वह परिजनों के साथ बैठकर मगरमच्छ के आंसू बहाता था और इस तरह पूरे गांव का भरोसा जीतता रहता था। उसके इस दोहरे और शातिर चरित्र के कारण ही गांव वाले लंबे समय तक यह समझ ही नहीं पाए कि उनके बीच ही एक आदमखोर भेड़िया छिपा बैठा है।

नौवें शिकार के जिंदा बच जाने से खुला मौत का राज एक पीड़ित के बयान ने ढहा दिया साइको किलर का साम्राज्य

पुलिस के अनुसार रामसहाय ने कुल नौ लोगों को इसी तरह से जहर देकर मारने का पूरा प्रयास किया था। इनमें से आठ लोगों की आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के काम बंद कर देने की वजह से समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई। लेकिन जब उसने अपने नौवें शिकार पर यही तरीका आजमाया, तो किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया। नौवें पीड़ित व्यक्ति को शराब में जहर देने के बाद उसकी हालत भी बेहद गंभीर हो गई थी, लेकिन परिजनों की मुस्तैदी के कारण उसे तत्काल रायपुर के एक बड़े अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की भारी मशक्कत के बाद उसकी जान बच गई।

होश में आने के बाद जब पुलिस और डॉक्टरों ने उस पीड़ित व्यक्ति का बयान दर्ज किया, तो उसने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। पीड़ित ने बताया कि बीमार पड़ने से ठीक पहले उसने रामसहाय जायसवाल के साथ बैठकर शराब पी थी और रामसहाय ने ही उसे जबरन एक खास गिलास से शराब पिलाई थी, जिसका स्वाद काफी अजीब और कड़वा था। इस एकलौते और बेहद पुख्ता सुराग के मिलते ही कसडोल पुलिस के कान खड़े हो गए। पुलिस ने बिना देर किए संदिग्ध रामसहाय को हिरासत में लिया और जब कड़ाई से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की, तो उसने एक के बाद एक सभी आठों हत्याओं का जुर्म कबूल कर लिया।

गांव में दहशत के बाद अब पसरा सन्नाटा, पुलिस जुटा रही फोरेंसिक साक्ष्य कलेक्टर और एसपी ने दिए सभी मौतों की फाइलों को दोबारा खोलने के निर्देश

इस सामूहिक हत्याकांड के आधिकारिक खुलासे के बाद पुराना खर्वे गांव के लोग गहरे सदमे और दहशत में हैं। जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया था, वे अब यह सोचकर सिहर उठते हैं कि उनकी मौत पर आंसू बहाने वाला और उनकी अर्थी को कंधा देने वाला व्यक्ति ही असल में उनका हत्यारा था। गांव में स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

बलौदाबाजार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कसडोल थाना पुलिस और राज्य फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को तत्काल पुराना खर्वे गांव का दौरा करने और आरोपी के घर से बचे हुए जहर, सुहागा पाउडर के पैकेट और संबंधित बर्तनों को जब्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, पिछले चार महीनों में जिन आठ लोगों की मौत हुई थी, उनके विसरा रिपोर्ट को दोबारा री-चेक करने और दफन किए गए शवों की आवश्यकता पड़ने पर कब्र खोदकर फॉरेंसिक जांच कराने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। पुलिस इस मामले में एक बेहद मजबूत चार्जशीट तैयार कर रही है ताकि इस क्रूर साइको किलर को अदालत से फांसी की सजा दिलाई जा सके।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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