धनतेरस पर सोने में मामूली गिरावट के बाद भी नहीं लौटी पुरानी चमक, ऐतिहासिक तेजी से महंगे आभूषणों से दूर रहे ग्राहक
धनतेरस पर सोने-चांदी के भाव में मामूली गिरावट के बावजूद पिछले साल की तुलना में भारी कीमतों के चलते ग्राहकों ने सोने के बजाय बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल ज्वेलरी को प्राथमिकता दी।

रायपुर, 06 नवंबर 2026, न्यूज डेस्क। धनतेरस के मौके पर शुक्रवार को सर्राफा बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में दैनिक स्तर पर नरमी दर्ज की गई, मगर इस मामूली गिरावट से आम खरीदारों की जेब को कोई वास्तविक राहत नहीं मिल सकी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दिसंबर अनुबंध वाले सोने के भाव में करीब दो हजार आठ सौ रुपये की गिरावट आई और यह टूटकर 1,41,231 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया। बिकवाली का रुख बना रहा। वायदा कारोबार में दर्ज हुई इस दैनिक नरमी के बावजूद भौतिक बाजारों में सोने-चांदी की वास्तविक खरीदारी में वह पुराना उत्साह नदारद दिखा जो पारंपरिक तौर पर धनतेरस के दिन देखने को मिलता रहा है। ऊंची कीमतों ने खरीदारों के पैर खींच लिए। हाजिर मंडियों में पहुंचे अधिकांश उपभोक्ता भारी जेवरों की दुकानों के बजाय अन्य जरूरी घरेलू वस्तुओं के काउंटरों की ओर मुड़ते नजर आए।
बाजार में आई इस गिरावट की हकीकत को समझने के लिए पिछले वर्षों की दरों पर नजर डालना जरूरी है। पिछले साल धनतेरस के समय 24 कैरेट सोना लगभग अस्सी से पचासी हजार रुपये प्रति दस ग्राम के दायरे में बिक रहा था, जबकि इस वर्ष 24 कैरेट शुद्ध सोने की हाजिर दर 14,776 रुपये प्रति ग्राम यानी 1,47,760 रुपये प्रति दस ग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। आभूषणों में प्रयुक्त होने वाला 22 कैरेट सोना भी 13,544 रुपये प्रति ग्राम पर चल रहा है। एक साल के भीतर कीमतों में लगभग साठ से सत्तर प्रतिशत का भारी उछाल आया है। ऐसे अभूतपूर्व स्तर पर खड़ी कीमतों के सामने दिनभर में दो-तीन हजार रुपये की मामूली गिरावट आम मध्यवर्गीय परिवार के लिए कोई मायने नहीं रखती। चांदी के तेवर भी बेहद तीखे बने रहे। महानगरों में दो लाख रुपये प्रति किलो और स्थानीय स्तर पर 1,95,700 रुपये प्रति किलो बिक रही चांदी ने सामान्य परिवारों को भारी बर्तन या सिल्लियां खरीदने से पूरी तरह दूर कर दिया।
बजट बिगड़ने का सीधा असर ग्राहकों की प्राथमिकताओं पर साफ दिखाई दिया। भारी-भरकम सोने के हार, कंगन और पारंपरिक आभूषणों की बिक्री इस बार ठंडी पड़ी रही। ग्राहकों ने अपना रुख बदल लिया। अधिकांश परिवारों ने धनतेरस पर केवल शगुन निभाने की औपचारिकता पूरी की और आधा ग्राम से एक ग्राम तक के हल्के सोने के सिक्के या नोजपिन खरीदकर ही संतोष कर लिया। पारंपरिक जेवरों के स्थान पर महिलाओं ने आकर्षक डिजाइन वाली आर्टिफिशियल और सेमी-प्रीशियस ज्वेलरी को पहली पसंद बनाया, जो बेहद कम खर्च में शानदार रूप दे रही हैं। इसी तरह पारंपरिक पीतल, तांबे और स्टील के बर्तनों के बाजार में ग्राहकों की भरपूर भीड़ उमड़ी। घरेलू उपयोग के बर्तनों की जमकर खरीदारी हुई। गृहणियों ने सोने के भारी आभूषणों में पूंजी फंसाने के बजाय रसोई के उपयोगी बर्तनों, माइक्रोवेव, स्मार्ट टीवी, रेफ्रिजरेटर और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को प्राथमिकता दी, जहां आकर्षक त्यौहारी छूट और आसान किस्तों की सुविधा उपलब्ध थी।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय समीकरणों और कमोडिटी बाजारों के दबाव ने भी धातु की कीमतों में दिनभर हलचल बनाए रखी। वैश्विक बाजार में हाजिर सोना फिसलकर 4,070.59 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, क्योंकि कच्चे तेल में आई तेजी ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। तेल का दबाव स्पष्ट था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बरती जा रही सख्ती के कारण संस्थागत निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों से मुनाफा निकालने को तरजीह दी। इसी कारण घरेलू शेयर बाजारों में गोल्ड ईटीएफ योजनाओं में दो से तीन प्रतिशत तक की बिकवाली देखने को मिली। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स यानी ईजीआर में पहली बार 1.81 लाख यूनिट्स का कारोबार दर्ज हुआ। संस्थागत निवेशक भौतिक आभूषण खरीदने के बजाय डिजिटल या वित्तीय विकल्पों में सीमित निवेश करते रहे।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सदर बाजार, मालवीय रोड और गोलबाजार के सर्राफा प्रतिष्ठानों में शाम के समय लोगों की आवाजाही जरूर रही, लेकिन अधिकांश दुकानों पर सन्नाटे जैसी स्थिति बनी रही। सर्राफा संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या में कमी नहीं थी, परंतु खरीदारी का कुल वजन बहुत घट गया। जहां पहले लोग तोले के हिसाब से जेवर बनवाते थे, वहीं अब मिलीग्राम और ग्राम में सिक्के खरीदे जा रहे हैं। इसके विपरीत इलेक्ट्रॉनिक शोरूमों और ऑटोमोबाइल डीलरों के यहां वाहनों की डिलीवरी लेने वालों की लंबी कतारें लगी रहीं। शाम ढलने के बाद अब रात करीब पौने नौ बजे भी बाजारों में खरीदारी का क्रम धीरे-धीरे जारी है और परिवार अपनी क्षमता के अनुसार जरूरी घरेलू सामान समेटने में व्यस्त हैं। व्यापारी वर्ग का मानना है कि इस बार धनतेरस का अधिकांश नकदी प्रवाह गैर-सर्राफा क्षेत्रों की तरफ स्थानांतरित हो गया है।
धनतेरस के इस कारोबारी सत्र की समाप्ति के बाद अब व्यापारियों और विश्लेषकों का ध्यान शनिवार को आने वाले ताजा हाजिर भावों तथा आगामी विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र पर टिक गया है। सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में और अधिक स्थिरता आती है, तो आने वाले वैवाहिक सीजन में आभूषणों की मांग में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। शनिवार सुबह दस बजे जारी होने वाले नए मूल्य बुलेटिन के साथ बाजार की वास्तविक दिशा साफ होगी।


