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सांसद बृजमोहन बनाम IAS अमित कटारिया विवाद में पूर्व MP जयश्री बनर्जी की एंट्री: 108 एंबुलेंस टेंडर में धांधली का आरोप लगा लोकसभा स्पीकर से की निष्पक्ष जांच की मांग

सांसद बृजमोहन-IAS अमित कटारिया विवाद में पूर्व MP जयश्री बनर्जी की एंट्री। 108 एंबुलेंस टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगा लोकसभा अध्यक्ष से निष्पक्ष जांच की मांग की।





9 August 2026 | Raipur: छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और राज्य के स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया के बीच चल रहा तीखा विवाद अब नए मुकाम पर पहुंच गया है। इस हाई-प्रोफाइल लड़ाई में मध्य प्रदेश की पूर्व सांसद और पूर्व कैबिनेट मंत्री जयश्री बनर्जी की एंट्री हो गई है। जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा पत्र लिखकर आईएएस अमित कटारिया के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है।

जयश्री बनर्जी द्वारा सीधे लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजे जाने के बाद इस पूरे मामले ने नया तूल पकड़ लिया है। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अगर जांच के दौरान संबंधित अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध नियम अनुसार सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। इस नए घटनाक्रम ने राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है।

यह पूरा विवाद तब भड़का था जब रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया पर सांसद विशेषाधिकार हनन और अमर्यादित व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया था। सांसद का दावा था कि जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण पत्रों का जवाब न मिलने पर जब उन्होंने स्वास्थ्य सचिव से सीधी बात की, तो आईएएस अधिकारी ने कथित तौर पर ‘जो करना है कर लो’ कहते हुए बदसलूकी की थी।

बृजमोहन अग्रवाल ने इस घटना के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत सौंपकर अपने विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने छत्तीसगढ़ शासन और संबंधित स्वास्थ्य मंत्रालय से पूरे घटनाक्रम पर तथ्यात्मक जानकारी (फैक्चुअल नोट) तलब की है। फिलहाल यह मामला लोकसभा सचिवालय के विचाराधीन है।

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इसी बीच, पूर्व सांसद जयश्री बनर्जी ने 5 अगस्त 2026 को प्रेषित अपने पत्र में इस मुद्दे को सिर्फ दो व्यक्तियों की आपसी खींचतान न मानते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ दिया है। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए उन्हें रायपुर सांसद द्वारा की गई शिकायत का पता चला, जिससे वे बेहद चिंतित हैं।

जयश्री बनर्जी ने अपने पत्र में आईएएस अमित कटारिया के स्वास्थ्य विभाग में कार्यकाल के दौरान 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा से संबंधित टेंडर प्रक्रिया का भी विशेष रूप से जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 108 एंबुलेंस सेवा के टेंडर आवंटन में नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई और भारी अनियमितताएं बरती गईं।

पूर्व सांसद का कहना है कि 108 एंबुलेंस सेवा सीधे-सीधे राज्य की आम जनता और ग्रामीण इलाकों के मरीजों की जीवन रक्षा से जुड़ी हुई संवेदनशील सेवा है। ऐसी अति-आवश्यक जनसेवा के करोड़ों रुपए के टेंडर आवंटन में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी बेहद गंभीर विषय है। इसलिए इस पूरे टेंडर आवंटन प्रक्रिया की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से निष्पक्ष पड़ताल कराई जानी चाहिए।

जयश्री बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से गुहार लगाई है कि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा दर्ज कराई गई विशेषाधिकार हनन की शिकायत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सुशासन की पहली शर्त है।

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गौरतलब है कि बृजमोहन अग्रवाल और अमित कटारिया के बीच तल्खी की शुरुआत 20 मई 2026 को हुई बताई जाती है। सांसद का आरोप था कि रायपुर संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों, अस्पतालों की बदहाली और जनहित से जुड़ी योजनाओं पर उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को कई रिमाइंडर भेजे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब फोन पर संपर्क किया गया, तो अधिकारी ने सहयोग करने के बजाय आक्रामक रवैया अपनाया।

इस मामले में सिर्फ बृजमोहन अग्रवाल ही अकेले नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी नौकरशाही के रवैये पर सवाल उठा चुके हैं। हाल ही में दुर्ग के भाजपा सांसद विजय बघेल ने भी खुले तौर पर आरोप लगाया था कि कई नगर निगमों और विभागों में बिना टेंडर जारी किए मनमाने तरीके से काम करवाए जा रहे हैं और पूछने पर आईएएस अफसर जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते।

सांसद बनाम नौकरशाही की इस जंग पर राज्य की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे बेहद गंभीर मामला करार देते हुए कहा था कि जब सत्ताधारी दल के इतने वरिष्ठ और कद्दावर सांसद की बात अफसर नहीं सुन रहे हैं, तो आम जनता की सुनवाई का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

जयश्री बनर्जी के पत्र के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के 108 एंबुलेंस टेंडर का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। इस टेंडर में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और शर्तों के उल्लंघन की शिकायतों की फाइलें फिर से खंगाली जा सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग के भीतर भी इस पत्र के बाद से खलबली मची हुई है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयश्री बनर्जी के कूदने से बृजमोहन अग्रवाल का पलड़ा भारी हुआ है और दिल्ली के राजनीतिक हलकों में इस मामले की गूंज और तेज हो गई है। पूर्व सांसद के इस कदम को भाजपा के भीतर ही जनप्रतिनिधियों के सम्मान की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

अब सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले कदम और राज्य सरकार द्वारा भेजे जाने वाले तथ्यात्मक जवाब पर टिकी हैं। अगर लोकसभा सचिवालय इस मामले में विशेषाधिकार समिति को जांच सौंपता है या टेंडर प्रक्रिया की अलग से जांच के आदेश देता है, तो आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

संसदीय परंपराओं के जानकारों का कहना है कि किसी वरिष्ठ सांसद के साथ किसी नौकरशाह द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार करना और पत्र का जवाब न देना सीधे तौर पर संसद के विशेषाधिकार की अवहेलना के दायरे में आता है। ऐसे में यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषी अधिकारी को कड़ी फटकार या दंडात्मक कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

फिलहाल रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस विवाद की आंच महसूस की जा रही है। एक तरफ जहां प्रशासनिक महकमा इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों का रुख इस बात को लेकर बेहद सख्त नजर आ रहा है कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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