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गड़े खजाने के लिए 21 बलियों का खौफनाक टारगेट: बलौदाबाजार के खर्वे गांव में 8 मौतों का सनसनीखेज अंधविश्वास कनेक्शन

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड स्थित खर्वे गांव में पिछले चार महीनों में हुई आठ लोगों की रहस्यमयी मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिसे ग्रामीण पहले दैवीय आपदा मानकर मां महामाया मंदिर में नंगे पांव मन्नत मांग रहे थे, वह पुलिस और फॉरेंसिक जांच में सामूहिक हत्याकांड की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश के रूप में सामने आ रहा है। कथित तौर पर गड़े खजाने को पाने और तांत्रिक अनुष्ठान के तहत 21 लोगों की बलि देने के खौफनाक अंधविश्वास के चलते एक स्थानीय दुकानदार द्वारा शराब में जहर मिलाकर इन हत्याओं को अंजाम देने का सनसनीखेज आरोप लगा है।







रायपुर, 23 जून 2026: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खर्वे में अंधविश्वास, गड़े खजाने के लालच और सामूहिक हत्याकांड की एक ऐसी खौफनाक गाथा सामने आई है, जिसने किसी हॉलीवुड सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की कहानी को भी पीछे छोड़ दिया है।

फरवरी 2026 से लेकर मई 2026 के बीच इस शांत और सात्विक कबीरपंथी गांव में एक के बाद एक आठ लोगों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ग्रामीण शुरू में इसे कोई दैवीय प्रकोप मानकर डरे हुए थे, लेकिन अब जो पुलिसिया जांच और ग्रामीणों के बयानों से सच छनकर बाहर आ रहा है, उसने प्रशासनिक अमले और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं।

तांत्रिक का झांसा और 21 इंसानों की बलि का टारगेट

जांच रिपोर्ट और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खौफनाक घटनाक्रम के पीछे गांव का ही एक स्थानीय दुकानदार (रामसाय) बताया जा रहा है, जो गड़े खजाने को हासिल करने के लालच में अंधा हो चुका था।

आरोपी को किसी तांत्रिक ने झांसा दिया था कि महानदी के किनारे जमीन के नीचे सोने के सिक्कों से भरा एक विशाल घड़ा दबा हुआ है। तांत्रिक ने शर्त रखी थी कि यह अकूत धन संपदा तभी हासिल होगी जब इसके लिए 21 इंसानों की नरबलि दी जाएगी।

इसी खौफनाक अंधविश्वास और लालच के वशीभूत होकर आरोपी ने गांव के ही सीधे-साधे लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू किया। उसका टारगेट 21 लोगों को मौत के घाट उतारने का था, जिसमें से वह पिछले चार महीनों में आठ लोगों की जान ले चुका था। यानी उसका खौफनाक मंसूबा अभी 13 और लोगों की बलि चढ़ाने का था, जिससे पहले ही ग्रामीणों की सजगता से यह राज खुल गया।

शराब में जहर (सुहागा) मिलाकर मर्डर करने का सनसनीखेज तरीका

ग्रामीणों द्वारा कसडोल थाने में दिए गए आवेदनों और पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी बेहद शातिराना तरीके से इन हत्याओं को अंजाम दे रहा था। वह अपनी दुकान पर आने वाले ग्रामीणों को शराब में कथित तौर पर सुहागा या कोई अन्य तीव्र जहरीला पदार्थ मिलाकर पिला देता था।

घटना के एक अहम चश्मदीद और पीड़ित कार्तिक प्रजापति ने बताया कि 14 मई को उसे भी दुकानदार ने आधी खाली की हुई शराब की बोतल दी थी, जिसे पीते ही वह कुछ ही मिनटों में बेहोश हो गया। करीब आठ घंटे बाद अस्पताल में डॉक्टरों के अथक प्रयास से उसकी जान बच सकी।

इसी घटना के बाद ग्रामीणों का शक पूरी तरह यकीन में बदल गया। ग्रामीणों का कहना है कि मरने वाले सभी आठों लोग पूरी तरह स्वस्थ थे और दुकान के आसपास शराब पीने के महज 10 से 15 मिनट के भीतर ही उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।

कब्र से बाहर निकाले जा रहे शव, फॉरेंसिक जांच जारी

चूंकि खर्वे गांव में कबीरपंथी विचारधारा के लोग रहते हैं, इसलिए अधिकांश मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार करने के बजाय उन्हें महानदी के किनारे दफनाया गया था। लगातार हो रही मौतों और जहर दिए जाने के पुख्ता शक के बाद पुलिस प्रशासन और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम तुरंत एक्शन में आई।

प्रभारी पुलिस अधिकारियों और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों की मदद से कब्रों को खोदकर अब तक सात शवों को बाहर निकाला जा चुका है।

इन सभी शवों को पोस्टमॉर्टम और टॉक्सिकोलॉजी (जहर की जांच) के लिए रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल भेजा गया है। डॉक्टरों की विशेष टीम विसरा नमूनों का रासायनिक परीक्षण कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों और जहर के प्रकार का वैज्ञानिक खुलासा हो सके।

20 फरवरी से शुरू हुआ था मौतों का खौफनाक सिलसिला

खर्वे गांव में मौतों का यह भयावह सिलसिला इस साल 20 फरवरी से शुरू हुआ था, जो मई के मध्य तक लगातार जारी रहा। इन चार महीनों के भीतर काल के गाल में समाने वाले ग्रामीणों की सूची इस प्रकार है:

  • बद्री प्रसाद पटेल – 6 फरवरी 2026
  • बुटालुराम साहू – 20 फरवरी 2026
  • छत्तूराम साहू – 2 मार्च 2026
  • बुधराम जायसवाल – 13 मार्च 2026 (इनका दाह संस्कार किया गया था)
  • विनोद साहू – 31 मार्च 2026
  • गजानंद मांझी – 20 अप्रैल 2026
  • चैतुराम साहू – 29 अप्रैल 2026
  • महेतरु साहू – 14 मई 2026

बलौदाबाजार के पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय इस संवेदनशील मामले की हर एंगल से बारीकी से तफ्तीश कर रहे हैं।

पुलिस ने मुख्य संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, साथ ही उस अज्ञात तांत्रिक की भी तलाश की जा रही है जिसने इस पूरी सामूहिक हत्या की स्क्रिप्ट तैयार की थी। ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की मांग की है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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