नगर निगम और रसूखदारों का ‘खेल’: संजय जैन की जमीन पर अवैध कब्जा, महापौर की ‘नो कमेंट्स’ नीति और जोन 7 का सीमांकन का बहाना
खसरा नंबर 772/10-11 पर बिना अनुज्ञा निर्माण: निगम की मेहरबानी या रसूख का दबाव? जवाब देने से बच रहीं महापौर मीनल चौबे


शिकायत के बाद दिखावे का ‘स्टे’, लेकिन बुलडोजर चलाने के नाम पर फाइलें सरका रहे अधिकारी,सब इंजीनियर बोलीं- कमिश्नर आदेश दें तो गिराएं, कमिश्नर बोले-सीमांकन का इंतजार

रायपुर । शहर में नगर निगम प्रशासन और रसूखदारों की मिलीभगत का एक और बड़ा खेल सामने आया है। मामला जोन क्रमांक 7 के अंतर्गत आने वाली एक बेशकीमती जमीन का है, जो कि पीड़ित संजय जैन के नाम पर दर्ज है (भूमि खसरा नंबर 772/10 और 772/11)। इस निजी जमीन पर एक रसूखदार ने नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि जब इस अवैध निर्माण की शिकायतें हुईं, तो हफ्तों तक अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए रहे। आखिरकार जब पत्रकारों ने लगातार निगम मुख्यालय और जोन 7 कार्यालय पहुंच कर सवाल दागे, तब जाकर प्रशासन ने दिखावे के लिए काम पर ‘स्टे’ (काम रोकने का आदेश) तो लगा दिया, लेकिन असल सवालात अब भी जस के तस हैं।
इस पूरे मामले में जब नगर निगम की प्रथम नागरिक और महापौर मीनल चौबे से सीधे सवाल किए गए, तो हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। महापौर का रटा-रटाया जवाब था कि इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है, आप जोन 7 कार्यालय जाकर पता करें। सवाल यह उठता है कि शहर के भीतर इतने बड़े पैमाने पर भू-माफिया और रसूखदार हावी हैं, निजी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं, और निगम की मुखिया को इसकी भनक तक नहीं है? या फिर जानबूझकर अनजान बनने का ढोंग किया जा रहा है?
महापौर के निर्देश के बाद जब मीडिया की टीम जोन 7 कार्यालय पहुंची, तो वहां का नजारा और भी चौंकाने वाला था। जोन आयुक्त अनिल ध्रुव ऑफ़िस में नहीं थे ।उनकी अनुपस्थिति में मौजूद सब इंजीनियर प्रेरणा अग्रवाल से जब सवाल किए गए, तो उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया।
सब इंजीनियर प्रेरणा अग्रवाल का आधिकारिक बयान यह है कि संजय जैन की जमीन (खसरा नंबर 772/10, 772/11) पर जिस रसूखदार द्वारा निर्माण किया जा रहा है, उसे नगर निगम द्वारा कोई भी ‘भवन निर्माण अनुज्ञा’ (Building Permission) जारी नहीं की गई है।
जब पत्रकारों ने अगला तार्किक सवाल दागा कि यदि निर्माण पूरी तरह अवैध है और कोई अनुमति नहीं है, तो उस पर अब तक निगम का बुलडोजर क्यों नहीं चला? इस पर सब इंजीनियर ने गेंद आला अधिकारियों के पाले में डालते हुए कहा कि यदि जोन 7 आयुक्त द्वारा लिखित में आदेश दिया जाएगा, तो हम तत्काल बुलडोजर की कार्रवाई कर देंगे।
जब इस संबंध में जोन 7 आयुक्त अनिल ध्रुव से फोन के माध्यम से बात हुई तो उन्होंने मामले को ठंडे बस्ते में डालने वाला एक और बहाना सामने रख दिया। उनका कहना है कि पहले जमीन का सीमांकन (Demarcation) हो जाने दीजिए, उसके बाद ही हम कुछ कर सकते हैं।
निगम के नियमों के मुताबिक, किसी भी विवादित संपत्ति या बिना नक्शा पास कराए किए जा रहे निर्माण पर तत्काल ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन यहाँ पीड़ित संजय जैन महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, परेशान हो रहे हैं, और अधिकारी ‘सीमांकन’ का खेल खेल रहे हैं। यह लेत-लतीफी साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे रसूखदार और निगम अधिकारियों के बीच गहरी मिलीभगत है।
आज पूरा शहर इस बात का गवाह है कि नगर निगम का दस्ता किसी गरीब की दुकान, ठेले या आम जनता के छोटे-मोटे अवैध निर्माण पर बिना एक मिनट गंवाए बुलडोजर चला देता है। लेकिन जब बात किसी रसूखदार की आती है, तो निगम के कानून पंगु हो जाते हैं। शहर में कई जगहों पर बिना अनुमति या स्वीकृत नक्शे के विपरीत धड़ल्ले से बहुमंजिला अवैध निर्माण खड़े हो रहे हैं, जिन पर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है।
अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद भी निगम प्रशासन सीमांकन के बहाने रसूखदार को संरक्षण देना जारी रखता है, या पीड़ित संजय जैन को न्याय देते हुए उस अवैध निर्माण पर कानून का बुलडोजर चलाता है।
निगम प्रशासन और महापौर से जनता के 3 सीधे सवाल:
सवाल नंबर 1: महापौर मीनल चौबे जब यह प्रमाणित हो चुका है कि संजय जैन की भूमि (खसरा नंबर 772/10, 772/11) पर किए गए निर्माण को निगम ने कोई ‘भवन निर्माण अनुज्ञा’ जारी नहीं की थी, तो उस अवैध ढांचे को अब तक जमींदोज क्यों नहीं किया गया? किसके दबाव में कार्रवाई रुकी है?
सवाल नंबर 2: नगर निगम के कड़े नियमों के मुताबिक विवादित संपत्तियों और बिना अनुमति के निर्माण पर तुरंत कार्रवाई का नियम है, फिर आपके कार्यकाल में रसूखदारों को इस तरह की ढील क्यों दी जा रही है? क्या अधिकारियों पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है?
सवाल नंबर 3: शहर की आम जनता यह जानना चाहती है कि क्या निगम का बुलडोजर और कानून सिर्फ गरीब तबके के लोगों को उजाड़ने के लिए है? क्या इस मामले में रसूखदार के अवैध निर्माण पर भी वैसी ही निष्पक्ष और कठोर बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिलेगी, या मामला फाइलों में ही दफन हो जाएगा?



