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रायपुर जिले में विधायक निधि के विकास कार्यों की रफ्तार असंतुलित: 46 प्रतिशत काम अधूरे, आधी राशि भुगतान के बाद भी जनता को बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

सातों विधानसभाओं के विकास कार्यों की समीक्षा रिपोर्ट आई सामने, आरंग में परियोजनाओं को पूरा करने की गति सबसे तेज, दक्षिण-उत्तर और पश्चिम क्षेत्रों में धीमी प्रगति पर उठे सवाल।







रायपुर, 24 जून 2026 : छत्तीसगढ़ की राजधानी और रायपुर जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में विधायक विकास निधि (एमएलए फंड) के तहत स्वीकृत जनहित के कार्यों में भारी असंतुलन और विसंगति देखने को मिल रही है। हाल ही में जारी प्रशासनिक और वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि जिलेभर में कुल स्वीकृत विकास कार्यों में से लगभग 46 प्रतिशत कार्य आज भी अधूरे हैं।

वहीं, करीब 29 प्रतिशत विकास कार्य ऐसे हैं जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं या तकनीकी कारणों से धरातल पर शुरू भी नहीं हो सके हैं। सबसे विचारणीय विषय यह है कि निर्माण एजेंसियों की कछुआ चाल के बावजूद उन्हें कुल स्वीकृत बजट का 50 प्रतिशत से अधिक का वित्तीय भुगतान किया जा चुका है।

तुलनात्मक आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, आरंग विधानसभा क्षेत्र विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और धरातल पर उतारने में जिले की अन्य सभी सीटों से काफी आगे चल रहा है। इसके विपरीत, रायपुर दक्षिण, रायपुर उत्तर और रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार काफी धीमी पाई गई है, जिसके चलते बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स समय सीमा से पीछे चल रहे हैं।

सातों विधानसभाओं का जमीनी और तकनीकी रिपोर्ट कार्ड

रायपुर जिले की सभी सात सीटों के लिए तय की गई विधायक विकास निधि के कार्यान्वयन और प्रगति की स्थिति इस प्रकार है:

  • आरंग विधानसभा में सबसे तेज प्रगति: इस क्षेत्र में कुल 50 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 23 कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। यहां केवल 19 कार्य अधूरे हैं और 8 कार्य प्रारंभ होने शेष हैं। बेहतर प्रगति के चलते निर्माण एजेंसियों को कुल 2.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
  • रायपुर दक्षिण में सर्वाधिक प्रोजेक्ट लंबित: इस क्षेत्र में बुनियादी आवश्यकताओं को देखते हुए सबसे अधिक 143 छोटे-बड़े कार्य स्वीकृत किए गए थे, परंतु तकनीकी और व्यावहारिक बाधाओं के कारण इनमें से केवल 9 कार्य ही पूरे हो पाए हैं और 140 कार्य अब भी प्रक्रियाधीन हैं। यहां 3.96 करोड़ रुपये के कुल बजट में से 1.98 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया जा चुका है।
  • रायपुर उत्तर व पश्चिम में सुस्त रफ्तार: रायपुर उत्तर क्षेत्र में कुल 59 कार्यों में से केवल 6 पूर्ण हुए हैं, जबकि 43 कार्य अधर में लटके हैं। वहीं रायपुर पश्चिम में बुनियादी अधोसंरचना के 47 स्वीकृत कार्यों में से केवल 2 कार्य ही पूरे किए जा सके हैं और 28 कार्यों को शुरू किया जाना अभी बाकी है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों की मिली-जुली स्थिति: रायपुर ग्रामीण में स्वीकृत 45 कार्यों में से 5 पूर्ण और 32 अधूरे हैं। अभनपुर में 79 कार्यों में केवल 12 पूरे हुए हैं, जबकि धरसींवा में 49 कार्यों में से 17 पूरे हो चुके हैं।

विधानसभावार स्वीकृत कार्यों एवं वित्तीय प्रगति का पूरा विवरण

रायपुर जिले की सातों विधानसभा सीटों के भौतिक सत्यापन और वित्तीय प्रगति का आधिकारिक डेटा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:

विधानसभा क्षेत्रकुल स्वीकृत कार्यपूर्ण कार्यअपूर्ण कार्यअप्रारंभ कार्यकुल स्वीकृत राशिकुल वित्तीय भुगतान
आरंग50231983.96 करोड़2.94 करोड़
धरसींवा491717153.96 करोड़1.98 करोड़
अभनपुर79129583.96 करोड़1.98 करोड़
रायपुर दक्षिण1439122123.96 करोड़1.98 करोड़
रायपुर उत्तर59643103.96 करोड़1.98 करोड़
रायपुर ग्रामीण4553283.95 करोड़1.96 करोड़
रायपुर पश्चिम47217283.96 करोड़1.98 करोड़

मजबूत मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता

विकास कार्यों की इस सुस्त गति के कारण रायपुर शहर और उससे लगे ग्रामीण इलाकों की स्थानीय जनता को सड़क, सामुदायिक भवन, पेयजल व्यवस्था और नालियों के निर्माण जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि जब निर्माण एजेंसियों को 50 प्रतिशत से अधिक की राशि पहले ही एडवांस के रूप में मिल चुकी है, तो कार्य स्थल पर काम की प्रगति भी उसी अनुपात में दिखनी चाहिए थी।

जानकारों के मुताबिक, निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली में ढील और प्रशासनिक स्तर पर जमीनी मॉनिटरिंग की कमी इसके लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है। अब समय आ गया है कि जिला प्रशासन इन लंबित परियोजनाओं की समय सीमा तय करे और सुस्त गति से काम करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि सरकारी धन का सही समय पर सदुपयोग हो सके और आम जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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