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छत्तीसगढ़ में अल-नीनो के खतरे के बीच सरकार अलर्ट: सूखे से निपटने के लिए राम विचार नेताम ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह को सौंपी छत्तीसगढ़ की ‘इमरजेंसी कृषि योजना’

मानसून में 58 फीसदी की भारी गिरावट के बाद प्रदेश के 15 जिले सूखा प्रभावित घोषित, धान के बदले दलहन-तिलहन और कम अवधि वाली फसलों के बीज बांटेगी राज्य सरकार।







रायपुर, 24 जून 2026 : वैश्विक मौसमी परिघटना अल-नीनो के चलते इस साल छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी पर सूखे का बड़ा संकट मंडरा रहा है। जून का महीना समाप्त होने को है, लेकिन प्रदेश में मानसूनी बारिश की भारी कमी देखी जा रही है। इस गंभीर और चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने तथा किसानों की फसलों को बर्बादी से बचाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार पूरी तरह मुस्तैद हो गई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा देश के अल-नीनो प्रभावित राज्यों की बुलाई गई उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने राज्य की तैयारियों और आकस्मिक कार्ययोजना (कंटिनजेंसी प्लान) का पूरा ब्यौरा पेश किया है।

कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार कमजोर मानसून की स्थिति में भी किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से जुटी है।

सूखे की मार को कम करने के लिए कम अवधि में पकने वाली फसलों, बीज सुरक्षा, दलहन-तिलहन के रकबे को बढ़ाने और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे को प्राथमिकता देते हुए एक व्यापक और त्रिस्तरीय रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है।

10 साल के औसत से 58% कम बारिश, खरीफ बोनी का लक्ष्य पिछड़ा

समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने राज्य के जमीनी आंकड़ों की चिंताजनक स्थिति को भी सामने रखा। नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक महज 30.8 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले दस वर्षों के इसी अवधि के औसत की तुलना में 58.3 प्रतिशत कम है। बारिश की इसी कंगाली का सीधा असर खरीफ सीजन की खेती पर पड़ा है।

छत्तीसगढ़ में इस साल खरीफ बोनी का कुल लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, लेकिन मानसून की दगाबाजी के कारण अब तक केवल दो प्रतिशत क्षेत्र में ही किसान बोनी का साहस जुटा पाए हैं। मिट्टी में नमी की कमी के कारण बीजों के अंकुरण पर विपरीत असर पड़ रहा है, जिससे पूरा फसल चक्र गड़बड़ाने की आशंका पैदा हो गई है।

कम अवधि वाली धान की फसलें और प्रमाणित बीजों की सप्लाई तेज

बैठक में मौजूद कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर के अनुसंधान विभाग के सहयोग से एक विशेष आकस्मिक योजना लागू की गई है।

इसके तहत पहाड़ी और उच्चहन (ऊंची) भूमि वाले क्षेत्रों में परंपरागत धान की जगह मक्का, कोदो, कुटकी, रागी जैसी कम पानी वाली फसलों के साथ-साथ दलहनी और तिलहनी फसलों को अंतरवर्तीय फसल (इंटर-क्रॉपिंग) के रूप में लगाने की तकनीकी सलाह दी जा रही है।

प्रशासन ने किसानों को खाद-बीज के नुकसान से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:

  • प्रमाणित बीजों का वितरण: राज्य बीज निगम ने इस संकट से निपटने के लिए कुल 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का बड़ा लक्ष्य तय किया है।
  • 15 जिलों में इमरजेंसी सप्लाई: सूखे की सबसे ज्यादा मार झेल रहे प्रदेश के 15 चिन्हित जिलों के लिए 1,22,095 क्विंटल विशेष आकस्मिक बीज स्टॉक उपलब्ध कराया गया है, जिसमें से 48,449 क्विंटल बीज सोसायटियों के माध्यम से सीधे किसानों के हाथों तक पहुंचाया जा चुका है।
  • बीमा कंपनियों को कड़े निर्देश: फसल नुकसान की त्वरित भरपाई के लिए कृषि विभाग ने बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है ताकि प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ बिना किसी प्रशासनिक देरी के मिल सके।

क्या है अल-नीनो और छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है यह बड़ी चुनौती

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अल-नीनो एक जटिल वैश्विक मौसमी परिघटना है जो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण पैदा होती है। इसका सीधा और सबसे घातक असर भारतीय उपमहाद्वीप के मानसून पर पड़ता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और देश के मध्य भागों में सूखे जैसे हालात बन जाते हैं।

चूंकि छत्तीसगढ़ की 80 प्रतिशत से अधिक कृषि सीधे तौर पर मानसूनी बारिश पर निर्भर है और यहां की मुख्य फसल धान (चावल) को अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए अल-नीनो यहां के ग्रामीण अर्थतंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

इसके असर से न केवल फसलों की पैदावार घटती है, बल्कि आने वाले समय में भूजल स्तर में भारी गिरावट और मवेशियों के लिए चारे का भीषण संकट भी खड़ा हो जाता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के इन कदमों की सराहना करते हुए केंद्र की ओर से हर संभव तकनीकी और बजटीय सहायता देने का भरोसा दिया है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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