कटघोरा वन मंडल में लोनर हाथी का तांडव: महुआ बीनने गई 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कुचला, मौके पर ही दर्दनाक मौत
केंदई वन परिक्षेत्र के पतुरियाडांड़ गांव में तड़के हुआ हमला, जटगा रेंज में 49 हाथियों का डेरा होने से दहशत, पिछले 6 महीनों में 9 ग्रामीणों ने गंवाई अपनी जान।

इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके और आस-पास के सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, जहां वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए मृतका के परिजनों को फौरी सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है।
तड़के जंगल में महुआ डोरी बीनते समय हुआ अचानक सामना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पतुरियाडांड़ गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला सुखमत बाई (70 वर्ष, पति लोडुराम) मंगलवार तड़के करीब पांच बजे हर दिन की तरह अपने घर के पास के जंगल की ओर गई थीं। इन दिनों मानसूनी मौसम की शुरुआत के साथ ही जंगलों में महुआ डोरी (महुआ का फल) और पुटू (जंगली मशरूम) के गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसे ग्रामीण तेल निकालने और अपनी आजीविका के लिए संग्रहित करते हैं।
सुखमत बाई अभी जंगल के भीतर डोरी बीन ही रही थीं कि अचानक उनका सामना घने पेड़ों के बीच से आए एक विशालकाय लोनर हाथी से हो गया। चश्मदीदों और वन विभाग के मैदानी अमले के अनुसार, विशालकाय वन्यजीव को इतनी नजदीक देखकर बुजुर्ग महिला घबरा गई और उसने अपनी जान बचाने के लिए विपरीत दिशा में भागने की पुरज़ोर कोशिश की।
लेकिन ढलती उम्र और पथरीले रास्तों के कारण वह सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच सकी। इससे पहले कि वह गांव की ओर दौड़ पाती, बेकाबू हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और सूंड से पटकने के बाद बेरहमी से कुचल दिया। अत्यधिक चोटें आने के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग ने दी तात्कालिक सहायता, ड्रोन से रखी जा रही नजर
जंगल की ओर गए अन्य ग्रामीणों ने जब महिला का क्षत-विक्षत शव देखा, तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग और ग्राम पंचायत को दी। इसके बाद वन परिक्षेत्राधिकारी अभिषेक दुबे के निर्देश पर वन अमला और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। विभाग ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जनपद सदस्य और ग्राम सरपंच की विशेष उपस्थिति में मृतका के शोक संतप्त परिजनों को 25,000 रुपये की तात्कालिक सहायता राशि नकद प्रदान की है।
अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि शासन के नियमों के तहत शेष मुआवजा राशि (5.75 लाख रुपये) के भुगतान की कागजी प्रक्रिया भी तुरंत प्रारंभ कर दी गई है।
वन परिक्षेत्राधिकारी अभिषेक दुबे ने बताया कि हमला करने वाला यह लोनर हाथी महज़ दो दिन पहले ही सरगुजा वन मंडल की सीमा को लांघकर केंदई क्षेत्र में प्रविष्ट हुआ है। हाथी की लगातार बदलती लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग की विशेष टीम ड्रोन कैमरों, ट्रैकिंग ऐप्स और मैदानी प्रहरियों की मदद ले रही है।
हालांकि, मानसूनी बारिश के कारण जंगल बेहद घना हो चुका है और रात्रिकालीन परिस्थितियों में घने कोहरे व अंधेरे के कारण हाथी की सटीक लोकेशन का पता लगाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। यही वजह है कि समय रहते ग्रामीणों तक अलर्ट और मुनादी संदेश पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जटगा रेंज में 49 हाथियों का डेरा, खेतों में बढ़ रहा है खतरा
एक तरफ जहां केंदई परिक्षेत्र में अकेले घूम रहे दंतैल हाथी ने इस वारदात को अंजाम दिया है, वहीं दूसरी तरफ कटघोरा वन मंडल के ही जटगा वन परिक्षेत्र के चेचहिया पहाड़ क्षेत्र में पिछले चार महीनों से 49 हाथियों का एक विशाल दल लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों के इतने बड़े कुनबे की स्थायी मौजूदगी ने वन विभाग के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
वर्तमान में खरीफ फसल की बुआई और खेतों की जुताई का मौसम शुरू हो चुका है, जिसके कारण ग्रामीण तड़के ही अपने खेतों और सीमावर्ती जंगलों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में हाथियों के छोटे-छोटे समूहों में बंटकर आबादी की ओर आने से जानलेवा हमलों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति बेहद भयावह नजर आती है। पिछले छह महीनों के भीतर ही कोरबा और कटघोरा वन मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों के हमले से कुल नौ बेकसूर ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि इसी अवधि में आपसी संघर्ष या अन्य प्राकृतिक कारणों से तीन हाथियों की भी मौत दर्ज की गई है।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए वन विभाग ने एक बार फिर ग्रामीणों से विशेष अपील जारी की है कि वे सुबह, शाम और रात के समय अकेले या छोटे समूहों में जंगलों व खेतों की ओर बिल्कुल न जाएं। हाथियों को देखने पर उन्हें कतई न उकसाएं, न ही उनके करीब जाकर सेल्फी या वीडियो बनाने का प्रयास करें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत नजदीकी वन चौकी को सूचित करें।



