रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष पर साध्वी का गंभीर आरोप: हाथ पकड़कर अभद्रता और जान से मारने की धमकी की शिकायत लेकर पहुंचीं एसएसपी कार्यालय
चपोरा आश्रम में रहने वाली साध्वी पद्मिनी पुरी ने भाजपा नेता लवकुश कश्यप पर लगाया लंबे समय से प्रताड़ित करने का आरोप, अध्यक्ष ने आरोपों को नकारा और महिला को बताया ब्लैकमेलर।

इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए साध्वी ने स्थानीय रतनपुर थाने के बजाय सीधे बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
10 वर्षों से साधना और दुर्व्यवहार का आरोप
साध्वी पद्मिनी पुरी ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से चपोरा आश्रम में रहकर पूर्णतः धार्मिक जीवन व्यतीत कर रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उज्जैन में नागा संन्यास परंपरा के तहत उनका विधिवत दीक्षा संस्कार हुआ था और वह संत समाज से जुड़ी हुई हैं।
साध्वी का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप पिछले लंबे समय से उन पर गलत नजर रखते आ रहे हैं और उनके साथ कई बार अनुचित व्यवहार व अश्लील हरकतें करने का प्रयास कर चुके हैं।
शिकायत के अनुसार, 3 जून 2026 को वह फुलवारीपारा स्थित मथुरावासी हनुमान मंदिर आश्रम में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं।
साध्वी का दावा है कि वहां जब वह अन्य संत-महात्माओं के साथ भोजन कर रही थीं, तब लवकुश कश्यप वहां पहुंचे और उन्हें भोजन करने से रोकते हुए वहां से उठ जाने को कहा। विरोध करने पर सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया गया, उनका हाथ पकड़ा गया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई।
साध्वी ने आरोप लगाया कि आरोपी खुद को उपमुख्यमंत्री का बेहद करीबी और प्रभावशाली राजनीतिक पहुंच वाला बताकर उन पर लगातार दबाव और भय का माहौल बना रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अध्यक्ष पर गांजा, शराब और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े असामाजिक तत्वों को संरक्षण देने का भी आरोप मढ़ा है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने आरोपों को बताया निराधार, ब्लैकमेलिंग का किया दावा
दूसरी तरफ, रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश और ब्लैकमेलिंग का हिस्सा करार दिया है।
लवकुश कश्यप का कहना है कि एक दिवंगत महंत की अंत्येष्टि और समाधि कार्यक्रम के दौरान यह पूरा विवाद उत्पन्न हुआ था। चूंकि उक्त महिला एक अलग संप्रदाय से जुड़ी हुई हैं, इसलिए स्थानीय संत समाज की ओर से उन्हें कार्यक्रम का कोई न्योता नहीं दिया गया था, इसके बावजूद वह वहां पहुंच गईं।
अध्यक्ष ने दावा किया कि आयोजन समिति द्वारा उन्हें ससम्मान भोजन कराया गया और दक्षिणा भी दी गई, लेकिन इसके बाद उन्होंने वहां संत की गद्दी को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। कश्यप ने स्पष्ट किया कि जब यह विवाद हुआ, तब वे मौके पर मौजूद भी नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह महिला पहले भी क्षेत्र के भक्तों और एक मंदिर के पुजारी को झूठे मामले में फंसाकर करीब 20 डिसमिल जमीन हड़प चुकी है और चपोरा क्षेत्र में भी लोगों के खिलाफ छेड़छाड़ की फर्जी शिकायतें दर्ज कराकर पैसे वसूलने और ब्लैकमेल करने का काम करती रही है।
इस पूरे मामले को लेकर बिलासपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ने बताया कि दोनों ही पक्षों की तरफ से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज कर लिया है और कार्यक्रम में मौजूद अन्य प्रत्यक्षदर्शी संतों व महात्माओं से भी पूछताछ की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



