बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 45 प्रतिशत दिव्यांग शिक्षक के 42 किलोमीटर दूर तबादले पर लगाई रोक
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कबीरधाम जिले के दिव्यांग शिक्षक टेकश्वर कौशिक को बड़ी राहत दी है। अदालत ने 42 किलोमीटर दूर किए गए उनके तबादले पर रोक लगाते हुए 30 दिन के भीतर नजदीक के स्कूल में पदस्थापना के सख्त निर्देश दिए हैं।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में कबीरधाम जिले के ग्राम सेमरिया निवासी टेकश्वर कौशिक हैं। वह जिले के लोहारा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया में सहायक शिक्षक (एलबी) विज्ञान के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। बीते 6 अगस्त 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग ने थोक में तबादला सूची जारी की थी। इस सूची में टेकश्वर कौशिक का नाम भी शामिल था। विभाग ने उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला कृतबंधा कर दिया था। सेमरिया से कृतबंधा की भौगोलिक दूरी लगभग 42 किलोमीटर है। एक 45 प्रतिशत अस्थि दिव्यांग व्यक्ति के लिए रोजाना 84 किलोमीटर का सफर तय करना शारीरिक रूप से बेहद कष्टदायक और लगभग असंभव कार्य है। विभाग के आला अधिकारियों ने तबादला सूची तैयार करते समय इस गंभीर पहलू की पूरी तरह से अनदेखी की। कागजों पर लकीरें खींचकर एक शिक्षक की शारीरिक सीमाओं का मजाक उड़ाया गया।
अन्यायपूर्ण तबादले के खिलाफ टेकश्वर कौशिक की कानूनी लड़ाई लंबी और थका देने वाली रही। तबादला आदेश मिलते ही उन्होंने सबसे पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस प्रारंभिक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें राज्य शासन की स्थानांतरण नीति के तहत गठित विभागीय समिति के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। शिक्षक ने पूरी उम्मीद के साथ अपनी मेडिकल रिपोर्ट, 45 प्रतिशत दिव्यांगता का वैध प्रमाण पत्र और नई पदस्थापना की अत्यधिक दूरी का विस्तृत ब्योरा देते हुए समिति के सामने गुहार लगाई। विभागीय समिति ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए उनके इस तकनीकी और मानवीय आधार वाले अभ्यावेदन को सिरे से खारिज कर दिया। प्रशासन की इस हठधर्मिता ने शिक्षक को गहरे मानसिक तनाव में धकेल दिया। न्याय की आस में उन्हें एक बार फिर उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
दोबारा याचिका दायर होने पर न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की अदालत ने मामले की गंभीरता को समझा। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के वकीलों से सीधे सवाल किए। अदालत ने कबीरधाम के जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्ट जानकारी मांगी कि क्या याचिकाकर्ता के वर्तमान निवास या पुरानी पदस्थापना के आसपास कोई ऐसा स्कूल है जहां उनके पद के अनुरूप कोई रिक्ति मौजूद हो। जिला शिक्षा अधिकारी के रिकॉर्ड खंगालने पर हकीकत सामने आ गई। प्रशासन ने अदालत को सूचित किया कि शासकीय माध्यमिक शाला गोचिया और शासकीय माध्यमिक शाला बंधौरा में पद पूरी तरह से खाली हैं। इन दोनों ही स्कूलों की दूरी याचिकाकर्ता के निवास से काफी कम है। यह खुलासा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रिक्त पद होने के बावजूद एक दिव्यांग को 42 किलोमीटर दूर क्यों भेजा गया, इसका कोई संतोषजनक जवाब विभाग के पास नहीं था।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई रिक्त पदों की जानकारी का सूक्ष्म अवलोकन किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वह राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति या मूल तबादला आदेश की वैधानिकता पर कोई विस्तृत कानूनी टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन एक दिव्यांग कर्मचारी की जायज परेशानी का समाधान किया जाना न्यायहित में अत्यंत आवश्यक है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया है कि सक्षम प्राधिकारी तत्काल प्रभाव से मामले का संज्ञान लें। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि टेकश्वर कौशिक की नई पदस्थापना शासकीय माध्यमिक शाला गोचिया या शासकीय माध्यमिक शाला बंधौरा में से किसी एक उपयुक्त स्थान पर की जाए। अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए शासन को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से ठीक 30 दिन की समय-सीमा निर्धारित कर दी है।



