छत्तीसगढ़ में छूटे हुए मतदाताओं को जोड़ने के लिए चुनाव आयोग का विशेष अभियान शुरू, मतदान केंद्रों पर लगेंगे कैंप
छत्तीसगढ़ में चुनाव आयोग ने छूटे हुए और नए युवा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए एक महीने का स्पेशल ड्राइव शुरू किया है। रैन बसेरों और आदिवासी इलाकों में भी विशेष शिविर लगाए जाएंगे।

इस विशेष अभियान के तहत निर्वाचन अधिकारियों ने एक बेहद सुगठित रणनीति अपनाई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों का उद्देश्य नामांकन प्रक्रिया को हर आम आदमी की पहुंच तक लाना है। समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह ड्राइव बेहद अहम मानी जा रही है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि रैन बसेरों, दूरदराज की श्रमिक कॉलिनायों, झुग्गी बस्तियों और बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए पृथक से विशेष शिविर लगाए जाएं। यह पहल इस बात को सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक या सामाजिक पिछड़ेपन के कारण कोई भी नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार से अछूता न रह जाए। प्रशासनिक अमला सीधे जमीनी स्तर पर जाकर इन वर्गों से संपर्क साधेगा।
इस महाअभियान की पृष्ठभूमि प्रदेश में पिछले साल से चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ी है। राज्य में साल 2025 के अंत में शुरू हुई पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत व्यापक स्तर पर मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया गया था। इस लंबी कवायद के बाद एक जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया था। उस दौरान पूरे प्रदेश में दो लाख चौंतीस हजार नौ सौ तिरानवे नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए थे। लाखों अपात्र और मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर इसे पारदर्शी बनाया गया था। इन उपलब्धियों के बावजूद निर्वाचन आयोग का मानना है कि नाम जोड़ने और सुधारने की प्रक्रिया एक सतत और निरंतर चलने वाली प्रशासनिक गतिविधि है। इसे किसी एक तय समय-सीमा तक सीमित नहीं किया जा सकता। पात्र लोगों को अधिकार देना एक अनवरत प्रक्रिया है।
अभियान को पूरी तरह से निष्पक्ष और विवाद रहित रखने के लिए राजनीतिक दलों को भी इस प्रक्रिया में भागीदार बनाया जा रहा है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा बूथ स्तर पर तैयार की गई छूटे हुए और नए मतदाताओं की सूची को सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाएगा। इससे उन्हें अपने स्तर पर सूची की जांच करने और यदि कोई पात्र व्यक्ति छूट गया हो तो उसका नाम जुड़वाने का एक और अवसर प्राप्त होगा। यह कदम चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक दलों का विश्वास कायम रखने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी पहल माना जा रहा है। पारदर्शी कार्यप्रणाली से फर्जी मतदान की किसी भी आशंका को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकेगा। हर एक मतदाता की भौतिक तस्दीक सुनिश्चित की जा रही है।
जागरूकता के बिना कोई भी अभियान पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकता। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारियों और रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को व्यापक स्तर पर आउटरीच कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए हैं। शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए स्वीप गतिविधियां जोरों पर संचालित की जाएंगी। स्थानीय स्तर पर बैठकों, सोशल मीडिया कैंपेन और नियमित प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जाएगी। प्रशासन का पूरा तंत्र यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि मतदाता पंजीकरण का संदेश राज्य के दूरस्थ आदिवासी अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक हर नागरिक के कानों तक पहुंचे। फार्म भरने की प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और सुगम बना दिया गया है।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग इस पूरे अभियान की बारीकी से समीक्षा करेगा। जिला और राज्य स्तर पर निरंतर मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया गया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि बिना पुख्ता सत्यापन के किसी भी आवेदन को खारिज न किया जाए। जिन आवेदनों में विसंगतियां हैं, उन्हें सुधारने के लिए मतदाताओं को पर्याप्त अवसर और सहायता प्रदान की जाए। यदि कोई व्यक्ति अपना नाम मतदाता सूची में खोज नहीं पाता है या उसे सुधार की आवश्यकता है, तो वह ऑनलाइन पोर्टल या हेल्प डेस्क के माध्यम से तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इस पूरी कवायद का लक्ष्य एक ऐसी त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना है जो आगामी चुनावों का आधार बनेगी। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट तलब की गई है।

