राजीव भवन हमला: दीपक बैज का बड़ा आरोप, बोले-हम पर पत्थर भी चले और पुलिस ने हमीं पर दर्ज की एफआईआर, बर्खास्त हों शामिल मंत्री
रायपुर के राजीव भवन में भाजपा कार्यकर्ताओं और कांग्रेसियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बैज ने हमले में शामिल मंत्रियों की बर्खास्तगी और एकतरफा पुलिस कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग अब सीधी हिंसक झड़पों में बदलती दिख रही है। राजधानी रायपुर स्थित राज्य कांग्रेस मुख्यालय ‘राजीव भवन’ के बाहर हुए भीषण हंगामे, पत्थरबाजी और पुलिस की कार्रवाई के अगले दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेसवार्ता कर राज्य सरकार पर करारा हमला बोला। राजीव भवन में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में बैज ने पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कल का हमला केवल भाजपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पूरी सरकार का प्रायोजित हमला था।
दीपक बैज ने बीते दिन हुए घटनाक्रम को याद दिलाते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि वाटर कैनन भी हम पर चला, आंसू गैस के गोले भी हम ही पर दागे गए, भाजपा कार्यकर्ताओं के पत्थर और डंडे भी हमारे कार्यकर्ताओं ने सहे और हद तो तब हो गई जब पुलिस ने एफआईआर भी हमारे ही खिलाफ दर्ज कर ली। सरकार को इस तरह के रवैये पर शर्म आनी चाहिए। बैज ने दावा किया कि घटना के दौरान मौजूद तमाम मीडिया फुटेज और वीडियो इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि पत्थरबाजी, चप्पलें, पानी के पाउच और नारियल के खोल भाजपा की ओर से कांग्रेस दफ्तर पर फेंके जा रहे थे। इसके बावजूद रायपुर पुलिस ने भाजपा उपद्रवियों पर कार्रवाई करने के बजाय केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया।
पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन मंत्रियों के कंधों पर राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे खुद अपने समर्थकों के साथ विपक्ष के मुख्य कार्यालय पर धावा बोलने पहुंचे थे। बैज के अनुसार यह सीधे तौर पर संविधान की शपथ और पद की गरिमा का सरासर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सत्ता के दंभ में चूर भाजपा सरकार ने तमाम लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है। मुख्यमंत्री भले ही सीधे तौर पर उस हिंसक भीड़ में मौजूद नहीं थे, लेकिन उनकी पूरी कैबिनेट राजीव भवन के बाहर उपद्रव का हिस्सा बनी हुई थी।
विपक्ष ने मांग की है कि लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन करने वाले और अलोकतांत्रिक आचरण में शामिल सभी मंत्रियों को मुख्यमंत्री तत्काल प्रभाव से कैबिनेट से बर्खास्त करें। दीपक बैज ने पुलिस की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कल की घटना ने साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस अब एक स्वतंत्र बल के रूप में कार्य करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी की एक अनुषांगिक इकाई की तरह काम कर रही है। जब भाजपा की ओर से लगातार पथराव हो रहा था, तब पुलिस तमाशबीन बनी रही और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कांग्रेस का कहना है कि पुलिस ने सुनियोजित तरीके से केवल उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लगातार पांच आंसू गैस के गोले छोड़े और ये सभी गोले राजीव भवन परिसर के भीतर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ऊपर गिरे। इसके साथ ही वॉटर कैनन का रुख भी पूरी तरह से कांग्रेसियों की तरफ ही मोड़ा गया था। इस हमले में महिलाओं सहित एक दर्जन से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
दीपक बैज ने इस पूरी घटना को पुलिस और सत्तारूढ़ दल का एक मिला-जुला षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पूर्व में भी भाजपा ने कई विरोध प्रदर्शन किए हैं, तब पुलिस पहले से वॉटर कैनन और भारी आंसू गैस बल के साथ इस तरह राजीव भवन के इतने करीब मुस्तैद क्यों नहीं रहती थी? कल पुलिस का वाहन और पूरी तैयारी पहले से राजीव भवन के ठीक सामने किसके इशारे पर की गई थी?
सामान्य प्रशासनिक और सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक जब भी कोई राजनीतिक दल किसी दूसरे दल के मुख्यालय का घेराव करने निकलता है, तो पुलिस उन्हें कम से कम आधा किलोमीटर या एक सुरक्षित दूरी पर बैरिकेडिंग करके रोक देती है। हालांकि, कल के घटनाक्रम में भाजपा समर्थकों और मंत्रियों को राजीव भवन के बिल्कुल मुख्य द्वार तक आने की अनुमति दे दी गई। विपक्ष का कहना है कि यह ढील इस बात का प्रमाण है कि पूरी घटना की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और पुलिस को सिर्फ एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया।
पीसीसी चीफ ने प्रदेश में हाल के दिनों में युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और सरकार मुख्य दोषियों को बचाने में लगी है। जब इस भ्रष्टाचार और युवाओं की बेरोजगारी के खिलाफ विपक्षी दल सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराता है, तो तंत्र को मजबूत करने के बजाय विपक्ष के दफ्तरों को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए बल प्रयोग और झूठे मुकदमों का सहारा ले रही है।
इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं सह-प्रभारी डॉ. एस.ए. सम्पत कुमार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू तथा प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू भी मंच पर मौजूद रहे। सभी वरिष्ठ नेताओं ने एक स्वर में पुलिस प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और चेतावनी दी कि कांग्रेस कार्यकर्ता इन झूठी एफआईआर और पुलिसिया दमन से डरने वाले नहीं हैं। पार्टी इस लड़ाई को सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेगी।



