अवैध शराब के नाम पर ब्लैकमेल का सनसनीखेज मामला: महिला को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 45 हजार रुपये की कथित वसूली, पुलिस ने दर्ज किया अपराध
बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मड़ई में एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे अवैध शराब के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 45 हजार रुपये की जबरन वसूली की गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध धमकी देकर जबरन वसूली सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला ग्रामीण क्षेत्र में कानून के दुरुपयोग की आशंका और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोपों के कारण चर्चा का विषय बन गया है।

रायपुर | 8 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से कथित ब्लैकमेलिंग और जबरन वसूली का एक गंभीर मामला सामने आया है। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम मड़ई की रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसे अवैध शराब के मामले में झूठा फंसाने की धमकी देकर 45 हजार रुपये की वसूली की गई। महिला का दावा है कि उसने दो से तीन वर्ष पहले महुआ शराब बनाने और बेचने का काम पूरी तरह बंद कर दिया था, इसके बावजूद आरोपी ने उसके घर शराब रखकर उसे फंसाने की कोशिश की और बाद में धमकाकर रुपये ले लिए।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महिला ने पुलिस को बताई पूरी घटनाक्रम की जानकारी
शिकायतकर्ता आशा सोनझरी, निवासी ग्राम मड़ई, ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि वह पहले महुआ शराब तैयार करने और बेचने का कार्य करती थी।
महिला का कहना है कि पिछले लगभग दो से तीन वर्षों से उसने यह कार्य पूरी तरह बंद कर दिया है और वर्तमान में उसका अवैध शराब के कारोबार से कोई संबंध नहीं है।
महिला ने आरोप लगाया कि इसी पुराने पेशे का लाभ उठाकर आरोपी ने उसे झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची।
सुबह घर पहुंचा आरोपी, शराब रखने का आरोप
शिकायत के अनुसार 5 जुलाई की सुबह लगभग छह बजे ग्राम खम्हरिया निवासी लीलामणी सोनझरी उसके घर पहुंचा।
महिला का आरोप है कि आरोपी अपने साथ शराब लेकर आया और उसे उसके घर के भीतर रख दिया।
इसके बाद आरोपी ने उसी शराब को आधार बनाकर महिला पर अवैध शराब रखने और बेचने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
महिला का कहना है कि आरोपी ने इस पूरे घटनाक्रम का उपयोग उसे डराने और धमकाने के लिए किया।
झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने महिला को चेतावनी दी कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी तो उसे आबकारी और पुलिस कार्रवाई में फंसा दिया जाएगा।
महिला का आरोप है कि उसे लगातार डराया गया कि उसके विरुद्ध अवैध शराब रखने का मामला दर्ज करा दिया जाएगा, जिससे उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।
महिला ने दावा किया कि इसी भय का लाभ उठाकर आरोपी ने उससे बड़ी रकम की मांग की।
45 हजार रुपये की कथित जबरन वसूली
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी ने धमकी देकर उससे कुल 45 हजार रुपये ले लिए।
उसका कहना है कि यह राशि पूरी तरह दबाव और भय के माहौल में ली गई।
यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल धमकी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जबरन वसूली और आपराधिक भयादोहन का गंभीर मामला माना जाएगा।
सीपत पुलिस ने दर्ज किया अपराध
शिकायत प्राप्त होने के बाद सीपत थाना पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप का परीक्षण किया जाएगा।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता, आरोपी तथा संभावित गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
जांच में जुटेगी पुलिस, जुटाए जाएंगे साक्ष्य
पुलिस के लिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू घटनास्थल, कथित लेनदेन और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण होगा।
यदि रुपये का लेनदेन बैंक, डिजिटल माध्यम या अन्य किसी प्रकार से हुआ है तो उसकी भी जांच की जा सकती है।
इसके अलावा घटनास्थल के आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा सकता है।
पुराने पेशे का फायदा उठाने का आरोप
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह पहले महुआ शराब बनाने और बेचने का कार्य करती थी।
हालांकि उसने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले दो-तीन वर्षों से उसने यह काम पूरी तरह बंद कर दिया है।
जांच एजेंसियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे यह सत्यापित करें कि घटना के समय महिला वास्तव में इस गतिविधि से पूरी तरह अलग थी या नहीं।
धमकी देकर वसूली कानून की नजर में गंभीर अपराध
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर धन प्राप्त करता है तो यह गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाता है।
भारतीय न्याय संहिता में आपराधिक भयादोहन और जबरन वसूली से संबंधित प्रावधान ऐसे मामलों में लागू हो सकते हैं।
हालांकि किसी भी मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही तय होता है।
पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे सभी तथ्य
फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं।
पुलिस जांच के दौरान आरोपी का पक्ष भी दर्ज किया जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविकता का परीक्षण किया जाएगा।
यदि जांच में शिकायत की पुष्टि होती है तो आरोपी के विरुद्ध विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में अलग तथ्य सामने आते हैं तो उसी आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लैकमेलिंग की घटनाएं चिंता का विषय
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने विवाद, सामाजिक परिचय या पूर्व गतिविधियों का लाभ उठाकर लोगों को डराने-धमकाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
ऐसे मामलों में त्वरित पुलिस जांच और निष्पक्ष कार्रवाई अत्यंत आवश्यक होती है ताकि निर्दोष व्यक्ति अनावश्यक दबाव का शिकार न हो और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
निष्पक्ष जांच पर टिकी सभी की निगाहें
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
आने वाले दिनों में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, कथित धनराशि के लेनदेन और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप किस सीमा तक सही हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।



