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Parle के वेयरहाउस पर बड़ी कार्रवाई, एक्सपायर्ड Frooti और Appy Fizz मिलने के बाद लाइसेंस सस्पेंड

मुंबई में पारले एग्रो के वेयरहाउस पर छापे में एक्सपायर्ड Frooti और Appy Fizz मिले। करीब 99,970 रुपये का स्टॉक जब्त कर लाइसेंस सस्पेंड किया गया।







15 August 2026 | Raipur: मुंबई में लोकप्रिय पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी पारले एग्रो के एक वेयरहाउस पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। चेंबूर इलाके में की गई जांच के दौरान अधिकारियों को Frooti, Appy Fizz और Candy Juice के एक्सपायर्ड स्टॉक मिले, जिसके बाद करीब 99,970 रुपये कीमत का माल जब्त कर लिया गया और वेयरहाउस का फूड बिजनेस लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया।

यह कार्रवाई मुंबई के वाशी नाका इलाके में एलयू गडकरी मार्ग स्थित प्रयाग नगर में मौजूद Velocity Express वेयरहाउस में की गई। जांच के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग उत्पादों के ऐसे बैच मिले, जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी और जिन्हें वेयरहाउस में रखा गया था।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने एक्सपायर्ड स्टॉक को अपने कब्जे में लेने के साथ ही वेयरहाउस को सील कर दिया। अब इस परिसर से खाद्य और पेय पदार्थों की बिक्री, सप्लाई या दूसरी जगह ट्रांसपोर्ट करने पर अगले आदेश तक रोक रहेगी।

जांच की कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे शुरू हुई थी और 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली। करीब 11 घंटे चले इस ऑपरेशन में खाद्य सुरक्षा विभाग के आठ अधिकारी शामिल थे और एक्सपायर्ड सामान के अलावा उत्पादों की आवाजाही में इस्तेमाल किए जा रहे दो वाहनों को भी कब्जे में लिया गया।

इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक्सपायर्ड पेय पदार्थ वेयरहाउस में स्टॉक के तौर पर कैसे मौजूद थे। खाद्य कारोबार में किसी उत्पाद की एक्सपायरी डेट गुजर जाने के बाद उसे सामान्य बिक्री या सप्लाई के लिए उपलब्ध रखना गंभीर सुरक्षा सवाल खड़े करता है, इसलिए विभाग ने सीधे स्टॉक को रोकने और लाइसेंस सस्पेंड करने की कार्रवाई की है।

हालांकि अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि जब्त किया गया एक्सपायर्ड Frooti या Appy Fizz बाजार में बिक्री के लिए पहुंच चुका था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि किसी ग्राहक ने इन उत्पादों को खरीदा या उनका सेवन किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फिलहाल कार्रवाई वेयरहाउस में मिले स्टॉक को जब्त करने और उसकी बिक्री तथा आवाजाही रोकने तक सीमित है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाली किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि एक्सपायर्ड उत्पाद ग्राहकों तक पहुंच चुके थे। असली स्थिति आगे की जांच और विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

Frooti और Appy Fizz देशभर में बड़ी संख्या में बिकने वाले पेय पदार्थ हैं। इनकी सप्लाई चेन में उत्पादन केंद्रों से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर, वेयरहाउस, रिटेलर और ग्राहक तक कई स्तर शामिल होते हैं। ऐसे में हर स्तर पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट की निगरानी जरूरी होती है।

खाद्य कारोबार में वेयरहाउस की भूमिका भी काफी अहम होती है। यहां बड़ी मात्रा में उत्पाद कुछ समय के लिए रखे जाते हैं और फिर मांग के हिसाब से अलग-अलग बाजारों में भेजे जाते हैं। यदि स्टॉक की समय पर जांच नहीं हो तो एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके उत्पाद सिस्टम में बने रह सकते हैं और बाद में गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

इस मामले में अधिकारियों ने जिस स्टॉक को जब्त किया है, उसकी कुल कीमत करीब 99,970 रुपये बताई गई है। यह रकम कंपनी के पूरे कारोबार की तुलना में बड़ी नहीं लग सकती, लेकिन खाद्य सुरक्षा के नजरिए से किसी भी एक्सपायर्ड उत्पाद का स्टॉक मिलना जांच का विषय बन जाता है।

लाइसेंस सस्पेंड होने का मतलब यह है कि संबंधित वेयरहाउस से फिलहाल खाद्य और पेय पदार्थों की बिक्री या आवाजाही नहीं की जा सकती। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष और सक्षम अधिकारियों के आदेश पर निर्भर करेगी।

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब मुंबई में फूड सेफ्टी नियमों को लेकर निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले भी शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने जैसी कार्रवाई की जा चुकी है।

इस तरह की कार्रवाई का एक बड़ा मकसद कंपनियों और उनके डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को यह संदेश देना भी होता है कि खाद्य उत्पादों की क्वालिटी और सेफ्टी में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। खासकर ऐसे उत्पाद जिन्हें सीधे लोग खाते या पीते हैं, उनके मामले में स्टोरेज और सप्लाई की निगरानी बेहद जरूरी रहती है।

कंपनियों के लिए केवल उत्पादन के समय क्वालिटी चेक करना पर्याप्त नहीं होता। उत्पाद जब फैक्ट्री से निकलकर अलग-अलग शहरों में पहुंचते हैं, तब भी तापमान, स्टोरेज कंडीशन, बैच ट्रैकिंग और एक्सपायरी की लगातार निगरानी करनी पड़ती है।

Frooti, Appy Fizz और दूसरे पैकेज्ड ड्रिंक्स की सप्लाई में बड़ी संख्या में कार्टन और बैच रोजाना अलग-अलग वेयरहाउस तक पहुंचते हैं। ऐसे में स्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम में पुराने और नए बैच की पहचान, बिक्री की प्राथमिकता और एक्सपायरी से पहले डिस्पैच जैसी व्यवस्थाएं काफी अहम हो जाती हैं।

खाद्य कारोबार के जानकारों के मुताबिक किसी वेयरहाउस में एक्सपायर्ड स्टॉक मिलने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह सामान ग्राहकों को बेच दिया गया था। कई बार एक्सपायर्ड या डैमेज माल बिक्री से अलग करके किसी निर्धारित प्रक्रिया के तहत रखा जाता है, लेकिन ऐसे मामलों में उसे स्पष्ट रूप से अलग रखना और उसका रिकॉर्ड बनाए रखना जरूरी होता है। इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मिला हुआ स्टॉक किस स्थिति में रखा गया था और उसकी बिक्री या सप्लाई की कोई कोशिश हुई थी या नहीं।

उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला एक जरूरी संकेत है। पैकेज्ड ड्रिंक खरीदते समय ग्राहक को बोतल या पैक की एक्सपायरी डेट, पैकिंग की स्थिति और लेबल जरूर देखना चाहिए। यदि पैकेज फूला हुआ, लीक या क्षतिग्रस्त दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

खासकर गर्मी के मौसम और लंबे समय तक स्टोरेज वाले उत्पादों में सही भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हालांकि इस मामले में उत्पादों के स्टोरेज कंडीशन को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

कार्रवाई के दौरान दो वाहनों को भी कब्जे में लिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि अधिकारी केवल वेयरहाउस के अंदर मौजूद स्टॉक की जांच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उत्पादों की आवाजाही से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया।

अब आगे की प्रक्रिया में जब्त स्टॉक की जांच, उसके बैच और एक्सपायरी से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल और वेयरहाउस से संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम हो सकती है। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरी तरफ कंपनी और संबंधित वेयरहाउस संचालक की ओर से आगे आने वाला पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा। एक्सपायर्ड स्टॉक वहां किस उद्देश्य से रखा गया था, क्या वह बिक्री योग्य स्टॉक से अलग था और स्टॉक डिस्पोजल की प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि जब्त किए गए करीब 99,970 रुपये के एक्सपायर्ड स्टॉक को बिक्री और ट्रांसपोर्ट से रोक दिया गया है। वेयरहाउस का फूड बिजनेस लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिया गया है और अगले आदेश तक वहां से खाद्य या पेय पदार्थों की आवाजाही पर रोक रहेगी।

इस कार्रवाई के बाद पैकेज्ड ड्रिंक इंडस्ट्री में स्टॉक मैनेजमेंट और एक्सपायरी कंट्रोल को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। बड़ी कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में किसी एक वेयरहाउस पर हुई कार्रवाई भी पूरी सप्लाई चेन के लिए एक चेतावनी मानी जा सकती है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन में छोटी सी चूक भी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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