रायपुर में प्रदर्शन के दौरान बवाल: पुलिसकर्मियों पर हमले के मामले में 12 कांग्रेसी नेताओं पर FIR, CCTV फुटेज आया सामने
रायपुर में कांग्रेस के हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन। 12 प्रमुख कांग्रेसी नेताओं समेत अन्य पर नामजद FIR दर्ज। धक्का-मुक्की, बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों के घायल होने का CCTV फुटेज सामने आया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई। इलाके में लगे सुरक्षा कैमरों और पुलिस के डिजिटल कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई।
सीसीटीवी फुटेज में प्रदर्शनकारी साफ तौर पर पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ते और तैनात जवानों को धक्का देते दिखाई दे रहे हैं।
फुटेज में मिली अकाट्य तस्वीरों के आधार पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। रायपुर पुलिस ने उपद्रव मचाने, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप में 12 नामजद कांग्रेस नेताओं समेत दर्जनों अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
मामला उस वक्त बेकाबू हुआ जब प्रदर्शनकारी तय रूट को दरकिनार कर प्रतिबंधित क्षेत्र की तरफ बढ़ने लगे। पुलिस प्रशासन ने पहले ही संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल तैनात किया था।
शुरुआत में पुलिस अधिकारियों ने माइक से लाउडस्पीकर पर प्रदर्शनकारियों को आगे न बढ़ने की हिदायत दी।
हालांकि, नेताओं के उकसावे में आकर भीड़ अचानक आक्रामक हो गई। उग्र कार्यकर्ताओं ने लोहे के भारी बैरिकेड्स को उखाड़ने की कोशिश की। जब मौके पर मौजूद जवानों ने उन्हें पीछे धकेलना चाहा, तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
देखते ही देखते शांत दिख रहा प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। भीड़ की तरफ से पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर हाथ-पैर चलाए गए।
इस दौरान ड्यूटी में तैनात कई आरक्षकों की वर्दियां फट गईं। कुछ जवानों के सिर, हाथ और चेहरे पर चोटें आई हैं।
घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाकर प्राथमिक उपचार कराया गया। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए वज्र वाहन और दंगा नियंत्रण दस्ते की तैनाती की गई है।
सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस की तकनीकी और फॉरेंसिक टीमें बारीकी से हर एक चेहरे की पहचान कर रही हैं।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह चुनिंदा नेताओं ने सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया।
रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और खाकी पर हाथ उठाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी नजीर पेश की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज बना मुख्य सबूत, धारा 353 और 147 के तहत केस दर्ज
पुलिस प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद शहर के प्रमुख चौराहों और वारदात स्थल पर लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज जब्त की। जांच टीम ने कई घंटों की फुटेज का अध्ययन किया।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई तस्वीरों ने उपद्रवियों की पोल खोलकर रख दी। फुटेज में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि किस तरह पूर्व नियोजित रणनीति के तहत बैरिकेड्स पर हमला किया गया।
इसी वीडियो साक्ष्य के आधार पर स्थानीय पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
एफआईआर में 12 प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं, जबकि 50 से अधिक अज्ञात उपद्रवियों को भी आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों पर बलवा करने, अवैध रूप से जमावड़ा बनाने, सरकारी कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान हमला करने और लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गैर-जमानती धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस की विशेष टीमें अब नामजद नेताओं की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
रायपुर शहर की शांति व्यवस्था प्रभावित होने के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर के सभी एंट्री पॉइंट्स पर चेकिंग बढ़ा दी गई है।
दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य की राजनीति गर्मा गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चलने लगे हैं।
भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन पुलिस बल पर हमला करना और कानून को ठेंगा दिखाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख विपक्षी दल बौखलाहट में हिंसा का सहारा ले रहा है।
वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस ने पुलिस की इस कार्रवाई को बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है।
पार्टी का दावा है कि उनके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से जनहित के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
कांग्रेसी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, जिससे भगदड़ की स्थिति बनी।
उनका कहना है कि नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाकर जन-आंदोलन की आवाज दबाने की साजिश रची जा रही है।
पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद शहर में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों को लेकर भारी हंगामे के आसार जताए जा रहे हैं।



