भिलाई में साइबर ठगी के ‘म्यूल अकाउंट’ सिंडिकेट का भंडाफोड़: 120 बैंक खातों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की FIR, करोड़ों के लेन-देन की जांच शुरू
भिलाई पुलिस ने साइबर ठगी में प्रयुक्त पीएनबी के 120 संदिग्ध 'म्यूल' खातों पर दर्ज की एफआईआर। गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल के इनपुट पर बड़ा खुलासा। जानिए कैसे भोले-भाले लोगों के खातों से हो रहा था करोड़ों का अवैध लेन-देन।

यह कार्रवाई भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वय पोर्टल (I4C- समन्वय पोर्टल) और छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय से प्राप्त बेहद संवेदनशील इनपुट के बाद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद से बैंकिंग सेक्टर और साइबर ठगों के स्थानीय मददगारों में हड़कंप मच गया है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन बैंक खातों का उपयोग किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर गिरोह ने देश भर के लोगों से ठगी गई रकम को सुरक्षित रूट करने और उसे तुरंत कैश आउट (निकासी) करने के लिए किया था। इस मामले की जड़ें केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अन्य कई राज्यों से भी जुड़ती नजर आ रही हैं।

क्या होते हैं ‘म्यूल बैंक खाते’ (Mule Accounts) और यह कैसे काम करते हैं?
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग अभी भी ‘म्यूल अकाउंट’ के इस मायाजाल से अनजान हैं। आसान शब्दों में समझें तो ‘म्यूल’ का अर्थ होता है ढोने वाला (खच्चर)। जिस तरह तस्करी का सामान ढोने के लिए किसी अन्य व्यक्ति का इस्तेमाल किया जाता है, ठीक उसी तरह साइबर ठग अपनी पहचान छुपाने के लिए तीसरे पक्ष (Third Party) के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।
इन खातों का उपयोग मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है:
- पहला तरीका: जालसाज गरीब, सीधे-सादे ग्रामीणों, मजदूरों या कॉलेज के छात्रों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवा लेते हैं। इसके बाद उस खाते का एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल अपने कब्जे में ले लेते हैं।
- दूसरा तरीका: कई बार खाताधारकों को इस बात की पूरी जानकारी होती है कि उनके खाते का उपयोग अवैध लेन-देन के लिए किया जा रहा है और वे इसके बदले में ठगों से प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 5 से 10 प्रतिशत का मोटा कमीशन लेते हैं।
भिलाई पुलिस की जांच के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक के जिन 120 खातों पर कार्रवाई की गई है, वे तकनीकी भाषा में “लेयर-1 (Layer-1) म्यूल खाते” हैं। इसका मतलब यह है कि देश के किसी भी हिस्से में जब किसी पीड़ित से ठगी की गई, तो ठगी की वह पहली रकम बिना किसी देरी के सबसे पहले सीधे इन्हीं 120 खातों में ट्रांसफर की गई थी।
2024 से 2026 के बीच हुआ करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन
भिलाई पुलिस और साइबर सेल की जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन 120 संदिग्ध खातों का संचालन मुख्य रूप से वर्ष 2024 से 2026 के बीच बहुत सक्रियता के साथ किया गया था। इस दो साल की अवधि के दौरान, इन खातों में देश के विभिन्न राज्यों से ठगी गई करोड़ों रुपये की राशि जमा की गई।
गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल के जरिए जब बैंक खातों के ट्रांजैक्शन पैटर्न का विश्लेषण किया गया, तो पाया गया कि जैसे ही इन खातों में पैसा जमा होता था, उसके कुछ ही मिनटों के भीतर या तो उसे एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता था, या फिर अन्य दूसरे और तीसरे स्तर के खातों (Layer-2 and Layer-3 Accounts) में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस तेज गति से किए जाने वाले ट्रांजैक्शन का एकमात्र उद्देश्य पुलिस और साइबर सेल की ट्रैकिंग प्रक्रिया को उलझाना और भ्रमित करना था।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज
भिलाई नगर पुलिस ने इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए कानून का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। पुलिस ने बैंक दस्तावेजों, समन्वय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और साइबर क्राइम शिकायतों की पावती के आधार पर संदिग्ध खाताधारकों और उनके पीछे छिपे संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य रूप से निम्नलिखित धाराओं को शामिल किया है:
- धारा 318(2): धोखाधड़ी (Cheating) के अपराध से जुड़ी हुई धारा।
- धारा 318(3): किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने या बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करने से संबंधित धारा।
- धारा 318(4): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के गंभीर मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान।
इन धाराओं के तहत यदि कोई भी खाताधारक या संदिग्ध दोषी पाया जाता है, तो उसे न केवल भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा बल्कि सात साल तक की कठोर कारावास की सजा भी हो सकती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि “अज्ञानता” का बहाना बनाकर कोई भी खाताधारक इस कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
पुलिस की चेतावनी: “चंद रुपयों के लालच में अपना खाता न बेचें”
भिलाई नगर पुलिस और दुर्ग पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय ने इस बड़े मामले के सामने आने के बाद आम नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी और कड़क एडवायजरी जारी की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोग अनजाने में या थोड़े से पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खातों को दूसरों को सौंप देते हैं और बाद में जब पुलिस की दबिश होती है, तो वे मुख्य आरोपी के रूप में सामने आते हैं।
याद रखें: बैंक खाता आपका डिजिटल हस्ताक्षर है। यदि आपके खाते से ठगी का एक भी रुपया ट्रांसफर होता है, तो कानून की नजर में आप उस अपराध के पहले भागीदार माने जाएंगे, भले ही आपने ठगी सीधे खुद न की हो।
साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए पुलिस की महत्वपूर्ण सलाह:
- कभी भी किसी अजनबी या संदिग्ध व्यक्ति को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड या बैंक पासबुक न सौंपें।
- अपना मोबाइल नंबर, जिसे आपने बैंक खाते से लिंक किया हुआ है, किसी दूसरे व्यक्ति के फोन में एक्टिवेट न करने दें।
- एटीएम कार्ड का पिन, नेट बैंकिंग का पासवर्ड या ओटीपी (OTP) किसी के भी साथ साझा न करें।
- यदि कोई आपको “बिना कुछ किए घर बैठे कमीशन पाने” के नाम पर अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने का ऑफर देता है, तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
वर्तमान में भिलाई नगर पुलिस पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधकों और नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर इन 120 बैंक खातों के मूल दस्तावेज, केवाईसी (KYC) फॉर्म और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द इन बैंक खातों के पीछे छिपे मुख्य मास्टमाइंड और स्थानीय एजेंटों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।



