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महादेव सट्टा एप कांड में ED की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: ₹940 करोड़ की संपत्ति जब्ती के बाद कारोबारी विकास गर्ग दिल्ली से गिरफ्तार

महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई। 940.77 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्ती के बाद दिल्ली से नामी कारोबारी विकास गर्ग गिरफ्तार। एबिक्सकैश व शेल कंपनियों के जरिए मनी लांड्रिंग के काले खेल का पर्दाफाश।







 

15 July 2026, Raipur। देश के सबसे चर्चित और बहु-करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ (Mahadev Online Book) और स्काई एक्सचेंज मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बेहद चौंकाने वाली और बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस काली कमाई के साम्राज्य को भारत के मुख्यधारा के कॉर्पोरेट जगत से जोड़ने वाले बेहद रसूखदार दिल्ली के बड़े कारोबारी विकास गर्ग को दिल्ली स्थित उनके आलीशान आवास से गिरफ्तार कर लिया है।

यह गिरफ्तारी वित्तीय अपराधों के खिलाफ चल रही देश की सबसे बड़ी मनी लांड्रिंग जांच के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है। गिरफ्तारी से ठीक कुछ दिन पहले ही ईडी ने एक बड़ा एक्शन लेते हुए विकास गर्ग, उनके परिवार और उनके सीधे नियंत्रण वाली मुखौटा (शेल) कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) कर लिया था।

दिल्ली की विशेष अदालत में शुरुआती कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईडी की टीम आरोपी विकास गर्ग को ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ला रही है। रायपुर की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पेश कर जांच एजेंसी उनकी कस्टोडियल रिमांड की मांग करेगी ताकि देश के इस सबसे बड़े सट्टेबाजी नेटवर्क के छिपे हुए वित्तीय लिंक और कॉर्पोरेट निवेशों के चेहरे बेनकाब किए जा सकें।

फोटो कैप्शन: ईडी (ED) द्वारा की गई कार्रवाई की एक फाइल तस्वीर। (प्रतीकात्मक चित्र)

सट्टेबाजी के ‘काले धन’ से खरीदा गया कॉर्पोरेट साम्राज्य

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शुरुआती और तकनीकी तफ्तीश में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, उन्होंने देश के शेयर बाजार और कॉर्पोरेट रेगुलेटर्स को भी हिलाकर रख दिया है। जांच के मुताबिक, विकास गर्ग मुख्य रूप से ‘विकास इकोटेक लिमिटेड’ (Vikas Ecotech Limited), ‘विकास लाइफकेयर लिमिटेड’ (Vikas Lifecare Limited) और ‘एराया लाइफस्पेसेज लिमिटेड’ (Eraaya Lifespaces Limited) जैसी बड़ी सार्वजनिक और निजी कंपनियों के मुख्य प्रमोटर और कर्ताधर्ता हैं।

जांच एजेंसी का सीधा आरोप है कि विकास गर्ग ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज नेटवर्क से विदेशों के जरिए भारत में भेजे गए कथित अवैध धन का उपयोग करके ‘एराया लाइफस्पेसेज’ के माध्यम से वैश्विक वित्तीय और ट्रैवल सेवा प्रदाता कंपनी ‘एबिक्सकैश’ (EbixCash) में लगभग 64 प्रतिशत की भारी-भरकम हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। इस पूरे अधिग्रहण सौदे में करोड़ों रुपये का सट्टेबाजी का पैसा सीधे तौर पर डायवर्ट किया गया था।

सट्टेबाजी के इस काले साम्राज्य से रोजाना और मासिक तौर पर निकलने वाली अथाह रकम को सीधे तौर पर छुपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया गया। जांच में पता चला कि इस अवैध राशि को पहले दर्जनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय शेल कंपनियों और फर्जी एंट्री ऑपरेटरों के चक्रव्यूह में घुमाया जाता था। कई स्तरों (Layering) पर घुमाने के बाद इस पैसे को वैध निवेश दिखाकर सीधे तौर पर शेयर बाजार, आलीशान रियल एस्टेट और बड़े कॉर्पोरेट अधिग्रहणों में सफेद धन के रूप में निवेश कर दिया गया।

देश के कोने-कोने में कुर्क हुईं ₹940 करोड़ की संपत्तियां

विकास गर्ग की गिरफ्तारी से पहले की गई संपत्तियों की जब्ती की सूची किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के पोर्टफोलियो जैसी दिखाई देती है। ईडी द्वारा कुर्क की गई 940.77 करोड़ रुपये की विशाल संपत्तियों में दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में स्थित बेहद महंगे बंगले, गोवा के आलीशान रिसॉर्ट्स और नैनीताल के प्राइम लोकेशंस पर स्थित अचल संपत्तियां शामिल हैं।

इसके अलावा विकास गर्ग की कंपनियों के नाम पर विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में जमा करोड़ों रुपये की नगद राशि को भी फ्रीज कर दिया गया है। जांचकर्ताओं का दावा है कि इन तमाम निजी और व्यावसायिक संपत्तियों के अधिग्रहण की टाइमलाइन सीधे तौर पर महादेव सट्टा एप के फलने-फूलने और उससे निकलने वाले बेहिसाब कैश फ्लो के साथ मेल खाती है।

हर महीने ₹450 करोड़ की अवैध कमाई का मायाजाल

ईडी के वित्तीय और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट’ भारत के आपराधिक इतिहास के सबसे बड़े संगठित वित्तीय नेटवर्क में से एक है। यह पूरा सिंडिकेट हर महीने करीब 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शुद्ध कमाई करता था। इस सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू इसका फ्रेंचाइजी-आधारित ‘पैनल सिस्टम’ था।

इस सिस्टम के तहत छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय एजेंटों को बकायदा ‘पैनल’ या यूजर आईडी बेची जाती थी। इन पैनलों के माध्यम से आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं को ऑनलाइन दांव लगाने और गेम खेलने के लिए आकर्षित किया जाता था। करोड़ों की इस अवैध वसूली का एक बड़ा हिस्सा हवाला चैनलों के माध्यम से विदेशों में बैठे आकाओं तक पहुंचता था, जबकि देश के भीतर का हिस्सा रसूखदार हस्तियों और भ्रष्ट सरकारी कारिंदों को रिश्वत और संरक्षण के तौर पर बांटा जाता था।

दुर्ग की गलियों से शुरू होकर खाड़ी देशों और ओमान तक पहुंचा सिंडिकेट

महादेव सट्टा एप की कहानी छत्तीसगढ़ के दुर्ग और भिलाई की तंग गलियों से शुरू हुई थी। स्थानीय स्तर पर दर्ज हुई कुछ एफआईआर (FIR) के बाद जब छत्तीसगढ़ पुलिस और बाद में ईडी व सीबीआई (CBI) ने इस मामले की परतों को खोलना शुरू किया, तो इसके तार सीधे तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), श्रीलंका, नेपाल और खाड़ी देशों से जुड़ते चले गए।

इस केस में अब तक देश की विभिन्न अदालतों में करीब 66 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। सिंडिकेट के मुख्य मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल समेत चार बड़े आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल (Interpol) द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। कुछ समय पहले ही मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान में एक फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के साथ अवैध रूप से सीमा पार करने की कोशिश के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में लिया था।

विदेशी जमीन पर केवल सौरभ चंद्राकर ही नहीं, बल्कि श्रीलंका में भी महादेव नेटवर्क के लिए काम करने वाले लगभग 150 से अधिक भारतीय युवाओं को वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने चिन्हित कर नजरबंद (House Arrest) किया हुआ है। विकास गर्ग की गिरफ्तारी यह साफ करती है कि इस नेटवर्क का शिकंजा विदेशों में छिपे सरगनाओं से लेकर भारत के भीतर बैठे उनके सफेदपोश मददगारों तक पूरी ताकत से कस चुका है। रायपुर में होने वाली पूछताछ से इस सिंडिकेट के कई और बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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