बिलासपुर रेल हादसा: लापरवाही की हद! पटरी पर JCB बकेट छोड़ भागे मजदूर, मालगाड़ी बेपटरी होने के बाद 10 गिरफ्तार, मुख्य ठेकेदार फरार
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल के करगी रोड स्टेशन पर हुए मालगाड़ी डिरेलमेंट मामले में आरपीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ट्रैक पर जेसीबी बकेट छोड़कर भागने से हुआ था बड़ा हादसा, मुख्य ठेकेदार अब भी फरार है।

जांच के दौरान पटरी से उतरे डिब्बों के नीचे एक जेसीबी मशीन का भारी-भरकम लोहे का बकेट फंसा हुआ मिला। आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 10 घंटों के भीतर इस मामले में संलिप्त 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, रेलवे निर्माण कार्य से जुड़ा मुख्य ठेकेदार अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसकी तलाश सरगर्मी से की जा रही है।
हादसे की असल वजह: ट्रेन देखकर जान बचाकर भागे मजदूर
ट्रैक पर छोड़ दी काल बनकर आई जेसीबी बकेट
रेलवे और आरपीएफ की प्रारंभिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि करगी रोड स्टेशन के पास रेल विकास या रखरखाव के काम में एक जेसीबी (बैकहो लोडर) मशीन लगाई गई थी। सोमवार दोपहर को वहां मजदूर जेसीबी बकेट की मदद से कुछ काम कर रहे थे या उसे ट्रैक पार कराने की कोशिश में थे। इसी दौरान अचानक उसी ट्रैक पर बिलासपुर की ओर से तेज रफ्तार मालगाड़ी आती दिखाई दी।
ट्रेन को अपनी तरफ आता देख वहां मौजूद मजदूरों के हाथ-पांव फूल गए। अपनी जान बचाने की हड़बड़ाहट में वे जेसीबी की भारी-भरकम बकेट को रेलवे ट्रैक के ठीक बीच में ही लावारिस छोड़ कर वहां से भाग खड़े हुए। मालगाड़ी के लोको पायलट को जब तक ट्रैक पर बाधा नजर आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
लोहे के बकेट से टकराकर बेपटरी हुए तीन डिब्बे
मालगाड़ी तेज गति से ट्रैक पर पड़ी उस भारी जेसीबी बकेट से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जेसीबी की लोहे की बकेट डिब्बों के नीचे ही फंस गई और मालगाड़ी को अपनी दिशा से भटका दिया। इसके बाद ट्रेन के तीन डिब्बे भयानक आवाज के साथ पटरी से उतर गए और पूरे स्टेशन परिसर में चीख-पुकार मच गई।
आरपीएफ का शिकंजा: 10 घंटे में 10 आरोपी गिरफ्तार
रेलवे सुरक्षा बल की त्वरित कार्रवाई
हादसे के बाद बिलासपुर रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, आरपीएफ और रेलवे के तकनीकी विंग के इंजीनियरों की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। मलबे के नीचे जेसीबी बकेट मिलते ही अधिकारियों ने इसे महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया और आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरपीएफ ने अलग-अलग टीमें बनाकर छापेमारी शुरू की।
हादसे के महज 10 घंटों के भीतर आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए घटना स्थल से भागने वाले और वहां अवैध रूप से मशीनरी संचालित करने वाले 10 आरोपियों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में ज्यादातर वह मजदूर और ऑपरेटर शामिल हैं जो हादसे के वक्त ट्रैक के पास मौजूद थे और बिना किसी सुरक्षा मानकों के काम कर रहे थे।
मुख्य ठेकेदार की तलाश में छापेमारी जारी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे कार्य को संचालित करने वाला मुख्य ठेकेदार दुर्घटना के बाद से ही फरार चल रहा है। रेलवे ट्रैक के इतने करीब बिना किसी सुरक्षा ब्लॉक (Block) या बिना रेलवे विभाग की अनुमति के इतनी बड़ी मशीनरी का उपयोग करना बेहद गंभीर अपराध है। पुलिस और आरपीएफ की टीमें फरार ठेकेदार के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
3 दिन के भीतर बिलासपुर मंडल में दूसरा बड़ा रेल हादसा
सुरक्षा दावों की खुली पोल
बिलासपुर रेल मंडल के कोटा क्षेत्र में हुआ यह डिरेलमेंट कोई अकेली घटना नहीं है। इससे ठीक दो दिन पहले बिलासपुर के ही तारबाहर क्षेत्र में एक मालगाड़ी का वैगन पटरी से उतर गया था। एक के बाद एक तीन दिनों में दो बड़े हादसों ने रेलवे की पटरियों की सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर चल रहे कार्यों की मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेलवे यात्रियों के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि यह एक खाली मालगाड़ी थी, जिससे कोई जनहानि या किसी को गंभीर चोट नहीं आई। अगर यही जेसीबी बकेट किसी यात्री ट्रेन के सामने आती, तो बिलासपुर रेल मंडल को देश के सबसे भीषण रेल हादसों में से एक का गवाह बनना पड़ सकता था।
घंटों बाधित रहा रेल यातायात, युद्ध स्तर पर हुआ बहाली का काम
हादसे के बाद करगी रोड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 और आसपास के ट्रैक पर रेल यातायात पूरी तरह से ठप हो गया था। इस रूट से गुजरने वाली कुछ पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को आंशिक रूप से रोकना पड़ा या उनके मार्ग बदले गए।
रेलवे के तकनीकी अमले ने क्रेन और भारी मशीनों की मदद से डिब्बों के नीचे फंसी जेसीबी बकेट को निकाला और बेपटरी हुए पहियों को दोबारा ट्रैक पर चढ़ाया। करीब रात भर चले रेस्क्यू और मरम्मत कार्य के बाद मंगलवार सुबह तक इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही को पूरी तरह से सामान्य किया जा सका।
वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस घटना की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है। इसके साथ ही भविष्य में ट्रैक के आसपास काम करने वाली बाहरी एजेंसियों के लिए नियमों को और सख्त करने की तैयारी है ताकि ऐसी आपराधिक लापरवाही दोबारा न दोहराई जा सके।



