छत्तीसगढ़ जल जीवन मिशन में ‘कागजी पानी’ पर घमासान: CAG रिपोर्ट और विधानसभा में हंगामे के बाद भाजपा-कांग्रेस में छिड़ी सियासी जंग
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पर कैग (CAG) की रिपोर्ट और विधानसभा में हंगामे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। 'नल है पर जल नहीं' की जमीनी हकीकत और करोड़ों रुपये के घपले के आरोपों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी जंग छिड़ गई है। जानिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

15 July 2026, रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक साफ पीने का पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘जल जीवन मिशन’ इस समय भ्रष्टाचार के आरोपों और तीखी राजनीति के दलदल में फंस गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया परफॉरमेंस ऑडिट रिपोर्ट और राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में उठे तीखे सवालों ने इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। कागजों पर ‘शत-प्रतिशत पूर्ण’ दिखाई देने वाली योजनाएं धरातल पर सूखी पड़ी हैं, जिसने अब राज्य में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। जहां एक तरफ विपक्ष इस योजना में भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार को घेर रहा है, वहीं सत्तापक्ष का दावा है कि वर्तमान गड़बड़ियां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए दोषपूर्ण अनुबंधों और अनदेखी का नतीजा हैं। इस राजनीतिक खींचतान के बीच पिस रही है छत्तीसगढ़ की वह ग्रामीण जनता, जिसके घरों के बाहर नल की टोटियां तो टांग दी गई हैं, लेकिन उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं टपकती।
कैग (CAG) की रिपोर्ट ने खोली दावों की पोल
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई जिलों में कागजों पर तो पानी की टंकियां और पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा दिखा दिया गया है, लेकिन जब भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया गया, तो हकीकत कुछ और ही निकली। कई गांवों में बिना जल स्रोत (Water Source) सुनिश्चित किए ही टंकियां खड़ी कर दी गईं, जो आज सफेद हाथी साबित हो रही हैं।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि ठेकेदारों को बिना काम पूरा किए या घटिया गुणवत्ता का काम करने के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। कई क्षेत्रों में पुरानी पाइपलाइनों को ही नया दिखाकर बिल पास करा लिए गए, जो सीधे तौर पर एक बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं। कैग की इस रिपोर्ट ने सरकारी दावों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा: सत्तापक्ष के विधायक ने ही खड़े किए सवाल
इस मुद्दे की गूंज छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में भी सुनाई दी, जहां भाजपा के वरिष्ठ विधायक भैयालाल राजवाड़े ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने सदन में बेहद आक्रामक लहजे में सवाल किया कि क्या केवल कागजों पर आंकड़े दुरुस्त कर देने से लोगों की प्यास बुझ जाएगी? उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में दर्जनों गांवों में पानी की टंकियां तो बन चुकी हैं और टोटियां भी लग गई हैं, लेकिन उनमें पानी का नामोनिशान नहीं है।
इस तीखे सवाल पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी गुणवत्ता से समझौता हुआ है या भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती हैं, तो सरकार इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने से पीछे नहीं हटेगी। हालांकि, सत्तापक्ष के ही विधायक द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने से विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार मिल गया है।
भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस शासनकाल के पाप भुगत रही जनता’
इस पूरे विवाद पर भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा प्रवक्ताओं और मंत्रियों का स्पष्ट कहना है कि जल जीवन मिशन में जितनी भी गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वे सभी भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान बोए गए बीज हैं। तत्कालीन सरकार के समय ही पटना की विवादित कंपनी एनएनटी डेवलपर्स जैसी बाहरी एजेंसियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों के ठेके बांटे गए थे।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि वर्तमान साय सरकार लगातार इन गड़बड़ियों को सुधारने का प्रयास कर रही है। अब तक लापरवाही बरतने वाले 1000 से अधिक ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है, 122 से अधिक ठेका अनुबंध निरस्त किए गए हैं और कई दागी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। सरकार का दावा है कि वे हर हाल में भ्रष्ट तंत्र को साफ करके रहेंगे।
कांग्रेस का आरोप: ‘जांच से भाग रही है सरकार’
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे वर्तमान सरकार की प्रशासनिक विफलता छुपाने का प्रयास बताया है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि केंद्र में और राज्य में दोनों जगह भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार होने के बावजूद छत्तीसगढ़ की जनता पानी के लिए तरस रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि यदि सरकार वास्तव में ईमानदार है, तो वह इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराए।
कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान सरकार ने दुर्भावना के तहत कई ईमानदार स्थानीय ठेकेदारों के भुगतान रोक रखे हैं, जिससे योजना का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ को जल जीवन मिशन में देश के अग्रणी राज्यों में लाकर खड़ा किया था, जिसे वर्तमान सरकार ने पूरी तरह पटरी से उतार दिया है।
जमीनी हकीकत: ‘नल है पर जल नहीं’, पानी के लिए रात 3 बजे की जंग
राजनीतिक दावों और प्रतिदावों से इतर, छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण अंचलों में महिलाएं आज भी पानी के लिए कड़ा संघर्ष कर रही हैं। सरगुजा से लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और राजनांदगांव के गांवों में महिलाएं भीषण गर्मी और उमस के बीच रात के 3 बजे उठकर दूर-दराज के हैंडपंपों से पानी लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का दर्द है कि उनके आंगनों में बेहद खूबसूरती से सीमेंट के चबूतरे बनाए गए और उन पर चमचमाती पीतल की टोटियां कसी गईं। दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘जल ही जीवन है’ के नारे भी लिख दिए गए, लेकिन उन नलों से आज तक पानी की एक बूंद नहीं टपकी। लोगों का कहना है कि इस ‘कागजी विकास’ ने उनकी उम्मीदों को तोड़कर रख दिया है।
जल जीवन मिशन 2.0 और सुधार की नई उम्मीदें
इस चौतरफा घमासान के बीच, छत्तीसगढ़ सरकार ने अब जल जीवन मिशन 2.0 के तहत एक नई कार्ययोजना तैयार की है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई हालिया उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब इन पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव (Operation and Maintenance) की पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी।
इसके साथ ही, योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) को अनिवार्य किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब तक इस योजना में सीधे तौर पर स्थानीय जनता और पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक इस तरह के लीकेज और भ्रष्टाचार को पूरी तरह से रोक पाना असंभव होगा।



