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शिक्षा के साये में शराब का ठेका: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा स्कूलों के पास शराब दुकानों का मुद्दा, लैलूंगा विधायक ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा स्कूलों के पास शराब दुकानों का मुद्दा। लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने सरकार को घेरा। जानिए आबकारी मंत्री ने क्या दिया आश्वासन और क्या है जमीनी हकीकत।







15 जुलाई 2026, रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान आज प्रदेश की संवेदनशील शैक्षणिक व्यवस्था और उसके आसपास संचालित होने वाली शराब दुकानों का गंभीर मुद्दा गूंजा। लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र की विधायक विद्यावती सिदार ने सदन में ध्यानाकर्षण के जरिए इस विषय को बेहद मजबूती से उठाया। उन्होंने सरकार से सीधे तौर पर सवाल किया कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो रिहायशी इलाकों और स्कूलों के ठीक सामने शराब की दुकानें क्यों संचालित की जा रही हैं?

इस तीखे सवाल ने सदन के भीतर की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक बढ़ा दिया। विपक्ष के कई अन्य विधायकों ने भी सुर में सुर मिलाते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास खुली शराब दुकानों की लंबी सूची गिना दी। यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य के हजारों नौनिहालों के भविष्य और उनके शैक्षणिक परिवेश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

लैलूंगा में कलेक्टर को आवेदन के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

विधायक विद्यावती सिदार ने सदन को अवगत कराया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र लैलूंगा के शहरी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में धड़ल्ले से शराब की दुकानें चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इन दुकानों की वजह से पास में स्थित स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं को भारी मानसिक प्रताड़ना और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है जिससे पूरा माहौल दूषित हो चुका है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि वहां की स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा इन दुकानों को हटाने के लिए जिला कलेक्टर को बाकायदा लिखित आवेदन सौंपे गए थे। इसके बावजूद, हफ्तों बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विधायक ने मंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या वे जनता की इस जायज मांग पर तत्काल कोई दंडात्मक या सुधारात्मक कदम उठाएंगे?

आबकारी मंत्री का आश्वासन: पूरे प्रदेश में कराया जा रहा है परीक्षण

विधायक सिदार के इस तीखे सवाल पर जवाब देने के लिए आबकारी मंत्री ने मोर्चा संभाला। मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार बच्चों की शिक्षा और उनके परिवेश को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने माना कि नियमों के विपरीत चल रही किसी भी दुकान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने आगे बताया कि केवल लैलूंगा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस प्रकार की सभी शिकायतों को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में बहुत बारीकी से परीक्षण करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिन-जिन स्थानों पर इस प्रकार की आपत्तियां आई हैं, वहां सर्वे की प्रक्रिया अंतिम दौर में है और कलेक्टरों द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

नियम क्या कहते हैं और धरातल पर क्या है सच्चाई?

आबकारी नीति के नियमों के मुताबिक, किसी भी शासकीय या निजी स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थल और मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) से एक निर्धारित दूरी के भीतर शराब की दुकान खोलने की सख्त मनाही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की भावी पीढ़ी किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या नशे के माहौल से दूर रहकर शांत वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सके।

लेकिन जमीनी हकीकत इन कागजी नियमों से कोसों दूर नजर आती है। प्रदेश के कई बड़े शहरों जैसे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और रायगढ़ के अंदरूनी इलाकों में आज भी ऐसी कई शराब दुकानें हैं, जो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए स्कूल की दीवारों से महज कुछ ही मीटर की दूरी पर संचालित हो रही हैं। दोपहर के समय जब स्कूलों की छुट्टी होती है, तब इन दुकानों पर शराबियों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसके कारण छोटे बच्चों और विशेष रूप से छात्राओं को वहां से गुजरने में भारी शर्मिंदगी और डर का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक संगठनों और पालकों का बढ़ रहा है असंतोष

विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों और पलक संघों (Parents Associations) ने भी लैलूंगा विधायक की पहल का स्वागत किया है। पालकों का कहना है कि वे हर महीने स्कूल की भारी-भरकम फीस चुकाते हैं ताकि उनके बच्चे को एक अच्छा माहौल मिल सके, लेकिन स्कूल के ठीक बाहर लगे शराब के ठेके उनके सारे प्रयासों पर पानी फेर देते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल विधानसभा में आश्वासन देने से कुछ नहीं बदलेगा, जब तक कि अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती। यदि किसी स्कूल के पास दुकान चल रही है, तो उस क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक और कलेक्टर के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इस दुकान को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया था।

अब आगे क्या? कलेक्टरों की रिपोर्ट पर टिकी हैं निगाहें

आबकारी मंत्री द्वारा सदन में दिए गए बयान के बाद अब सबकी निगाहें राज्य के सभी जिला कलेक्टरों द्वारा सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिक गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग को त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या सरकार वास्तव में इन नियमों का कड़ाई से पालन करवाते हुए इन अवैध दूरी पर स्थित दुकानों को किसी अन्य दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरित (Shift) करती है, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा। बहरहाल, लैलूंगा विधायक द्वारा उठाए गए इस कदम ने उन हजारों बेआवाज स्कूली बच्चों और उनके चिंतित माता-पिता को एक नई उम्मीद जरूर दी है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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