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अंधविश्वास का खौफनाक खेल: संतान सुख के नाम पर तंत्र-मंत्र का झांसा देकर दंपती से डेढ़ करोड़ की ठगी, महिला आयोग के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन सख्त

जगदलपुर में वन रक्षक और उसकी पत्नी पर लगा सम्मोहन और ताबीज के नाम पर जमा पूंजी लूटने का संगीन आरोप, पुलिस कप्तान और अपर कलेक्टर को जांच के कड़े आदेश।







रायपुर, 2 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले जगदलपुर से अंधविश्वास और धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक और सामाजिक अमले को झकझोर कर रख दिया है।

संतान सुख दिलाने और परिवार पर मंडरा रहे कथित संकट को दूर करने के नाम पर तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और विशेष गुप्त पूजा का भयानक झांसा देकर एक पीड़ित दंपती से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित ठगी की गई है। यह पूरा मामला अब छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के समक्ष पहुंच चुका है, जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने तत्काल कड़े निर्देश जारी किए हैं।

महिला आयोग ने प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर और आपराधिक कृत्य माना है। आयोग की अध्यक्ष ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक जगदलपुर को इस मामले में तत्काल धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही पुलिस को पूरी विवेचना कर विस्तृत जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। दूसरी ओर, वित्तीय अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति के मामले को देखते हुए अपर कलेक्टर सीपी बघेल को आरोपितों की समस्त चल-अचल संपत्ति की सघन जांच करने के आदेश दिए गए हैं।

संतान सुख की चाहत में ऐसे शुरू हुआ अंधविश्वास का यह खौफनाक चक्रव्यूह

पीड़ित महिला द्वारा राज्य महिला आयोग के समक्ष दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के अनुसार, उनका विवाह वर्ष 2008 में हुआ था। विवाह के कई वर्षों बाद तक जब उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ, तो दंपती ने विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में अपना इलाज कराना शुरू किया। चिकित्सीय जांच के दौरान पता चला कि महिला पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम नामक बीमारी से पीड़ित थीं। इस शारीरिक समस्या के बीच एक बार उनका गर्भपात भी हो गया, जिसके बाद महिला मानसिक रूप से अत्यंत परेशान और संवेदनशील स्थिति में चली गईं।

इसी मानसिक लाचारी और तनाव के दौर में पीड़ित दंपती की मुलाकात वन विभाग में पदस्थ एक सरकारी कर्मचारी से हुई। मुख्य आरोपित की पहचान डूमर राम नायक के रूप में हुई है, जो कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वन रक्षक के पद पर कार्यरत है। इस घिनौने खेल में उसकी पत्नी शिखा नायक भी बराबर की भागीदार थी। आरोप है कि इन दोनों ने महिला की मानसिक और शारीरिक स्थिति का नाजुक फायदा उठाते हुए दावा किया कि वे विशेष तांत्रिक पूजा, दुर्लभ धार्मिक सामग्रियों और जड़ी-बूटियों के माध्यम से उन्हें शत-प्रतिशत संतान सुख दिला सकते हैं।

ताबीज, ताम्रपत्र और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के नाम पर साल दर साल लूटी गई गाढ़ी कमाई

शिकायतकर्ता महिला ने महिला आयोग के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2021 के बीच यानी लगभग छह सालों तक आरोपितों ने उन पर अपने अंधविश्वास का जाल बुने रखा। इस दौरान कभी ताबीज बदलने, कभी ताम्रपत्र सिद्ध करने, तो कभी हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियां मंगाने और बड़े तांत्रिक अनुष्ठान आयोजित करने के नाम पर लगातार किस्तों में मोटी रकम वसूली गई।

संतान की चाहत में पीड़ित दंपती इस कदर अंधविश्वास के जाल में फंस चुका था कि उन्होंने आरोपितों की हर मांग को बिना सोचे-समझे पूरा करना शुरू कर दिया। इस प्रक्रिया में दंपती ने बैंक में रखी अपनी जीवन भर की जमा पूंजी खर्च कर दी, अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी तक तुड़वा दी। जब इतने से भी आरोपितों का पेट नहीं भरा, तो पीड़ित दंपती ने अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद और कीमती आभूषण तक बेच दिए। शिकायत में दावा किया गया है कि अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि इन आरोपितों को नगद और अन्य माध्यमों से दी गई।

पीड़िता के पैसों से खड़ी की गई करोड़ों की अचल संपत्ति और लग्जरी गाड़ियां

पीड़ित महिला ने महिला आयोग के समक्ष यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया है कि उनसे ठगी गई भारी रकम का उपयोग कर वन रक्षक और उसकी पत्नी ने बेहद कम समय में अकूत संपत्ति खड़ी कर ली। इस अवैध कमाई के जरिए आरोपितों ने आड़ावाल के कुसुमपाल क्षेत्र में एक भव्य और आलीशान मकान का निर्माण कराया, जिसकी अनुमानित लागत करीब 40 से 50 लाख रुपये बताई जा रही है।

इतना ही नहीं, ठगी के पैसों से आरोपितों ने एक के बाद एक दो नई लग्जरी कारें भी खरीदीं। पीड़िता का आरोप है कि चालाकी दिखाते हुए आरोपितों ने पीड़ित दंपती की एक कीमती जमीन के मूल दस्तावेज भी जबरन अपने पास गिरवी के तौर पर रख लिए हैं। इस प्रकार एक तरफ जहां पीड़ित दंपती पाई-पाई के लिए मोहताज हो गया, वहीं दूसरी तरफ एक मामूली सरकारी वेतन पाने वाला वन रक्षक रातों-रात करोड़पति बन गया।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में घिरे वन रक्षक की नौकरी पर भी मंडराया खतरा

इस पूरे मामले में प्रशासनिक दृष्टिकोण से सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपित के सरकारी पद और उसके वेतन की तुलना उसकी संपत्ति से की गई। महिला आयोग की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मुख्य आरोपित डूमर राम नायक वन विभाग के कांगेर घाटी क्षेत्र में एक साधारण वन रक्षक है। शासकीय आंकड़ों के अनुसार उसका कुल मासिक वेतन मात्र 43 हजार रुपये के आसपास है।

महिला आयोग ने इस बिंदु को अत्यंत गंभीर माना कि एक सरकारी कर्मचारी जिसका मासिक वेतन महज 43 हजार रुपये हो, वह अपने सेवाकाल में करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति, आलीशान मकान और लग्जरी गाड़ियां कैसे खरीद सकता है। इसी के मद्देनजर आयोग ने इसे पूरी तरह से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला मानते हुए जिला प्रशासन को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

महिला आयोग के कड़े तेवर: एसपी और अपर कलेक्टर को एक महीने के भीतर देनी होगी रिपोर्ट

मामले की पूरी गंभीरता को परखने के बाद राज्य महिला आयोग की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। आयोग ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह से प्रथम दृष्टया सत्य प्रतीत होते हैं और इनकी एक स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच होना जनहित में आवश्यक है। अंधविश्वास के नाम पर समाज में इस तरह की लूट को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इसी कड़े रुख के चलते आयोग ने जगदलपुर के अपर कलेक्टर सीपी बघेल को एक विशेष जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है। अपर कलेक्टर को आदेशित किया गया है कि वे आरोपित वन रक्षक और उसकी पत्नी की सभी चल-अचल संपत्तियों का भौतिक और सरकारी मूल्यांकन करें। साथ ही उनके द्वारा खरीदी गई जमीनों और संपत्तियों के रजिस्ट्री दस्तावेजों की बारिकी से जांच की जाए कि इसके लिए पैसा कहां से आया। प्रशासन को इस पूरे वित्तीय मूल्यांकन की सीलबंद रिपोर्ट एक माह के भीतर महिला आयोग के समक्ष अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी।

साथ ही, जगदलपुर पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और डराने-धमकाने की सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें। पुलिस को इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट आयोग को सौंपने के लिए बाध्य किया गया है। इस कार्रवाई से बस्तर संभाग के उन तांत्रिकों और ढोंगियों में हड़कंप मच गया है जो सीधे-साधे लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाते हैं।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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