बिलासपुर में कोचिंग संस्थानों की जांच से हड़कंप: लखनऊ अग्निकांड के बाद जागा प्रशासन, एक संस्थान सील, कई अन्य को नोटिस से मचा हड़कंप
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर के भीतर भड़की भीषण और दर्दनाक आग में 15 मासूम बच्चों की असमय मौत के बाद आखिरकार बिलासपुर जिला प्रशासन और नगर निगम की नींद खुल गई है। न्यायधानी बिलासपुर में कोचिंग संस्थानों की जांच से हड़कंप मच गया है, जिसके तहत कई बड़े केंद्रों पर छापेमारी कर सुरक्षा मानकों को परखा जा रहा है।

लखनऊ की इस भयावह त्रासदी से सबक लेते हुए बिलासपुर जिला प्रशासन और नगर पालिक निगम के संयुक्त दस्ते ने शहर के भीतर संचालित होने वाले तमाम शैक्षणिक और व्यावसायिक कोचिंग सेंटरों के खिलाफ एक बड़ा और सघन निरीक्षण अभियान छेड़ दिया है। इस औचक कार्रवाई के चलते पूरे शहर के कोचिंग संचालकों के भीतर भारी खलबली मच गई है।
वर्तमान में बिलासपुर में कोचिंग संस्थानों की जांच से हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि प्रशासन ने अब तक शहर के छह बड़े और नामचीन कोचिंग संस्थानों को अपने रडार पर लेते हुए कड़ी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। इन छह संस्थानों के गहन भौतिक सत्यापन के दौरान भारी अनियमितताएं और सुरक्षा मानकों में घोर लापरवाही पाई गई है।
प्रशासनिक टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले एक कोचिंग संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है, जबकि पांच अन्य प्रमुख संस्थानों को कड़ा कानूनी नोटिस थमा दिया है। इन संस्थानों को अपने परिसरों के भीतर अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और अन्य आवश्यक बुनियादी नागरिक सुविधाओं में व्यापक सुधार करने के लिए एक बेहद सीमित समय सीमा (डेडलाइन) दी गई है।
जांच के दायरे में आएंगे शहर के सभी कोचिंग सेंटर: प्रशासन का सख्त रुख
बिलासपुर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और नगर निगम कमिश्नर ने संयुक्त रूप से यह पूरी तरह से साफ कर दिया है कि यह दंडात्मक कार्रवाई केवल कुछ चुनिंदा संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले दिनों में शहर के भीतर गली-मोहल्लों और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों में संचालित होने वाले शत-प्रतिशत सभी छोटे-बड़े कोचिंग संस्थानों को इस सघन जांच के दायरे में अनिवार्य रूप से लाया जाएगा।
कलेक्टर कार्यालय से जारी निर्देशों के मुताबिक, यदि किसी भी संस्थान में सुरक्षा को लेकर थोड़ी सी भी तकनीकी खामी या लापरवाही उजागर होती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी सामाजिक या राजनीतिक दबाव के तत्काल कड़ी दंडात्मक और वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का साफ कहना है कि मासूम बच्चों की अनमोल जिंदगियों के साथ किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जा सकती।
मंगलवार को चंद्रा एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल समेत कई बड़े सेंटरों पर छापा
प्रशासनिक टीम ने अपनी सुनियोजित कार्ययोजना के तहत बीते मंगलवार को शहर के सबसे व्यस्त और शैक्षणिक हब माने जाने वाले इलाकों में एक साथ औचक दबिश दी। इस छापामार कार्रवाई के दौरान टीम ने बिलासपुर के अत्यंत प्रतिष्ठित और भीड़भाड़ वाले संस्थानों जैसे चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग और पटेल ट्यूटोरियल के परिसरों का बारीकी से भौतिक निरीक्षण किया।
इस उच्च स्तरीय टीम में राजस्व विभाग के अधिकारी, नगर निगम के भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियर और फायर सेफ्टी विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ विशेष रूप से शामिल थे। टीम ने इन सभी सेंटरों के भीतर जाकर वहां उपलब्ध वर्तमान अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं, कमरों के आकार, वेंटिलेशन और छात्रों की बैठक क्षमता की कड़े मापदंडों पर विस्तृत जांच की।
भवन अनुज्ञा, आपातकालीन निकास और फायर उपकरणों की हुई गहन पड़ताल
इस औचक निरीक्षण अभियान के दौरान जांच दल ने मुख्य रूप से चार बड़े और संवेदनशील बिंदुओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया:
- भवन अनुज्ञा (Building Permission): क्या कोचिंग संस्थान जिस बहुमंजिला इमारत या परिसर में संचालित हो रहे हैं, उसके पास नगर निगम से वैध व्यावसायिक उपयोग और शैक्षणिक संचालन की आधिकारिक अनुमति है या नहीं।
- आपातकालीन निकास (Emergency Exit): किसी भी अप्रिय दुर्घटना या आगजनी की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भवन में पर्याप्त चौड़े आपातकालीन द्वार, सीढ़ियां या सुरक्षित मार्ग उपलब्ध हैं या नहीं। अधिकांश मामलों में पाया गया कि सीढ़ियां बेहद संकरी थीं।
- अग्निशमन उपकरण (Fire Fighting Equipment): परिसरों में स्थापित फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक सिलेंडर), स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी की बौछार करने वाले हाइड्रेंट चालू हालत में हैं या नहीं और क्या वहां के स्टाफ को उन्हें चलाना आता है।
- अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाएं: छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल, उचित वेंटिलेशन, पर्याप्त शौचालय और बिजली के तारों की सुरक्षित फिटिंग (कंसील्ड वायरिंग) की व्यवस्था की भी गहनता से जांच की गई।
जिन संस्थानों में इन आवश्यक मानकों में गंभीर कमियां या तकनीकी सुधार की आवश्यकता पाई गई, उन्हें नगर निगम की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समयावधि के भीतर इन सभी कमियों को दूर कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
कोचिंग संचालकों को दी गई अंतिम चेतावनी
निरीक्षण दल का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों ने सभी कोचिंग संचालकों की एक आकस्मिक बैठक लेकर उन्हें दोटूक शब्दों में अंतिम चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि लखनऊ जैसी दर्दनाक घटना की पुनरावृत्ति बिलासपुर में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बेसमेंट या बिना वेंटिलेशन वाले संकरे कमरों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
सभी संचालकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से आपदा प्रबंधन और फायर फाइटिंग उपकरणों को संचालित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव कार्य शुरू किया जा सके। तय समय सीमा के बाद दोबारा होने वाले औचक निरीक्षण में यदि सुधार नहीं पाया गया, तो उन संस्थानों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा।
अभिभावकों में भी जागी चिंता, सुरक्षा ऑडिट की मांग तेज
लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी इस भीषण आग की घटना के बाद से बिलासपुर के स्थानीय पालकों और अभिभावकों के भीतर भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता और डर देखा जा रहा है। पालकों के विभिन्न संगठनों ने जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए मांग की है कि केवल कोचिंग संस्थान ही नहीं, बल्कि शहर में संचालित होने वाले निजी स्कूलों, हॉस्टलों और पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का भी अनिवार्य रूप से व्यापक सुरक्षा और फायर ऑडिट कराया जाना चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि वे भारी-भरकम फीस चुकाकर अपने बच्चों को सुनहरे भविष्य के लिए भेजते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संस्थानों और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है।



