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रायपुर के खरोरा में अवैध मतांतरण पर बड़ा एक्शन: आदिवासियों की शिकायत पर पास्टर सुशांत ज्ञानिक सहित दो आरोपी गिरफ्तार, धार्मिक भावनाएं आहत करने का गंभीर मामला दर्ज

रायपुर ग्रामीण के खरोरा थाना क्षेत्र के ग्राम मांठ में भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराने और हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य पास्टर और उसके सहयोगी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।







रायपुर 25 जून 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने का एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। रायपुर ग्रामीण के अंतर्गत आने वाले खरोरा थाना क्षेत्र के ग्राम मांठ में सामाजिक सौहार्द और धार्मिक ताने-बाने को ठेस पहुंचाने की एक बड़ी कोशिश को ग्रामीणों की सतर्कता के कारण नाकाम कर दिया गया। गांव के आदिवासी मोहल्ले में रहने वाले स्थानीय निवासियों और जनजातीय समाज के प्रमुख लोगों की सजगता तथा लिखित शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हुआ।

रायपुर के खरोरा में अवैध मतांतरण पर बड़ा एक्शन लेते हुए खरोरा थाना पुलिस ने इस घिनौने कृत्य में संलिप्त मुख्य आरोपी पास्टर सुशांत ज्ञानिक और उसके एक सक्रिय सहयोगी पीयूष पटेल को रंगे हाथों धर दबोचा है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम (Amended Religious Freedom Act) की विभिन्न कड़े प्रावधानों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें विधि सम्मत तरीके से सलाखों के पीछे भेज दिया है।

इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं हिंदू संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस की इस त्वरित और निष्पक्ष भूमिका की सराहना की है। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से गांव में अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो सके।

लिखित आवेदन के बाद हरकत में आई खरोरा पुलिस: पीड़ितों ने बयां की दास्तान

खरोरा थाना प्रभारी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी दंडात्मक कार्रवाई ग्राम मांठ के ही सजग निवासियों द्वारा प्रस्तुत किए गए एक विस्तृत और हस्ताक्षरित लिखित आवेदन के बाद शुरू हुई। ग्राम मांठ के निवासी हेमंत मरावी ने समाज के अन्य प्रबुद्ध नागरिकों जैसे अरुण कुमार उइके और राकेश कुमार उइके के साथ मिलकर व्यक्तिगत रूप से खरोरा थाने का घेराव किया और वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत पत्र सौंपा।

शिकायत पत्र में पीड़ितों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्य शहर रायपुर का रहने वाला पास्टर सुशांत ज्ञानिक और उसका स्थानीय सहयोगी पीयूष पटेल पिछले कुछ समय से गांव के भीतर अवैध रूप से सक्रिय थे। ये दोनों आरोपी मिलकर लगातार गांव के सबसे पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी मोहल्ले में योजनाबद्ध तरीके से आ-जा रहे थे। दोनों आरोपी ग्रामीण अंचल के सीधे-साधे और अनपढ़ आदिवासियों से विभिन्न बहानों से संपर्क स्थापित कर उन्हें अपनी मीठी-मीठी बातों के जाल में फंसाते थे। वे ग्रामीणों को अपना मूल सनातन हिंदू धर्म छोड़कर पूरी तरह से ईसाई धर्म अपनाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन देकर प्रेरित करते थे।

हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियों से भड़का ग्रामीणों का आक्रोश

लिखित शिकायत पत्र में शिकायतकर्ताओं और पीड़ित आदिवासियों ने एक बेहद चौंकाने वाला और आपत्तिजनक आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि ये दोनों आरोपी जब भी आदिवासी मोहल्ले के किसी घर में गुप्त प्रार्थना सभा या सामाजिक बैठक आयोजित करते थे, तो उस दौरान वे सोची-समझी रणनीति के तहत सनातन हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और पूजनीय हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक, अमर्यादित और घोर आपत्तिजनक टिप्पणियां किया करते थे।

आरोपियों द्वारा किए जाने वाले इस निरंतर दुष्प्रचार और धार्मिक आस्था पर चोट के कारण पिछले काफी समय से स्थानीय ग्रामीणों के मन में गहरा असंतोष और तीखा आक्रोश पनप रहा था। जब पानी सिर से ऊपर चला गया और आरोपियों की गतिविधियां हद से ज्यादा बढ़ गईं, तब ग्रामीणों ने आपस में बैठक कर कानून का सहारा लेने का ऐतिहासिक फैसला किया।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत कानूनी शिकंजा

मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए रायपुर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दिशा-निर्देश पर खरोरा थाना पुलिस ने बिना किसी देरी के मामले की प्रारंभिक जांच पूरी की। जांच में आरोपों की पुष्टि होते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों पास्टर सुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल को उनके ठिकानों से हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया है।

इन धाराओं के तहत किसी भी व्यक्ति को लालच, प्रलोभन, भय या कपटपूर्ण तरीकों से धर्म परिवर्तन कराना और किसी अन्य संप्रदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना एक गैर-जमानती और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि नए विधिक प्रावधानों के तहत इन आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलना लगभग तय है।

ग्राम मांठ और आस-पास के क्षेत्रों में हुई प्रशासनिक कार्रवाई का विवरण

नीचे दी गई तालिका के माध्यम से इस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रियाओं और घटनाक्रम से जुड़े मुख्य तथ्यों को आसानी से समझा जा सकता है:

क्र. सं.घटनाक्रम और विधिक कार्रवाई के मुख्य बिंदुमामले से जुड़े आधिकारिक विवरण और तथ्य
1.घटनास्थल और संबंधित थाना क्षेत्रग्राम मांठ, थाना खरोरा, रायपुर ग्रामीण, छत्तीसगढ़
2.गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों के नामपास्टर सुशांत ज्ञानिक (निवासी रायपुर) एवं सहयोगी पीयूष पटेल
3.मुख्य शिकायतकर्ता और ग्रामीण प्रतिनिधिहेमंत मरावी, अरुण कुमार उइके और राकेश कुमार उइके
4.आरोपियों का मुख्य निशाना और लक्षित क्षेत्रग्राम मांठ का आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी मोहल्ला
5.दर्ज किए गए कानूनों और अधिनियमों के प्रकारछत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS)
6.आरोपियों का मुख्य कृत्य और विधिक आरोपअवैध प्रलोभन द्वारा मतांतरण और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी
7.वर्तमान प्रशासनिक और न्यायिक स्थितिदोनों आरोपी न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे गए, गांव में पुलिस मुस्तैद

मिशनरी नेटवर्क और फंडिंग की जांच में जुटी स्पेशल विंग

रायपुर ग्रामीण पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रायपुर के खरोरा में अवैध मतांतरण पर बड़ा एक्शन होने के बाद अब इस पूरे नेक्सस की गहराई से पड़ताल की जा रही है। पुलिस की एक विशेष खुफिया विंग इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि रायपुर शहर से संचालित होने वाले इस मिशनरी नेटवर्क के तार कहीं अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय संगठनों से तो नहीं जुड़े हैं।

जांच दल आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) और उनकी हालिया संदिग्ध गतिविधियों के रिकॉर्ड खंगाल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भोले-भाले ग्रामीणों को बांटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रलोभनों (जैसे मुफ्त चिकित्सा, शिक्षा और नकद राशि) के लिए फंड कहां से आ रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि इस मामले में किसी भी बाहरी संगठन या विदेशी फंडिंग की संलिप्तता पाई जाती है, तो मामले में अन्य गंभीर धाराएं भी जोड़ी जाएंगी और सह-आरोपियों की भी धरपकड़ की जाएगी।

धार्मिक स्वतंत्रता कानून के कड़े क्रियान्वयन की उठी मांग

इस घटना के बाद से राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों में गहरी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जनजातीय सुरक्षा मंच और अन्य स्थानीय हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर मांग की है कि राज्य सरकार को बस्तर, सरगुजा के साथ-साथ रायपुर ग्रामीण के इन मैदानी इलाकों में भी चल रहे अवैध मतांतरण के खेल के खिलाफ एक विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन करना चाहिए।

संगठनों का कहना है कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून के नियमों को जमीनी स्तर पर और अधिक कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए ताकि कोई भी बाहरी तत्व आदिवासियों की संस्कृति, उनकी प्राचीन परंपराओं और उनके मूल धर्म के साथ खिलवाड़ न कर सके। ग्राम मांठ की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण अब अपने अधिकारों और अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर पूरी तरह से जागरूक हो चुके हैं।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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