अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन ShaktiSAT के लिए रायपुर की महिमा राजपूत का चयन, 108 देशों की छात्राओं के साथ मिलकर बनाएंगी सैटेलाइट
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल की 10वीं कक्षा की छात्रा महिमा राजपूत का चयन वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रम शक्तिसैट (ShaktiSAT) के लिए नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में हुआ है, जहां वह विश्वभर के 108 देशों की छात्राओं के साथ अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियों को सीखकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

महिमा का चयन देश के अत्यंत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन शक्तिसैट (ShaktiSAT) के लिए नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में हुआ है। अब वह विश्व के 108 देशों की चुनिंदा छात्राओं के साथ इस वैश्विक स्पेस साइंस मिशन का हिस्सा बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं।
कठिन चयन प्रक्रिया को पार कर बनाई जगह
इस महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए पूरे भारतवर्ष से हजारों मेधावी छात्राओं ने आवेदन किया था। चयन की प्रक्रिया बेहद जटिल और कई चरणों में विभाजित थी। महिमा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले मिशन शक्तिसैट के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा किया था। इसके बाद देश स्तर पर एक विशेष परीक्षा का आयोजन किया गया।
इस कठिन लिखित प्रतियोगिता को पास करने के बाद अंतिम चरण में एक कड़ा इंटरव्यू आयोजित हुआ, जिसमें तकनीकी और वैज्ञानिक समझ को परखा गया। इन सभी चरणों में अपनी प्रतिभा को साबित करते हुए महिमा ने अंतिम फाइनलिस्ट की सूची में अपना स्थान सुरक्षित किया। महिमा की इस सफलता से उनका परिवार, विद्यालय और पूरा छत्तीसगढ़ राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित होगा 8 दिवसीय स्पेस साइंस वर्कशॉप
इस मिशन के अगले चरण के तहत महिमा अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली एक विशेष 8 दिवसीय शक्तिसैट कार्यशाला (Workshop) में भाग लेंगी। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में अंतरिक्ष विज्ञान और स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यावहारिक पहलुओं का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां देश-विदेश के जाने-माने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सीधे मार्गदर्शन में छात्राओं को उपग्रह (सैटेलाइट) निर्माण, पेलोड डिजाइनिंग और अंतरिक्ष मिशन की वास्तविक प्रक्रियाओं को करीब से देखने और समझने का अनूठा अवसर प्राप्त होगा।
108 देशों की छात्राएं मिलकर तैयार करेंगी दो विशिष्ट सैटेलाइट
23 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण यह है कि इसमें दुनिया के 108 देशों की चयनित छात्राएं एक साथ मिलकर दो वास्तविक सैटेलाइट्स का निर्माण करेंगी। यह केवल एक शैक्षणिक गतिविधि या थ्योरी क्लास नहीं होगी, बल्कि एक वास्तविक अंतरिक्ष परियोजना पर काम करने का व्यावहारिक अनुभव होगा।
इस दौरान छात्राओं को सैटेलाइट के डिजाइन, हार्डवेयर असेंबली, कोडिंग, तकनीकी विश्लेषण और मिशन की रणनीतिक योजना से जुड़ी विभिन्न कड़ियों में सक्रिय रूप से काम करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
एक उपग्रह चांद की कक्षा में, दूसरा सतह के लिए होगा विकसित
इस मिशन के तहत तैयार किए जा रहे दोनों उपग्रहों का उद्देश्य बेहद अनूठा और चुनौतीपूर्ण है। वैज्ञानिकों द्वारा तय योजना के अनुसार, इन दोनों में से एक उपग्रह को चंद्रमा की कक्षा (Lunar Orbit) में स्थापित किया जाएगा, जबकि दूसरा उपग्रह चांद की सतह पर उतरने (Lunar Landing) के विशिष्ट उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
इस तरह भाग लेने वाली छात्राएं न केवल सैटेलाइट बनाना सीखेंगी, बल्कि भविष्य के जटिल चंद्र अभियानों से जुड़ी वास्तविक वैज्ञानिक चुनौतियों और पर्यावरणीय परिस्थितियों का व्यावहारिक अध्ययन भी कर सकेंगी।
अक्टूबर 2026 में श्रीहरिकोटा के ISRO केंद्र से होगी लॉन्चिंग
छात्राओं द्वारा तैयार किए जा रहे इन दोनों महत्वाकांक्षी उपग्रहों का प्रक्षेपण अक्टूबर 2026 में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (ISRO Launch Pad) से किया जाना प्रस्तावित है। अंतरिक्ष अनुसंधान और डीप-टेक में रुचि रखने वाले स्कूली बच्चों के लिए यह अवसर किसी सपने के सच होने जैसा है। महिमा राजपूत भी अब इस ऐतिहासिक और गौरवशाली मिशन का सीधा हिस्सा बनने जा रही हैं, जो उनके सपनों को उड़ान देने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ जोड़ देगा।
शिक्षकों और परिवार के मार्गदर्शन से मिली सफलता
महिमा राजपूत एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं, उनके पिता एक निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं और माता गृहणी हैं। महिमा ने अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय अपने परिवार के अटूट विश्वास, स्कूल की शिक्षिका योगेश्वरी लहरी और प्राचार्या जॉली साहू को दिया है।
उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया से लेकर इंटरव्यू की तैयारियों तक उनकी शिक्षिका ने उनका लगातार मार्गदर्शन किया। इसके साथ ही विद्यालय प्रबंधन ने उन्हें हर स्तर पर पूरा सहयोग प्रदान किया, जिसके कारण आज एक सरकारी स्कूल की छात्रा इस अंतरराष्ट्रीय मुकाम को हासिल करने में कामयाब रही है।
प्रशासनिक सेवा में जाने का है लक्ष्य
अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए महिमा ने बताया कि उनकी रुचि पेंटिंग और कहानी लेखन (Story Writing) में भी है। अंतरिक्ष विज्ञान के इस बड़े मंच पर पहुंचने के बावजूद उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाकर देश की सेवा करना है। हाल ही में उन्होंने रायपुर कलेक्टर से भी मुलाकात की, जहां जिला प्रशासन ने उन्हें इस अद्वितीय गौरव के लिए सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
क्या है मिशन शक्तिसैट (Mission ShaktiSAT)
मिशन शक्तिसैट मूल रूप से एरोस्पेस अनुसंधान संस्था स्पेस किड्ज इंडिया (Space Kidz India) द्वारा संचालित एक वैश्विक पहल है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इन-स्पेस (IN-SPACe) का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की लगभग 12,000 छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और वैज्ञानिक नवाचारों (Innovations) से सीधे जोड़ना है।
इसका उद्देश्य केवल थ्योरी पढ़ाना नहीं, बल्कि स्टेम (STEM – Science, Technology, Engineering, and Mathematics) शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं की भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाना और भविष्य की महिला वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं को तैयार करना है।



