Special Report: छत्तीसगढ़ में न हो लखनऊ एवं दिल्ली जैसी अग्नि त्रासदी: लालगंगा मॉल और बेबीलोन टावर के हादसों से सबक ले रायपुर प्रशासन; मॉक ड्रिल और ‘थ्री-लेयर’ ग्राउंड ऑडिट को बनाए अनिवार्य नियम
सिर्फ हादसों के बाद जागने की रवायत बदले जिला प्रशासन; मॉल, अस्पताल, मैरिज पैलेस, मल्टीप्लेक्स, BnB होटल्स और कमर्शियल हब्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर महीने हो जमीनी चेकिंग।

रायपुर, 24 जून 2026 : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में लगी भीषण आग और मासूम जिंदगियों के असमय खात्मे ने एक बार फिर पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ऐसी दर्दनाक घटनाएं चीख-चीखकर प्रशासनिक व्यवस्था को उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराती हैं।
इस गंभीर पृष्ठभूमि में यह विशेष समाचार रिपोर्ट राजधानी रायपुर के प्रशासनिक अमले—जिला प्रशासन, नगर पालिक निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और फायर ब्रिगेड विभाग को पूरी तरह जागृत करने और सतर्क रहने का एक गंभीर आह्वान है।
इस रिपोर्ट का एकमात्र ध्येय यह है कि हमारे सिस्टम में यदि कहीं भी कोई ढील या लापरवाही है, तो उसे तुरंत दुरुस्त (टाइट) किया जाए, ताकि रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ में कभी भी ऐसा कोई कांड या जनहानि की दुर्घटना न घटे।
रायपुर आज मध्य भारत के एक बड़े कमर्शियल, मेडिकल और एजुकेशन हब के रूप में तेजी से विकसित हो चुका है। यहां रोजाना लाखों लोग बहुमंजिला इमारतों, शॉपिंग मॉल्स, मैरिज पैलेसों और अस्पतालों में आते-जाते हैं।
ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा को लेकर रत्ती भर भी ढिलाई या उदासीनता भारी पड़ सकती है। प्रशासन को अब ‘हादसे के बाद जागने’ की पुरानी परिपाटी को बदलकर अग्रिम सुरक्षा (प्रिवेंटिव एक्शन) की दिशा में पूरी मुस्तैदी से काम करना होगा।
अतीत के वो प्रामाणिक और सत्यापित हादसे, जिनसे सबक लेना जरूरी है
रायपुर के व्यावसायिक इतिहास में आगजनी की कुछ ऐसी बड़ी और रिकॉर्डेड घटनाएं हुई हैं, जो यह साबित करती हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। इन हादसों का स्मरण प्रशासन को सजग करने के लिए बेहद जरूरी है:
- जीई रोड स्थित लालगंगा शॉपिंग मॉल अग्निकांड: रायपुर के सबसे व्यस्त व्यापारिक इलाकों में शामिल जीई रोड पर स्थित ‘लालगंगा शॉपिंग मॉल’ में भीषण आगजनी की घटना सामने आई थी। मॉल के भीतर बने एक दफ्तर/दुकान से शुरू हुई यह आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे परिसर में काला धुआं भर गया था। इस हादसे के दौरान मॉल के भीतर कई लोग फंस गए थे, जिन्हें फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला था। इस प्रमाणित घटना ने शहर के शॉपिंग मॉल्स में वेंटिलेशन, फायर एग्जिट के ब्लॉक होने और आंतरिक सुरक्षा उपकरणों के काम न करने की पोल खोल दी थी।
- तेलीबांधा का बेबीलोन टावर अग्निकांड: राजधानी के व्यस्त तेलीबांधा इलाके में स्थित बहुमंजिला ‘बेबीलोन टावर’ में अचानक भड़की भीषण आग ने पूरे शहर को सहमा दिया था। शीशे की इस आधुनिक कॉरपोरेट बिल्डिंग में धुआं बाहर निकलने का उचित वेंटिलेशन न होने के कारण ऊपरी मंजिलों पर करीब 47 लोग फंस गए थे। हालांकि, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) ने तत्परता दिखाते हुए शीशे तोड़कर कड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी को सुरक्षित निकाला, लेकिन इस घटना ने बंद शीशे वाली इमारतों (Glass Facade Buildings) के सेफ्टी क्लीयरेंस पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
- घने बाजारों में शॉर्ट सर्किट की घटनाएं: इसके अलावा गोलबाजार, सदर बाजार, मालवीय रोड और पंडरी जैसे सघन व्यापारिक क्षेत्रों में भी समय-समय पर शॉर्ट सर्किट से आगजनी की घटनाएं आधिकारिक रूप से दर्ज की गई हैं, जहां तंग रास्तों के कारण फायर ब्रिगेड को पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
इन प्रामाणिक हादसों के बाद प्रशासन कुछ समय के लिए सक्रिय जरूर होता है, लेकिन समय बीतने के साथ ही मुस्तैदी फिर से फाइलों में दफन हो जाती है। लखनऊ की घटना के बाद अब समय आ गया है कि इस ढर्रे को बदला जाए।
हादसे का इंतजार क्यों? इन संवेदनशील व्यावसायिक स्थलों पर हो कड़ी निगरानी
अगर रायपुर को पूरी तरह सुरक्षित रखना है, तो हमें हर उस सार्वजनिक, निजी और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर कड़ी नजर रखनी होगी जहां लोगों की भारी आवाजाही होती है और जो सुरक्षा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील हैं:
- शॉपिंग मॉल्स, मल्टीप्लेक्स और गेमिंग ज़ोन: वीकेंड्स और त्योहारों पर इन जगहों पर हजारों की भीड़ होती है। फूड कोर्ट्स में बड़े पैमाने पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और गेमिंग ज़ोन में बच्चों की भारी मौजूदगी के बीच अत्यधिक इलेक्ट्रिक लोड रहता है। इनके सेंट्रलाइज्ड एसी प्लांट, वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास द्वारों की नियमित जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
- बजट और BnB (Bed and Breakfast) होटल्स तथा लॉज: दिल्ली के करोल बाग और कस्तूरबा गांधी मार्ग जैसे सघन क्षेत्रों में स्थित होटलों और विशेषकर BnB (बेड एंड ब्रेकफास्ट) होटल्स में पूर्व में हुए भीषण अग्निकांडों से सबक लेते हुए रायपुर प्रशासन को शहर की घनी बस्तियों में संचालित ऐसे सभी ठिकानों पर पैनी नजर रखनी होगी। नगर निगम और संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी, जिसके दायरे में ये BnB होटल्स आते हैं, वे इनके वैध कमर्शियल लाइसेंस, संकरी सीढ़ियों, आपातकालीन निकास और वेंटिलेशन का कड़ाई से परीक्षण करें। ‘होम स्टे’ या बजट स्टे के नाम पर बिना फायर एनओसी के चल रहे ऐसे स्थान मुसाफिरों के लिए डेथ ट्रैप साबित हो सकते हैं।
- मैरिज पैलेस, बैंक्वेट हॉल और उत्सव भवन: शादियों और सामाजिक आयोजनों के सीजन में इन स्थलों पर बड़े पैमाने पर अत्यधिक ज्वलनशील टेंट सामग्री, पर्दे, कारपेट और अस्थाई हैवी डेकोरेटिव लाइटिंग का उपयोग किया जाता है। अधिकांश मैरिज पैलेसों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के प्रवेश के लिए पर्याप्त चौड़े रास्ते और आंतरिक अग्निशमन इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी होती है।
- निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर्स: रिहायशी इलाकों में संचालित कई बहुमंजिला अस्पतालों में क्षमता से अधिक बेड होने के कारण इमरजेंसी इवैक्युएशन (लाचार मरीजों को बाहर निकालना) बेहद कठिन होता है। यहां के आईसीयू (ICU), क्रिटिकल केयर यूनिट्स और मेडिकल गैस पाइपलाइनों का लगातार बारीकी से निरीक्षण होना चाहिए।
- घने पारंपरिक बाजार और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स: सघन व्यापारिक गलियों में दुकानें और कॉम्प्लेक्स एक-दूसरे से सटे हुए हैं, जहां से बिजली के तारों का मकड़जाल गुजरा है। इन क्षेत्रों में तंग रास्तों के कारण आगजनी से निपटने के लिए विशेष हाइड्रेंट सिस्टम और निरंतर गश्त की आवश्यकता है।
नियमित ‘मॉक ड्रिल’ और ‘ऑन-GROUND रेगुलर इंस्पेक्शन’ से टाइट होगी व्यवस्था
प्रशासन को अपनी मुस्तैदी साबित करने के लिए केवल कार्यालयों में बैठकर फाइलें खंगालने या औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी करने का ढर्रा पूरी तरह बदलना होगा। रायपुर में किसी भी अप्रिय घटना को शून्य करने के लिए प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा जमीनी स्तर पर जाकर लगातार और समय-बद्ध (Periodic) जांच के साथ-साथ जागरूकता अभियानों पर काम करना होगा:
- मॉक ड्रिल का अनिवार्य आयोजन: केवल फायर सिलेंडर लगा देना काफी नहीं है। प्रशासन को नियम बनाना चाहिए कि हर बड़े मॉल, अस्पताल, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, मैरिज पैलेस, लॉज और BnB होटल्स में हर तीन महीने में फायर ब्रिगेड की मौजूदगी में ‘मॉक ड्रिल’ (आपातकालीन अभ्यास) का आयोजन किया जाए। इससे वहां मौजूद स्टाफ को यह पता रहेगा कि किसी आपातकालीन स्थिति में आम जनता को सुरक्षित बाहर कैसे निकालना है और उपकरणों का उपयोग कैसे करना है।
- फायर एनओसी (Fire NOC) का री-वेरिफिकेशन: बिल्डिंग में लगाए गए फायर एक्सटिंग्विशर केवल दीवारों की शोभा न बढ़ाएं, बल्कि वे चालू हालत में हों। वाटर स्प्रिंकलर, होज पाइप और फायर अलार्म का ऑन-स्पॉट भौतिक परीक्षण किया जाए।
- लाइसेंस और बिल्डिंग का रेगुलर इंस्पेक्शन: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम के नियमों के अनुसार हर कमर्शियल बिल्डिंग और होटल के पास वैध संचालन लाइसेंस होना चाहिए। जांच दल यह सुनिश्चित करे कि जो रास्ते नक्शे में ‘इमरजेंसी एग्जिट’ के लिए छोड़े गए थे, उन्हें किसी गोदाम या दुकान में तो तब्दील नहीं कर दिया गया है।
- अनिवार्य इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट: ८० प्रतिशत से अधिक आगजनी की घटनाएं शॉर्ट सर्किट की वजह से होती हैं। कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों और होटलों में एसी और बड़ी मशीनों के कारण लोड बढ़ जाता है। विद्युत सुरक्षा विभाग के कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर ट्रांसफार्मर और पैनल बोर्ड की ऑन-स्पॉट चेकिंग अनिवार्य की जाए।
रसूख पर भारी पड़े नियम: सख्त दंडात्मक कार्रवाई से ही रुकेगी लापरवाही
अतीत के हादसों से सबसे बड़ा सबक यही मिलता है कि सुरक्षा मानकों के साथ किया गया जरा सा भी समझौता कितना आत्मघाती हो सकता है। रायपुर प्रशासन की मुस्तैदी तभी सार्थक और प्रभावी होगी जब यह पूरी कार्रवाई बिना किसी राजनीतिक या रसूखदारों के दबाव के निष्पक्ष रूप से संचालित की जाए।
यदि निरीक्षण के दौरान कोई भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे केवल नोटिस देने के बजाय सीधे सीलिंग, लाइसेंस रद्दीकरण और एफआईआर (FIR) जैसी सक्षम दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जाना चाहिए।
राजधानी रायपुर के नागरिकों, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की जान की हिफाजत करना केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह एक सर्वोपरि मानवीय कर्तव्य है। उम्मीद है कि रायपुर का जिला प्रशासन और नगर निगम अमला इस रिपोर्ट की संवेदनशीलता को गंभीरता से लेगा, अपनी कार्यप्रणाली की ढील को पूरी तरह टाइट करेगा और शहर को हर प्रकार की दुर्घटना से मुक्त रखने के लिए आज से ही धरातल पर कड़े, निरंतर और मॉक ड्रिल जैसे प्रिकॉशनरी कदम उठाना सुनिश्चित करेगा।



