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छत्तीसगढ़ में PDS व्यवस्था वेंटिलेटर पर: मुख्य गोदामों में चावल ‘शून्य’, दाने-दाने को तरस रहे गरीब

कांग्रेस महामंत्री कन्हैया अग्रवाल का सरकार पर तीखा प्रहार, 48 घंटे में आपूर्ति न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी।





रायपुर । छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने राज्य की राशन वितरण व्यवस्था को ‘पूरी तरह ध्वस्त’ करार देते हुए सरकार की प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की तीन महीने का राशन एक साथ देने की घोषणा केवल ‘खोखली और प्रचार तक सीमित’ साबित हुई है।

​अग्रवाल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि राजधानी रायपुर के प्रमुख गोदामों—गुढ़ियारी, मंदिर हसौद और बिरगांव—में चावल का स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है। राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब मुख्य भंडारण केंद्रों (FCI/NAN) में ही राशन उपलब्ध नहीं है। स्थिति इतनी विकट है कि महीने की 20 तारीख बीत जाने के बाद भी हजारों गरीब परिवारों की थाली तक चावल, शक्कर और नमक नहीं पहुंच पाया है।

​कन्हैया अग्रवाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए वाहवाही लूट रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर राशन दुकानों से जरूरी सामग्री गायब है। उन्होंने बताया कि राशन की आपूर्ति न होने के कारण उचित मूल्य की दुकानों में रोज विवाद की स्थिति बन रही है। उपभोक्ता और दुकानदार आमने-सामने हैं, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ रहा है।

प्रदेश में गहराते राशन संकट के पीछे प्रशासनिक तंत्र की भारी विफलता साफ नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि सरकार ने तीन महीने का अग्रिम राशन देने की लोकलुभावन घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक बुनियादी तैयारी करना भूल गई। आज स्थिति यह है कि जहाँ कुछ केंद्रों में राशन का स्टॉक उपलब्ध भी है, वहां उचित मूल्य की दुकानों तक माल पहुंचाने के लिए परिवहन के साधन और गाड़ियां ही उपलब्ध नहीं हैं। शासन की इस घोर प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि चावल, शक्कर, नमक और मिट्टी तेल जैसी अनिवार्य वस्तुएं राशन दुकानों से पूरी तरह नदारद हैं। सरकार के ऊंचे वादे अब जनता के लिए जी का जंजाल बन गए हैं, क्योंकि कागजी योजनाएं हकीकत की कसौटी पर पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं।

सरकार के ‘उत्सवी स्वरूप’ पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश महामंत्री अग्रवाल ने कहा कि जब गरीब की बुनियादी जरूरतें ही पूरी नहीं हो रही हैं, तो जश्न का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए 48 घंटे का समय दिया है। अग्रवाल ने दो टूक कहा है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सभी केंद्रों और दुकानों में राशन की सुचारू आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो कांग्रेस कमेटी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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