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अनासर काल में महाप्रभु जगन्नाथ को लगा औषधीय काढ़े का भोग, विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा-नई पीढ़ी तक पहुंचाएं ये प्राचीन परंपराएं

देव स्नान के बाद एकांतवास में हैं भगवान,रायपुर के गायत्री नगर जगन्नाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़







रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में अनासर काल की प्राचीन एवं दिव्य परंपरा के अंतर्गत भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा को विधि-विधानपूर्वक औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर 108 पवित्र कलशों के जल से महास्नान के उपरांत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा को अस्वस्थ होने की मान्यता है। इसी कारण वे 15 दिनों तक अनासर (एकांतवास) में विराजमान रहते हैं। इस अवधि में भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए वर्जित रहते हैं और उनकी सेवा विशेष आयुर्वेदिक पद्धति से की जाती है।

उन्होंने बताया कि अनासर काल के तीसरे दिन भगवान को औषधीय जड़ी-बूटियों, देशी मसालों एवं प्राकृतिक फलों से तैयार विशेष काढ़े का भोग अर्पित किया जाता है। इस अवधि में भगवान को सामान्य छप्पन भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि स्वास्थ्य लाभ की भावना से औषधीय पेय एवं फलों का रस अर्पित किया जाता है। यह परंपरा सदियों से ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में चली आ रही है, जिसका पालन रायपुर के श्री जगन्नाथ मंदिर में भी पूर्ण श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ किया जाता है।

विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की प्रत्येक परंपरा मानव जीवन को स्वास्थ्य, सेवा, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती है। अनासर काल केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन मूल्यों का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इन प्राचीन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाएं और उनके संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करें।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अनासर काल की मर्यादाओं का पालन करते हुए भगवान जगन्नाथ की आराधना करें तथा आगामी भव्य रथयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें।

मंदिर में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा-अर्चना एवं विशेष सेवा-विधान के बीच भगवान को औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया गया।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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