देश की पहली हाई-स्पीड रेल में बिछ रहा हाई-टेक इलेक्ट्रिकल नेटवर्क, बिना रुकावट के दौड़ेगी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन
22 हजार स्टील खंभों और एडवांस जापानी तकनीक से लैस कॉरिडोर; भूकंप का पता चलते ही खुद-ब-खुद रुक जाएगी ट्रेन।

रायपुर । देश की महत्वाकांक्षी 508 किलोमीटर लंबी मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना पर सिविल निर्माण और ट्रैक बिछाने के साथ-साथ विद्युतीकरण का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन को बिजली देने के लिए देश में पहली बार अत्याधुनिक 2×25 kV ओवरहेड ट्रैक्शन (OHE) सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। यह तकनीक ट्रेन को बिना किसी पावर कट या स्पार्क के निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को नेशनल पावर ग्रिड से विशेष ग्रिड सब-स्टेशनों के ज़रिए जोड़ा जा रहा है, जहाँ से बिजली रणनीतिक रूप से बनाए जा रहे 14 ट्रैक्शन सब-स्टेशनों तक पहुँचेगी।
- महाराष्ट्र क्षेत्र (5 सब-स्टेशन): मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर और ठाणे डिपो।
- गुजरात क्षेत्र (9 सब-स्टेशन): वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, महेमदाबाद, अहमदाबाद और साबरमती डिपो।
जब ट्रेन एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में प्रवेश करेगी, तो विद्युत आपूर्ति में बदलाव इतनी सटीकता से होगा कि यात्रियों को इसका अहसास तक नहीं होगा। इसके अलावा, फॉल्ट आइसोलेशन और uninterrupted सप्लाई के लिए 31 स्विचिंग पोस्ट और स्टेशनों व सिग्नलिंग सिस्टम के संचालन के लिए 16 डिस्ट्रीब्यूशन सब-स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं।
बुलेट ट्रेन का इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर 1,125 ट्रैक किलोमीटर (डिपो सहित) में फैला होगा।
- इस विशाल नेटवर्क को सहारा देने के लिए 22,000 से अधिक स्टील के खंभे (मास्ट) और 25,700 से ज्यादा कैंटिलीवर असेंबली लगाई जा रही हैं।
- इन खंभों की ऊंचाई 10.5 से 14.5 मीटर (लगभग 3 से 4 मंजिल) है, जो भारत में पहली बार इस्तेमाल हो रहे एडवांस्ड कंपाउंड कैटेनरी सिस्टम को सपोर्ट करते हैं।
- प्रत्येक तार को बेहद सटीक मैकेनिकल टेंशन के साथ सेट किया गया है, ताकि ट्रेन का पैंटोग्राफ 320 किमी/घंटे की गति पर भी बिना किसी स्पार्क या पावर फ्लक्चुएशन के बिजली ले सके।
परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका बड़े पैमाने पर स्वदेशीकरण (Indigenisation) है।
हाई-स्पीड विद्युतीकरण के मुख्य ट्रांसफार्मर, OHE मास्ट पर लगने वाले क्रॉस आर्म्स, ग्राउंड वायर, प्रोटेक्शन वायर और फीडर वायर अब भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (E&M) कार्यों के उपकरण देश में बनने से भारतीय उद्योग को एडवांस्ड जापानी तकनीक का ट्रांसफर (Technology Transfer) हो रहा है। इससे आयात पर निर्भरता घटी है और भविष्य की हाई-स्पीड परियोजनाओं के लिए एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरे कॉरिडोर में 28 सीस्मोमीटर (Seismometers) लगाए जा रहे हैं, जो भूकंप के झटकों का तुरंत पता लगाकर स्वचालित रूप से ट्रेन को रोक देंगे:
- महाराष्ट्र (12 सीस्मोमीटर): मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, खेड़ा, रत्नागिरी, लातूर और पंगरी के पास।
- गुजरात (16 सीस्मोमीटर): वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, महेमदाबाद, अहमदाबाद, अदेसर और पुराने भुज के पास।
पूरे विद्युतीकरण नेटवर्क की 24 घंटे निगरानी एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल सेंटर से रियल-टाइम में की जाएगी। किसी भी तरह की तकनीकी खराबी या आपात स्थिति में ऑटोमेटेड प्रोटेक्शन सिस्टम सेकंड के बेहद छोटे हिस्से (अंश) में सक्रिय होकर परिचालन को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखेगा।



