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कभी तो अपने अंदर भी कमियां ढूंढिये साहब, कब तक झाँकते रहोगे दूसरों के गिरेबान में….

शंकर पांडे (वरिष्ठ पत्रकार) एम.ए., बी.एससी., एलएल.बी., बी.जे. (पत्रकारिता) हैं। 46 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैँ, छत्तीसगढ़ पर 6 पुस्तकें भी लिख चुके हैं, प्रिंट मिडिया सहित इलेक्ट्रानिक मिडिया में भी कार्य किया है।



‘आइना-ए-छत्तीसगढ़ ‘

“Aaina-E-Chhattisgarh”
शंकर पांडेय, रायपुर, 10/10/2026

कॉलम । रायपुर, 10/10/2026, शंकर पांडे ।

 

कभी तो अपने अंदर भी कमियां ढूंढिये साहब, कब तक झाँकते रहोगे दूसरों के गिरेबान में….

 

Vishnu Deo Sai, Chief Minister, Chhattisgarh

सीएम विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रतिनिधि मंडल सिंगापुर की सफल यात्रा के बाद रायपुर लौटा, 3 दिवसीय इस दौरे में प्रदेश को 43,600 करोड़ की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुईं। किसी एक विदेश यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ को मिले सबसे बड़े निवेश प्रतिबद्धताओं में शामिल हैं। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (सिंग) फोरम 2026 में भागी दारीमें देश से केवल छत्तीसगढ़, हरियाणा का चयन किया गया। सिंगापुर प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ ने 41,750 करोड़ के ए.आई. रेडी डेटा सेंटर कैंपस के निवेश प्रस्ताव के साथ कौशल विकास में आई टीई एजुकेशन सर्विसेज़, सिंगापुर से महत्वपूर्ण एमओयू किया। वहीं गार्डन्स बाय द बे और मंडाई वाइल्डलाइफ ग्रुप जैसी विश्वस्तरीय संस्था ओं से हरित विकास, पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सह योग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

 

नाना का बस्तर से
भी रहा है नाता….

 

Bollywood Actor, Nana Patekar (seated in the center in the grey shirt).

अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से बस्तर के कलाकार जगत में भी शोक की लहर है। नाना पाटेकर का बस्तर से पुरानाखास जुड़ाव रहा है। बस्तर से अभिनेता नाना पाटेकर का लगाव था। 1987- 88 के दौरान दो बार बस्तर आए थे। बताया जाता है नाना ने धरम पुरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज में समयबिताया था। वे करीब एक महीने तक बस्तर में फिल्म शूटिंग के सिलसिले में रहे। इस दौरान फिल्म “आज की महाभारत” की शूटिंग बस्तर की खूबसूरत वादियों में की थी।इस फिल्म में नाना पाटेकर के साथ सुरेश ओबेरॉय, दीप्ती नवल, भारत भूषण, नीता पुरी सहित अन्य कलाकार भी बस्तर पहुंचे थे।अभि नेता नाना पाटेकर ने नक्सलवाद पर बनी फिल्म में काम करने के पहले बस्तर के नक्सली इलाकों में भ्रमण कर जमीनी स्थिति का पता करते थे। गंगा प्रोडक्शन की फिल्म आज की महा भारत की शूटिंग बस्तर की खूबसूरत वादियों में की गई थी। नाना खुली जीप से उस समय घूमा करते थे। बस्तर के उड़ीसा बॉर्डर से लगे धनपूंजी देवड़ा मंदिर, चित्रकोट, तीरथ गढ़, नया मुंडा, जगदलपुर शहर के कुछ स्थानों में शूटिंग की गई थीआज उनके निधन पर बस्तर के उनके साथी दुखी हैं। सत्यजीत भट्टाचार्य, जी श्याम, मनमोहन, उस जमाने के उनके बाल कलाकार साथी प्रशंसक महेंद्र महापात्र भी उनसे बहुत प्रभावित थे। वे रूंधे गले से कहते हैं, बेदाग, बेबाक कलाकार का जाना उनके लिए बहुत दुखदायी रहा। फिल्म की शूटिंग के दौरान बस्तर के स्था नीय कलाकारों और थिएटर से जुड़े लोगों को इन दिग्गज कलाकारों से मिलने और उनके साथ काम करने का अवसर मिला। नाना पाटेकर की सहजता और कलाकारों के प्रति अपनापन आज भी बस्तर के रंगकर्मियों की यादों में ताजा है। नाना पाटेकर के निधन से बस्तर का थिएटर, कलाकार जगत भी गहरे शोक में हैं। उनके साथ जुड़ी ये पुरानी यादें आज बस्तर के कलाकारों के लिए एक अनमोल विरासत बन गई हैं।

 

कोयला लेवी घोटाला,
कुछ राजनीतिक चेहरे….

 

छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी घोटाले में ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में पूरकचालान पेश किया। पूरक चालान में राज नीतिक हस्तियों की भूमिका पर बड़ाखुलासा हुआ है। विशेष अदालत में पेश की गई चार्जशीट में साफ तौर पर दर्ज किया गया है। कोयला लेवी घोटाले में की गई करोड़ की अवैध वसूली का बड़ा हिस्सा राजनीतिक प्रबंधन, चुनाव प्रचार, निजी परिसंपत्तियों के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। जांच अधिकारी चंद्रेश सिंह द्वारा तैयार किए गए इस चालान में 12 प्रमुख आरोपियों को नामजद किया गया है। जिनमें कई राजनीतिक चेहरे शामिल हैं। चालान में जिन नेताओं के नाम प्रमुखता से दर्ज हैं, उनमें प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तब के कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल, भिलाई के विधायक देवेंद्र सिंह यादव, बिलाईगढ़ के तब के विधायक चंद्रदेव राय, कांग्रेसी विनोद तिवारी और रामप्रताप सिंह शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, सिंडिकेट द्वारा जुटाए गए 540 करोड़ के अवैध फंड का सीधा कनेक्शन नेताओं से जुड़ता है। रामगोपाल अग्रवाल पर वसूली की बड़ी नकदी हासिल करने और उसे पार्टी संगठन, चुनाव व्यवस्थाओं में इस्तेमाल करने का आरोप हैतो भिलाई नगर के विधा यक देवेंद्र यादव को सिंडिकेट से 3 करोड़ से अधिक की राशि मिलने का तथ्य दर्ज है, जिसका इस्तेमाल खैरा गढ़ विधानसभा उप चुनाव और उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार में किया गया, बिलाईगढ़ के तब विधा यक चंद्रदेव प्रसाद राय पर सिंडिकेट से लगभग 46 लाख प्राप्त करने की बात कही गई है, जिसमें से 42 लाख उप्र चुनाव प्रबंधन में खर्च किए गए और बाकी राशि से रायपुर के ज्वेलर्स से सोने के आभू षण खरीदे गए। इसके अलावा कांग्रेस नेता विनोद तिवारी को 1.87 करोड़ और रामप्रताप सिंह को 2.01 करोड़ मिलने के साक्ष्य संलग्न किए गए हैं, राजनीतिक रैलियों, गाडिय़ों के इंत जाम, मीडिया प्रबंधन में खर्च किया गया। ई.ओ.डब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि नेताओं-अफसरों तक पैसा पहुंचाने उसका हिसाब रखने के लिए पाल ग्रुप, टुडे ग्रुप, दुर्ग ग्रुप और जय मां काली ग्रुप जैसे अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। अवैध तरीके से मिली इस नकद कमाई को वैध बनाने के लिए फर्जी कंपनियों, बिना गारंटीवाले कर्जों, झूठे शेयर खातों के जरिए घुमाया गया। इस पैसे से नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के करीबियों के नाम जमीनें, पेट्रोल पंप समेत अन्य खरीदी की गईं। 72 से अधिक गवाहों के बयानों ईडी, आयकर की छापेमारी में मिली सीक्रेट डायरियों के आधार पर चालान तैयार किया गया है। यह चालान फिलहाल अदालत में जमा कर दिया गया है, जिस पर अंतिम कानूनी निर्णय अदालत की सुनवाई पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

 

कुटुमसर गुफा की
मछलियां अंधी नहीं….

 

Kutumsar Cave Formations, Chhattisgarh.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर की भूमिगत नैसर्गिग गुफा कुटुमसर में पाई जाने वाली मछलियां अंधी नहीं होती हैं। अंधेरे में जन्म लेने तथा पलने के कारण देखने में अभ्यस्त नहीं होने के कारण अभी तक अंधा कह दिया जाता था। कुछ इसी तरह की मछलियां राजनांदगांव के अम्बागढ़ चौकी की पहाडिय़ों में भी मिली है। यह बात वैज्ञानिक शोध से सामने आई है। ज्ञात रहे कि बस्तर की इस गुफा की तुलना विश्व की सबसे लंबी भूगर्भित गुफा ‘कालर्सवार आव सेव’ से की जाती है। दण्डकारण्य के जंगलों में लगभग 40 किलो मीटर दक्षिण में कोट मसर गांव के 3 किलो मीटर पूर्व और गुणनसार पहाड़ी पर बनी नैसर्गिक गुफा की खोज प्रो. शंकर तिवारी ने सन् 58-60 में की थी। चूने पत्थरों के क्षेत्र का अध्ययन करने के दौरान 1933 के एक नक्शे के आधार पर यह गुफा की खोज की गई थी। गुफा के निर्माणकाल में प्रकृति को कितना समय लगा होगा यह कह पाना तो कठिन है पर इस गुफा की छत और दीवारों पर लटकते चूने के स्तंभों की अद्भुत छटा से पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यही होता है मानों किसी अनाड़ी चित्रकार ने तुलिका से रजत अथवा स्वर्णरंगों से युक्त हस्त छितरा दिये हो। बहरहाल इस अंधेरी गुफा में सूर्य की किरण नहीं पहुंच पाती है वहां पाई जाने वाली मछलियों के अंधी ही पैदा होने की अभी तक चर्चा रही,पर वैज्ञानिक शोध ने इसे झुठला दिया है। पं. रविशंकर विश्व विद्यालय जैविक अध्ययन शाला के वैज्ञानिक डॉ.ए.के. पति के नेतृत्व में किये गये शोध से यह सामने आई है, कुटुमसर गुफा की मछलियां अंधी पैदा नहीं होती है। वास्तविकता यह है कि अंधेरे में जन्म लेने और पलने के कारण यहां की निमाकाईलस प्रजाति की मछलियों की आंखों का डायामीटर छोटा होता है। ऐसी ही मछलियां केरल के कोट्टायम, मेघालय की सोजू गुफाओं में भी देखी जाती है, राजनांदगांव जिले के अम्बागढ़ चौकी की पहाड़ी गुफाओं में भी ऐसी ही मछलियां मिलती है, वे बहकर बाहर आई थी। मछलियों के अध्ययन से यह बात सामने आई है कि सवटैनियम वर्ग की इन मछलियों के अलावा अन्य जीव प्राकृतिक स्त्रोतों को बनाये रखने मददगार होते हैं, करीब 300 करोड़ साल प्राचीन कुटुमसर गुफा की खोज भूगोलविद प्रो. शंकर तिवारी ने की थी और मछली बड़े एंटीना वाले झिंगूर कैपिओला शंकराई से दुनिया को अवगत कराया था, करोड़ों साल से अंधेरे में पैदा होकर अंधेरे में अपना जीवन गुजारने वाली मछलियों को अंधी बताकर पर्यटकों को लुभाया जाता था पर हाल ही के वैज्ञानिक शोध से अंधेरी गुफा तथा वहां की मछलियों के लिए भी एक उम्मीद की किरण जाती है। पर्यटन के क्षेत्र में नये शोध को आगे बढ़ाने में सहायक होकर कुटुमसर गुफा की मछलियों को वर्षों से अंधा कहे जाने के रहस्य से पर्दा उठाने में मददगार साबित होंगे।

 

दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा
कमान संतोष सिंह को….

 

IPS Santosh Singh, DIG, CISF, Delhi Metro (DMRC).

छत्तीसगढ़ काडर के आईपीएस संतोष सिंह ने दिल्ली मेट्रो सुरक्षा की कमान सम्हाल ली है। छ्ग में 9 जिलों के एसपी रह चुके तथा वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत संतोष सिंह को दिल्ली मेट्रो (डी.एम.आर.सी) में सी.आई.एस.एफ  के डी.आई.जी  के रूप में पदस्थ कर सुरक्षा की कमान सौंपी गई है। 2011 बैच के आई.पी.एस संतोष सिंह को सुरक्षा प्रबंधन के अनुभव, प्रशासनिक दक्षता के चलते दिल्ली की लाइफ लाइन कहे जाने वाले दिल्ली मेट्रो लाईनों और यात्रियों की सुरक्षा संभालने का दायित्व दिया गया है। उल्लेखनीय है, दिल्ली मेट्रो 271 स्टेशन वाली एक त्वरित परिवहन प्रणाली है, जो भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली और उससे सटे यूपी, हरियाणा के शहरों को जोड़ती है। हाल में ही 7 सितंबर को दिल्ली मेट्रो ने एक दिन में करीब 82.45 लाख यात्रियों की आवाजाही दर्ज कर रिकॉर्ड बनाया है। संतोष सिंह छत्तीसगढ़ के 9 जिलों रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर व कोंडागांव जिले में एस पी/एसएस पी के पद पर रह चुके हैं। सुकमा में एएसपी और दुर्ग में सीएसपी भी रहे हैं। अभी वे हैदराबाद मेंडीआईजी साउथ ज़ोन-2 के रूप में आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक के औद्योगिक, रणनीतिक प्रतिष्ठानों व पूर्वी तट के बंदरगाहों की सुरक्षा देख रहे थे।

 

और अब बस…

 

* छत्तीसगढ़ में बिजली संकट गहरा सकता है। अचानक बढ़ी बिजली की मांग से आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। बिजली की डिमांड करीब 6 हजार मेगावाट तक पहुंचने के बाद पावर एक्सचेंज में भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है।

 

* सितंबर के अंतिम सप्ताह तेज बारिश, बाढ़ रायपुर,धमतरी, बालोद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, कोरबा, बेमेतरा, दुर्ग, कबीरधाम, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों के 1,083 गांवों में 74,130 से अधिक लोग बाढ़, जलभराव की चपेट में आए हैं।

 

‘आइना-ए-छत्तीसगढ़ ‘
{21 सालों से लगातार}

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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