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भिलाई के आत्मानंद स्कूल में फैली दहशत: एक के बाद एक बेहोश हुईं 8 छात्राएं, मेडिकल टीम ने बताया ‘मास हिस्टीरिया’

भिलाई के स्वामी आत्मानंद स्कूल में एक के बाद एक 8 छात्राएं रहस्यमयी ढंग से बेहोश हुईं। डॉक्टरों ने इसे 'मास हिस्टीरिया' करार दिया है। जानिए क्या है यह मनोवैज्ञानिक स्थिति और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं।







15 जुलाई 2026, रायपुर। छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक सरकारी स्कूल इन दिनों पढ़ाई से ज्यादा एक बेहद संवेदनशील और रहस्यमयी घटना को लेकर चर्चा में है। खम्हरिया स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी घट रहा है, उसने न केवल स्कूल प्रशासन बल्कि जिला प्रशासन और अभिभावकों की भी नींद उड़ा दी है। स्कूल की कक्षा 9वीं और 11वीं की कई छात्राएं अचानक एक-एक कर बीमार और बेहोश होने लगी हैं। इस अजीबोगरीब स्थिति के कारण पूरे स्कूल परिसर में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

यह मामला तब और ज्यादा गंभीर हो गया जब बीते सोमवार को तीन छात्राएं अचानक कक्षा में चीखने-चिल्लाने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक उन छात्राओं के हाथ-पैर अकड़ गए और आंखों से लगातार आंसू बहने लगे। इसके कुछ ही पलों बाद वे अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ीं। स्कूल प्रबंधन ने बिना कोई समय गंवाए मुस्तैदी दिखाई और तुरंत पीड़ित छात्राओं को नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

अस्पताल में कुछ घंटों तक डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखने के बाद छात्राओं की स्थिति सामान्य हो गई। राहत की बात यह रही कि उनकी शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में किसी भी तरह की कोई शारीरिक या जैविक बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं। डॉक्टरों ने इसे पूरी तरह से एक मानसिक और भावनात्मक प्रतिक्रिया का हिस्सा माना है।

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तीन दिनों में आठ छात्राएं हुईं शिकार, बढ़ता गया खौफ

स्कूल की प्राचार्य सुषमा दीवान के अनुसार, यह कोई एक अकेली या पहली घटना नहीं थी। इससे पहले 9 जुलाई को भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब अचानक पांच छात्राएं इसी तरह बेहोश हो गई थीं। इसके बाद 11 जुलाई को फिर से तीन और छात्राओं के साथ ठीक वैसा ही वाकया दोहराया गया। लगातार हो रही इन घटनाओं से स्कूल में पढ़ने वाले दूसरे बच्चों और शिक्षकों के मन में भी एक अनजाना डर बैठ गया।

घटना की गंभीरता और अभिभावकों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए दुर्ग जिले के कलेक्टर ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया। उनके सख्त निर्देश पर जिला अस्पताल दुर्ग से विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष टीम को तुरंत जांच के लिए स्कूल रवाना किया गया। इस टीम में प्रमुख रूप से वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बालमुकुंद नेताम और डॉ. रानू नायडू शामिल थीं।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की इस टीम ने पीड़ित छात्राओं का बेहद बारीकी से शारीरिक और मानसिक परीक्षण किया। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने साफ किया कि यह कोई भूत-प्रेत या किसी वायरस का हमला नहीं है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे ‘मास हिस्टीरिया’ (Mass Hysteria) और शारीरिक कमजोरी का मिलाजुला परिणाम कहा जाता है।

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क्या है यह ‘मास हिस्टीरिया’ या मास साइकोजेनिक इलनेस?

चिकित्सा विज्ञान और मनोविज्ञान में इस तरह की घटनाओं को ‘मास साइकोजेनिक इलनेस’ (Mass Psychogenic Illness – MPI) के नाम से जाना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक ऐसी जटिल मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो अत्यधिक तनाव, परीक्षा के दबाव या किसी भावनात्मक संकट के माहौल में पैदा होती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह स्थिति बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब कोई एक व्यक्ति अत्यधिक तनाव के कारण चीखता है या बेहोश होता है, तो उसे देखकर आसपास के संवेदनशील लोग भी अनजाने में उसी मानसिक स्थिति का शिकार हो जाते हैं। यह स्थिति खासकर किशोरावस्था (Adolescence) की लड़कियों में अधिक देखी जाती है। इसमें बिना किसी शारीरिक बीमारी के भी चक्कर आना, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैर कांपना या घबराहट जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

डॉक्टरों ने स्कूल प्रशासन को आश्वस्त किया है कि इस स्थिति से घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। फिलहाल सभी पीड़ित छात्राओं के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और वे खतरे से बाहर हैं। लेकिन स्कूल के भीतर बार-बार इस तरह की घटनाओं का दोहराया जाना निश्चित रूप से एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

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शिक्षा विभाग और प्रशासन ने संभाला मोर्चा, होगी काउंसलिंग

इस पूरे रहस्यमयी मामले के सामने आने के बाद अब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी किए हैं कि केवल शारीरिक जांच ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसके लिए जल्द ही स्कूल में विशेषज्ञ काउंसलर्स की एक टीम भेजी जाएगी जो बच्चों की काउंसलिंग करेगी।

प्रशासन का मानना है कि छात्राओं के मन से इस डर को निकालना सबसे पहली प्राथमिकता है। इसके लिए स्कूल के भीतर के वातावरण को शांत, तनावमुक्त और सकारात्मक बनाने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। डॉक्टरों ने भी सलाह दी है कि बच्चों पर पढ़ाई या परीक्षाओं का जरूरत से ज्यादा दबाव न बनाया जाए और उन्हें खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका मिले।

फिलहाल, एहतियात के तौर पर स्वामी आत्मानंद स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम को तैनात रखा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे घर पर बच्चों से बातचीत करें, उनके खान-पान का ध्यान रखें और सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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